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Shahjahanpur News: भौतिक और आध्यात्मिक ज्ञान के लिए शिक्षा और संस्कार में सुधार आवश्यक

Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 12:34 AM IST
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Religious activities
जलालाबाद में आश्रम में अखिल भारतीय सोअहम महामंडल के तत्वावधान में आयोजित संत सम्मेलन में उप​स्थ
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जलालाबाद। अखिल भारतीय सोअहम महामंडल की ओर से सोअहम आश्रम में आयोजित संत सम्मेलन के तीसरे दिन बुधवार को सोअहम पीठाधीश्वर स्वामी सत्यानन्द महाराज ने प्रवचन देते हुए जीवन में शिक्षा और संस्कार में सुधार लाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि इससे भौतिक और आध्यात्मिक और भौतिक ज्ञान में वृद्धि होगी।
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उन्होंने कहा कि जीवन में मनुष्य को व्यवहार, आचरण, आहार-विहार और रहन-सहन पवित्र रखना चाहिए। हमारे शास्त्रों ने भी शुद्ध आचरण को परम धर्म बताया है। आचरण रहित व्यक्ति को वेद भी शुद्ध नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि मातृ देवो भव, पितृ देवो भव और आचार्य देवो भव जैसे भाव हमारे मन में स्थापित रहने चाहिए। भक्त ध्रुव को अपनी माता से यही संस्कार मिले थे। बालकों को संस्कारित करने के लिए उनकी माताओं का संस्कारित होना आवश्यक है।
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प्रवचन की शृंखला में स्वामी प्रीतमदास ने रामायण के माध्यम से श्रीराम की शिक्षा और संस्कारों का वर्णन किया। स्वामी शिवानंद ने बालकों को संस्कारित बनाने की जरूरत बताई। स्वामी सच्चिदानंद ने कबीर के भजनों के माध्यम से श्रद्धासुओं को शरीर और मन को पवित्र रखने का संदेश दिया। स्वामी नारायणानंद के संचालन में हुए संत सम्मेलन के अंत में रमेश गुप्ता, प्रमोद गुप्ता, वेदप्रकाश, रामगोपाल, प्रधान सिंह, कृष्ण कुमार मंगलम आदि श्रद्धालुओं और भगवान सहित मंचासीन साधु संतों की आरती उतारी।
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ईश्वर के प्रति समर्पित होकर जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का दिया संदेश

जलालाबाद। पुराना डाकघर के पास होली स्थल पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को कथा व्यास पंडित अक्षय मिश्रा ने कहा कि प्रभु चरणों से निस्वार्थ भाव से किया गया अनुराग मनुष्य का जीवन बदल सकता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक ही है और उनमें किसी प्रकार का कोई भेद नही करना चाहिये।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान को अलग-अलग मानने और पूजने वाले हो सकते हैं, परंतु अदृश्य परम शक्ति एक ही है। उन्होंने कहा कि परिणाम की चिंता न करके मनुष्य ईश्वर को समर्पित होकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करता रहे। इससे भगवान निश्चित ही उसका कल्याण करेंगे। निष्ठा और समर्पण के साथ किया गया कार्य कभी निष्फल नही होता। उन्होंने कहा कि धैर्यवान, विनम्र और निष्ठावान मनुष्य जीवन मे ऊंचाइयों को प्राप्त करता है। कथा श्रवण में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। अंत मे आरती कर सभी को प्रसाद वितरित किया गया। संवाद
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भगवान श्रीकृष्ण ने उंगली पर गोवर्धन उठाकर इंद्र का तोड़ा अहंकार



कुर्रियाकलां। पथरा खास गांव के शिव मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक रामवीर शास्त्री ने गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाकर संदेश दिया कि किसी को घमंड नहीं करना चाहिए क्योंकि भगवान अहंकार का भक्षण करते हैं। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने देवराज इंद्र के अहंकार को चूर करने और ब्रजवासियों को भारी वर्षा के कोप से बचाने के लिए न केवल इंद्र के नाम से यज्ञ बंद कराया, गिरिराज गोवर्धन की पूजा आरंभ कराई। क्रोधावेश में इंद्र ने मूसलधार बारिश की, तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर पूरा पर्वत उठाकर सबको बचाया। बाद में इंद्र को अपनी गलती का बोध हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमायाचना की। अंत में भगवान के विग्रह की आरती उतारकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। कथा श्रवण में तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे। संवाद

जलालाबाद में आश्रम में अखिल भारतीय सोअहम महामंडल के तत्वावधान में आयोजित संत सम्मेलन में उपस्थ

जलालाबाद में आश्रम में अखिल भारतीय सोअहम महामंडल के तत्वावधान में आयोजित संत सम्मेलन में उपस्थ

जलालाबाद में आश्रम में अखिल भारतीय सोअहम महामंडल के तत्वावधान में आयोजित संत सम्मेलन में उपस्थ

जलालाबाद में आश्रम में अखिल भारतीय सोअहम महामंडल के तत्वावधान में आयोजित संत सम्मेलन में उपस्थ

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