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Sant Kabir Nagar News: नवजात और प्रसूता की मौत मामले में सील अस्पताल संचालक ने दी आत्मदाह की धमकी
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संतकबीरनगर। मेंहदावल स्थित एक अस्पताल में गर्भवती महिला का ऑपरेशन कर पट्टी छोड़ने और बच्चे की मौत होने के मामले में सील हुए अस्पताल संचालक ने सीएमओ कार्यालय में पहुंचकर सील खुलवाने का दबाव बनाया है। संचालक ने सीएमओ से दो दिन के अंदर अस्पताल न खोले जाने पर आत्मदाह की धमकी दी है। सीएमओ डॉक्टर रामानुज कन्नौजिया ने इस संबंध में कोतवाली खलीलाबाद पुलिस को तहरीर देकर अस्पताल संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। हालांकि मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की अभी पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से 27 अक्तूबर को पुलिस को दी गई तहरीर में बताया गया कि न्यू केयर अस्पताल के संचालक योगेंद्र कचेर कुछ सहयोगियों और मीडिया कर्मियों के साथ सीएमओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कार्यालय में हंगामा करते हुए अस्पताल का पंजीकरण निरस्त किए जाने पर सवाल उठाए और अधिकारियों पर पैसे लेने का आरोप लगाया। इनके अस्पताल में एक बच्चे और महिला की मौत हो गई थी। परिजन की तरफ से यह आरोप लगाए गए थे कि महिला का ऑपरेशन करने के बाद उसके पेट में पट्टी छोड़ दी गई। साथ ही उपचार में लापरवाही बरती गई जिससे बच्चे की भी मौत हो गई। जांच में अस्पताल में कई प्रकार की अनियमितताएं पाई गईं। इस आधार पर अस्पताल सील कर दिया गया।
पुलिस को दी तहरीर में संचालक ने चेतावनी दी कि यदि अस्पताल दोबारा नहीं खोला गया तो वह आत्मदाह करेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। सीएमओ ने इसे सरकारी कार्य में बाधा डालने, धमकी देने और स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल करने का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
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अस्पताल संचालक योगेंद्र कचेर का कहना है कि अधिकारियों ने अस्पताल खोलने को लेकर तीन लाख रुपये ले लिए थे। उसके बाद भी अस्पताल नहीं खोला और दो लाख रुपये की फिर डिमांड की जा रही है। सीएमओ डॉ. रामानुज कन्नौजिया ने आरोपों को निराधार बताया। कहा कि अस्पताल सील होने की वजह से वह आरोप लगा रहा है।
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अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही आई सामने
एक जनवरी 2026 को अस्पताल में बेलहर कला क्षेत्र के जंगल दशहर टोला निवासी हरगोविंद प्रजापति की पत्नी विनिता (38) का सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सक की ओर से पेट में गॉज पट्टी छोड़ दी गई। प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई। जबकि संक्रमण से पीड़ित विनिता की भी 29 अगस्त 2026 को मौत हो गई। मामले की जांच के लिए गठित टीम ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आने की बात कही। इसके बाद एक सितंबर को अस्पताल को सील कर दिया गया। सीएमओ कार्यालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए थे।
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जांच में सामने आईं गंभीर लापरवाही की बातें
सीएमओ कार्यालय की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था। वहां से उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया। बाद में महिला की हालत गंभीर होने पर उसे दोबारा उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में महिला के पेट में संक्रमण और आंतों से संबंधित गंभीर जटिलताओं का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 29 अगस्त को उसकी मौत हो गई। जांच टीम ने प्रकरण में चिकित्सकीय लापरवाही की आशंका जताते हुए संबंधित अभिलेखों और उपचार संबंधी तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की संस्तुति की।
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29 मई को हुआ था पंजीकरण का नवीनीकरण
सीएमओ की ओर से पुलिस को दिए गए पत्र के मुताबिक, अस्पताल का पंजीकरण 29 मई 2026 को नवीनीकृत किया गया था। हालांकि, महिला और नवजात की मौत के मामले में जांच के बाद अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की गई। सीएमओ कार्यालय के अनुसार, 16 अक्तूबर को अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद संचालक ने कार्यालय पहुंचकर अस्पताल खोलने की मांग की और कथित तौर पर आत्मदाह की चेतावनी दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने पुलिस से मामले की जांच कर संचालक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
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मामले में तहरीर मिली है। घटना की जांच कराई जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएगा उसके अनुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-प्रियम राजशेखर पांडेय, सीओ सिटी
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से 27 अक्तूबर को पुलिस को दी गई तहरीर में बताया गया कि न्यू केयर अस्पताल के संचालक योगेंद्र कचेर कुछ सहयोगियों और मीडिया कर्मियों के साथ सीएमओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने कार्यालय में हंगामा करते हुए अस्पताल का पंजीकरण निरस्त किए जाने पर सवाल उठाए और अधिकारियों पर पैसे लेने का आरोप लगाया। इनके अस्पताल में एक बच्चे और महिला की मौत हो गई थी। परिजन की तरफ से यह आरोप लगाए गए थे कि महिला का ऑपरेशन करने के बाद उसके पेट में पट्टी छोड़ दी गई। साथ ही उपचार में लापरवाही बरती गई जिससे बच्चे की भी मौत हो गई। जांच में अस्पताल में कई प्रकार की अनियमितताएं पाई गईं। इस आधार पर अस्पताल सील कर दिया गया।
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पुलिस को दी तहरीर में संचालक ने चेतावनी दी कि यदि अस्पताल दोबारा नहीं खोला गया तो वह आत्मदाह करेंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। सीएमओ ने इसे सरकारी कार्य में बाधा डालने, धमकी देने और स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल करने का मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
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अस्पताल संचालक योगेंद्र कचेर का कहना है कि अधिकारियों ने अस्पताल खोलने को लेकर तीन लाख रुपये ले लिए थे। उसके बाद भी अस्पताल नहीं खोला और दो लाख रुपये की फिर डिमांड की जा रही है। सीएमओ डॉ. रामानुज कन्नौजिया ने आरोपों को निराधार बताया। कहा कि अस्पताल सील होने की वजह से वह आरोप लगा रहा है।
अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही आई सामने
एक जनवरी 2026 को अस्पताल में बेलहर कला क्षेत्र के जंगल दशहर टोला निवासी हरगोविंद प्रजापति की पत्नी विनिता (38) का सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान चिकित्सक की ओर से पेट में गॉज पट्टी छोड़ दी गई। प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई। जबकि संक्रमण से पीड़ित विनिता की भी 29 अगस्त 2026 को मौत हो गई। मामले की जांच के लिए गठित टीम ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आने की बात कही। इसके बाद एक सितंबर को अस्पताल को सील कर दिया गया। सीएमओ कार्यालय की ओर से संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए थे।
जांच में सामने आईं गंभीर लापरवाही की बातें
सीएमओ कार्यालय की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑपरेशन के बाद महिला की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया था। वहां से उसे मेडिकल कॉलेज भेजा गया। बाद में महिला की हालत गंभीर होने पर उसे दोबारा उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में महिला के पेट में संक्रमण और आंतों से संबंधित गंभीर जटिलताओं का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 29 अगस्त को उसकी मौत हो गई। जांच टीम ने प्रकरण में चिकित्सकीय लापरवाही की आशंका जताते हुए संबंधित अभिलेखों और उपचार संबंधी तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की संस्तुति की।
29 मई को हुआ था पंजीकरण का नवीनीकरण
सीएमओ की ओर से पुलिस को दिए गए पत्र के मुताबिक, अस्पताल का पंजीकरण 29 मई 2026 को नवीनीकृत किया गया था। हालांकि, महिला और नवजात की मौत के मामले में जांच के बाद अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की गई। सीएमओ कार्यालय के अनुसार, 16 अक्तूबर को अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद संचालक ने कार्यालय पहुंचकर अस्पताल खोलने की मांग की और कथित तौर पर आत्मदाह की चेतावनी दी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने पुलिस से मामले की जांच कर संचालक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
मामले में तहरीर मिली है। घटना की जांच कराई जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएगा उसके अनुसार आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-प्रियम राजशेखर पांडेय, सीओ सिटी