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Sant Kabir Nagar News: रमजान के चौथे जुमे की नमाज में देश में खुशहाली की दुआएं मांगी

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 02:01 AM IST
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Prayers were offered for prosperity in the country during the fourth Friday prayer of Ramadan.
सेमरियावां जामा मस्जिद में जुमा की नमाज अदा करते रोजेदार-संवाद
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सेमरियावां। रमजान माह के चौथे जुमे की नमाज सेमरियावां क्षेत्र के बाजारों, चौराहों, गांवों की मस्जिदों में अदा की गई। जामा मस्जिदों में रोजदारों की भीड़ रही। वृद्ध, नौजवान, बच्चों ने नमाज-ए-जुमा अदा की। इस दौरान मुल्क में अमन चैन न खुशहाली के लिए दुआएं मांगी गई। रमजान के चौथे जुमे की तैयारी के लिए सुबह से लोग जुट गए।
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सवेरे से ही घरों व मस्जिदों में विशेष साफ-सफाई की गई। 12: 30 बजे जुमा की अजान होते ही रोजेदार जामा मस्जिदों में नमाज जुमा अदा करने के लिए एकत्र होने लगे। मस्जिदों में भीड़ को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए। जामा मस्जिद सेमरियावां, मदनी मस्जिद सेमरियावां, खलीलिया मस्जिद सेमरियावां सहित बाघनगर, दुधारा, उसरा शहीद , लोहरौली, करही, सालेहपुर, अगया, दरियाबाद, तिलजा, तिनहरी माफी, दानोकुइयां, बिगरा मीर, चिउटना, नौवा गांव, उंचहरा कला, सालेहपुर, बूढ़ाननगर, रक्सा कला, देवरिया नासिर, कोहरियावां आदि गांवों की जामा मस्जिदों रोजेदारों ने बड़ी संख्या में नमाज अदा की।
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मदनी मस्जिद में इमाम कारी नसीरुद्दीन ने नमाज पढ़ाई। नमाज-ए-जुमा के मौके पर इमाम कारी नसीरुद्दीन ने रमजान माह की अहमियत पर बयान किया। साथ ही रमजान के आखिरी अशरा जहन्नुम से निजात में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रोजा आदमी के लिए ढाल है। रोजा अल्लाह के अजाब से हिफाजत करता है। इस मुबारक माह रमजान में झूठ से बचना चाहिए। निगाह और जबान की हिफाजत करें। हलाल रोजी से रोजा इफ्तार करें। हराम की कमाई से बचें।
शिक्षक जफीर अली करखी ने माह-ए-रमजान की आखिरी दस दिन की विशेषता के बारे में बताया कि रमजानुल मुबारक के आखिरी अशरा के ताक रातों में से एक रात शब-ए-कद्र कहलाती है। जो 21, 23, 25, 27 और 29 रमजान की रात में से कोई एक रात है। जो बहुत ही बरकत की रात है। कुरान पाक में इस रात को हजार रातों से अफजल बताया गया है। खुश नसीब है वह व्यक्ति जिसको इस शब-ए-कद्र की रात नसीब हो जाए। जो व्यक्ति इस एक रात को इबादत, दुआ, जिक्र अजकार, नफिल नमाज, कुरान की तिलावत आदि में गुजार दे।
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