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Shahjahanpur News: कुत्तों के झुंड ने मासूम को मार डाला, 15 जगह जख्म देख बेहोश हुए पिता

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 25 May 2026 02:12 AM IST
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Pack of Dogs Kills Innocent Child; Father Faints Upon Seeing 15 Wounds
स्वालिया का भाई इकराम। संवाद
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शाहजहांपुर। ककराकलां में रविवार सुबह कुत्तों के झुंड ने एक मासूम को नोचकर मार डाला। स्वालिया (11) अपने खेत से भाई को बुलाने गई थी तभी 10-12 कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। उसके सीने और गर्दन पर 15 जगह गहरे घाव देखकर पिता नईम बेहोश हो गए। गंभीर हालत में स्वालिया को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


नईम ने ककराकलां में नगर निगम के ई-बस चार्जिंग स्टेशन के पास बंटाई पर खेत ले रखा है। वह अपनी बेटी स्वालिया के साथ खेत पर सब्जी तोड़ने गए थे। थोड़ी देर बाद नईम ने बेटी को अपने भाई इकराम को बुलाने के लिए 200 मीटर दूर दूसरे खेत पर भेज दिया। इसी दौरान कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। चीखें सुनकर भाई इकराम बाइक से उसके पास पहुंचा। बाइक अनियंत्रित होने से वह गिर गया और उसके चेहरे पर चोट आ गई। फिर भी उसने कुत्तों को जैसे-तैसे भगाया। चीख-पुकार सुनकर नईम और कई अन्य लोग वहां पहुंच गए। बेटी को खून से लथपथ देखकर पिता बेहोश हो गए। गांव वालों ने बताया कि थोड़ी देर बाद उन्हें होश आ गया।
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स्वालिया को लेकर लोग मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां डॉक्टर ने बच्ची को बरेली या लखनऊ ले जाने के लिए कहा। परिजन उसे बाहर ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी डॉक्टर ने परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया। अधिकारियों को मुताबिक जनपद में रोज 300 लोगों को कुत्ते काटते हैं जबकि शहर में रोज 50 लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने अस्पताल पहुंचते हैं।
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शेल्टर होम के लिए जगह नहीं तलाश सके अफसर

नगर निगम की कार्रवाई केवल कुत्तों को पकड़कर नसबंदी तक सीमित है। शेल्टर होम के लिए तीन महीने में जगह नहीं तलाशी जा सकी है। इस वजह से सार्वजनिक स्थानों पर कुत्ते खतरा बने हुए हैं।

-बालिका की मौत के बाद अधिकारी हरकत में आए। एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर (एबीसी) से कर्मचारी मौके पर पहुंचे। वहां मिले तीन-चार कुत्तों को पकड़कर सेंटर ले गए। संवाद

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खून से लथपथ बिटिया को अस्पताल में नहीं मिली वैक्सीन... लानी पड़ी मेडिकल स्टोर से

शाहजहांपुर। हमारी बिटिया स्वालिया तड़प रही थी, मगर अस्पताल में उसकी चीखें कोई असर नहीं डाल सकीं। यह कहते हुए नईम बुरी तरह फफक पड़ते हैं। बताया कि उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज में इस उम्मीद से लेकर पहुंचे थे कि वहां उसका इलाज ठीक से होगा और स्वालिया को कुछ होगा नहीं। यह भरोसा तब गलत निकला, जब डॉक्टरों ने पहले पर्चा बनवाने के लिए दौड़ाया और फिर एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) भी बाहर से मंगवाई। यह सब देखते-देखते आखिर बिटिया ने दम तोड़ दिया।  पिता नईम की यह व्यथा सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाने वाली है। 

नईम के मुताबिक गंभीर रूप से घायल स्वालिया को लेकर वह और उनका बेटा इकराम सुबह सवा सात बजे राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। डॉक्टरों ने उनकी बेटी का इलाज सही से इलाद नहीं किया। बेटी को वहां से ट्राॅमा सेंटर भेजा गया। इतनी हालत खराब होने के बावजूद डॉक्टर ने पहले पर्चा बनवाने पर जोर दिया, उसी की भागदौड़ में काफी समय लग गया। 

इसी बीच उनके दामाद यामीन मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो उनसे बाहर से एआरवी लाने के लिए कहा गया। यामीन बाहर मेडिकल स्टोर से 380 रुपये में एआरवी लेकर आए। दिखाने के लिए इलाज चलता रहा, रेफर करके डॉक्टरों ने हाथ झाड़ लिए थे। अंतत ः स्वालिया ने दम तोड़ दिया। 

वहीं, प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सामान्य मरीजों को एआरवी नहीं लगाई जाती लेकिन इमरजेंसी के लिए एआरवी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। अगर बाहर से एआरवी मंगवाई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।

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फूटकर रोया पिता...बोला : बच्ची ही चली गई तो मुआवजे का क्या करेंगे

स्वालिया की मौत के बाद परिजन उसके शव को लेकर घर आ गए। आसपास के लोगों ने पिता नईम को बेटी का पोस्टमॉर्टम कराने के लिए समझाया तो उन्होंने मना कर दिया। फूटकर रोते हुए बोले कि बच्ची को पहले ही कुत्तों ने इतना नोच दिया है, अब पोस्टमॉर्टम कराने का क्या फायदा। कुछ लोगों ने समझाया कि इससे मुआवजा मिल सकता है और बच्ची की मौत लिखापढ़ी में आ जाएगी। शासन तक यह घटना पहुंचेगी। इस पर नईम ने कहा कि वह मेहनत करके परिवार का गुजारा करते हैं। अपनी लाड़ली बेटी को खो दिया है। उनको मुआवजे की जरूरत नहीं है। वहीं, चौक कोतवाली पुलिस उनके घर पहुंची और परिजनों से जानकारी ली।

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पड़ोस के घर में दीनी तालीम के लिए जाती थी स्वालिया

नईम ने बताया कि गरीबी की वजह से वह बच्चों को स्कूल में पढ़ा तो नहीं पाए लेकिन दीनी तालीम हासिल कराई। स्वालिया भी पड़ोस के घर में दीनी तालीम हासिल करती थी।

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सबकी लाड़ली स्वालिया की मौत से छाया मातम

स्वालिया परिवार में सबसे छोटी होने की वजह से सबकी लाड़ली थी। भाई-बहन से लेकर माता-पिता स्वालिया की हर बात को मानते थे, खूब दुलार करते थे। जब तक स्वालिया घर पर नहीं होती थी, सन्नाटा छाया रहता था। रविवार को मुस्कुराती हुई घर से निकली स्वालिया की मौत के बाद घर पर मातमी सन्नाटा परिजनों की रह-रहकर गूंजती चीत्कार से टूट रहा था। मोहल्ले के लोग भी इकट्ठा थे, परिजनों को ढांढस बंधा रहे थे।

नईम ने अपनी दो बेटियों फूल बी और असरा की शादी कर दी थी। परिवार में बेटी निशरा, आलिया, भाई अजीम और इकराम हैं। मां शबाना स्वालिया की मौत से बेसुध हो गईं हैं। सभी भाई बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। नईम दिल के मरीज है। वह किसी से कुछ कह भी नहीं पा रहे थे। बेटी को खोने का गम उनके चेहरे पर दिखाई दे रहा था।

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घटना के बाद पकड़े कुत्ते

घटनास्थल पर स्वालिया पर हमला करने के बाद दोपहर में अधिकतर कुत्ते वहां से चले गए थे। बालिका की मौत के बाद जब हड़कंप मचा तो एबीसी सेंटर से कर्मचारी मौके पर पहुंचे। वहां मिले तीन-चार कुत्तों को पकड़कर सेंटर ले गए।

स्वालिया का भाई इकराम। संवाद

स्वालिया का भाई इकराम। संवाद

स्वालिया का भाई इकराम। संवाद

स्वालिया का भाई इकराम। संवाद

स्वालिया का भाई इकराम। संवाद

स्वालिया का भाई इकराम। संवाद

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