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Siddharthnagar News: बाणगंगा नदी पर अधूरे पुल के निर्माण को मिली रफ्तार... मजबूत होगी बॉर्डर क्षेत्र की कनेक्टिविटी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 08 Mar 2026 01:54 AM IST
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शोहरतगंढ क्षेत्र के बगुलहवा–झरुआ में निर्माणधीन पुल।
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चार वर्ष पहले झारूआ-बगुलहवा के बीच बाणगंगा नदी पर शुरू हुआ था पुल का निर्माण, बजट न मिलने पर ठप हो गया था निर्माण
14 करोड़ रुपये की मिली वित्तीय स्वीकृति, निर्माण से सुगम होगी पीलीभीत और लखीमपुर खीरी की राह
सशस्त्र सीमा बल के जवान और सीमावर्ती थानों की पुलिस को भी सुरक्षा में मिलेगी सहूलियत
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल की कनेक्टिविटी आने वाले दिनों में बेहतर होगी। सीमा से सटे क्षेत्र में बहने वाली बानगंगा नदी पर चार साल से अधूरा पड़े बगुलहवा-झरुआ पुल के निर्माण की प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी गई है। लटकी परियोजना को बजट का बूस्टर डोज मिला है और इसका काम भी शुरू हो गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाॅर्डर की राह सुगम होने के साथ लखीमपुर खीरी और उत्तराखंड सीधे कनेक्ट हो जाएगा। इसके साथ ही बिहार की राह आसान हो जाएगी। इसके अस्तित्व में आने से न सिर्फ आवागमन सुगम होगा बल्कि आने वाले दिनों में व्यापार, कारोबार के बेहतर होने की उम्मीद है।
जनपद की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। बार्डर पूरी तरह से खुला है और कुछ मुख्य मार्ग के अलावा पगडंडी आने-जाने में प्रयोग करते हैं। इसमें नेपाल से कई नदियां निकलीं हैं, जिसमें बानगंगा नदी प्रमुख है। झरुआ में डैम बना हुआ है, जहां से सिंचाई के लिए नहरें निकाली गई हैं। इसके साथ भारत-नेपाल सीमा के समानांतर इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड परियोजना तहत सड़क बनी, जिससे का उद्देश्य नेपाल से लगने वाली देश की सीमा पर बेहतर कनेक्टिविटी थी।
नेपाल से आने वाली बानगंगा नदी पर बगुलहवा-झरुआ पुल के निर्माण के लिए कार्ययोजना वर्ष 2010 में तैयार होकर स्वीकृति हुई। केंद्र सरकार ने फरवरी 2018 में दिसंबर 2022 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन, बीच में आने वाली बाधाओं के कारण बानगंगा नदी पर पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश ब्रिज कारपोरेशन लिमिटेड गोरखपुर ने शुरू किया, लेकिन बीच में पश्चिमी छोर पर इसे अधूरा छोड़ दिया गया। विभागीय से जुड़े लोगों की मानें तो कार्य देर से शुरू होने के कारण लागत बढ़ गई है। इसलिए जो बजट था, उतने में निर्माण पूरा नहीं हो सका और अधर में लटक गया। इसके बाद पुल निर्माण की प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया था। इसके साथ ही कुछ तकनीकी दिक्कत होने की बात भी इसमें मुख्य वजह सामने आई थी।
तत्कालीन जिलाधिकारी ने मामले में स्थानीय निरीक्षण करके देखा और तकनीकी समस्या और अन्य पहलुओं की जांच के लिए आईआईटी रुढ़की टीम ने सर्वे किया और उसकी रिपोर्ट के बाद एस्टीमेट पर बजट स्वीकृत होने के साथ ही काम शुरू हो गया है। 13 करोड़ रुपये से अधिक लागत निर्माण किया जाएगा। उम्मीद है कि एक साल के भीतर इसका निर्माण पूरा हो जाएगा और इंडो-नेपाल बाॅर्डर की सड़क से जोड़ दिया जाएगा, जिसके के बाद आवागमन सुगम हो सकेगा।
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चार किलोमीटर अतिरिक्त लगाना पड़ता है चक्कर
खुनुवां। पुल निर्माण से बाॅर्डर इलाके का बड़ा क्षेत्र के कनेक्ट हो जाएगा। पुल निर्माण शुरू होने से लोगों को उम्मीद जग गई थी कि आवागमन सुगम हो जाएगा, लेकिन निर्माण के रुकने के कारण निराश हो गए थे। पुल बन जाने से चार से सात किलोमीटर दूरी क्षेत्र के लोगों की कम हो जाती है। जबकि, मौजूदा समय में उतनी अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। आम राहगीरों और सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को चार से 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। ग्रामीणों की चिंता और उम्मीद बानगंगा नदी के पूर्वी उत्तरी छोर के गांव बगुलहवा, मसिना, अठकोनियां, भदवा, परसौना, खुनुवां, डोहरिया खुर्द, डोहरिया बुजुर्ग, सेमरा और पश्चिमी उत्तरी छोर के झरुआ और जोगडिहवा के ग्रामीण लंबे समय से अधूरे पुल के निर्माण की मांग कर रहे थे। मौजूदा समय में पुल को खड़ा करने के लिए पिलर का बेस और मिट्टी का काम शुरू हो गया है, जिससे बरसात शुरू होने से पहले पिलर तैयार किया जा सके। इसके बाद पुल बनाने में दिक्कत नहीं होगी। इसके बाद दोनों तरफ से सड़क को जोड़ना रहेगा। प्रधान संघ जिलाध्यक्ष पवन कुमार मिश्रा, सचमुच त्रिपाठी, उद्योग व्यापार संगठन अध्यक्ष रविन्द्र कुमार गुप्ता, प्रधान सद्दाम हुसैन, समेत क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पुल के अस्तित्व में आने से लोगों को बहुत आसानी होगी। इसके साथ ही बिहार से लेकर उत्तराखंड का आवागमन आसान हो जाएगा।
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सामरिक और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण
क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह पुल सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पूर्ण होने से सीमा पार से होने वाली तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण, सुरक्षा बलों की त्वरित आवाजाही तथा सीमावर्ती गांवों में बेहतर यातायात सुविधा सुनिश्चित होगी। साथ ही क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। चार वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अब पुल व एप्रोच निर्माण की शुरुआत ने लोगों की राह आसान होने की उम्मीद को मजबूत कर दिया है।
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बिहार और उत्तराखंड से होगा जुड़ाव
इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड परियोजना की सड़क सीमा के बिहार, उत्तराखंड तक को जोड़ेगा। जानकारों के अनुसार सड़क का मुख्य रूट (पश्चिम से पूर्व) यह सड़क पश्चिम में उत्तराखंड से शुरू होकर बिहार-बंगाल सीमा तक जाती है। इसकी शुरुआत टनकपुर, बनबसा (चंपावत, उत्तराखंड) के पास भारत-नेपाल सीमा से और समाप्ति गलगलिया (किशनगंज, बिहार), बिहार-पश्चिम बंगाल सीमा के पास होती है। उत्तराखंड में पड़ने वाले जिले (लगभग 173 किमी) उधम सिंह नगर चंपावत, मुख्य इलाके बनबसा, टनकपुर, खटीमा, झनकइया को भी यह सड़क जोड़ेगी। इसके साथ ही यूपी के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज रास्ते में पड़ने वाले प्रमुख कस्बे, क्षेत्र पूरनपुर, पलिया, मिहींपुरवा, रुपैडीहा जमुनहा, तुलसीपुर, उतरौला का भी इससे जुड़ाव हो जाएगा। इसके साथ ही जिले से शोहरतगढ़-खुनुवा बॉर्डर क्षेत्र नौतनवा, सोनौली खुनुवा इलाका इसी यूपी वाले सेक्शन में आता है।
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टेक्निकल दिक्कतों को दूर करते हुए इंडो-नेपाल सीमा सड़क को जोड़ने वाले इस पुल के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। इसे कार्यदायी संस्था सेतु निगम द्वारा पूर्ण कराया जाएगा। इसके निर्माण से सीमावर्ती जनपदों की कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी।
- साजिद फराज, अधिशासी अभियंता इंडो नेपाल सीमा सड़क
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इंडो-नेपाल सीमा सड़क पुल निर्माण से सीमावर्ती जनपदों से कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। इससे जिले के लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा होगी। साथ ही स्थानीय व्यापारियों का व्यवसायिक गतिविधियों का विस्तार और रोजगार सृजन भी होगा।
- शिवशरणप्पा जीएन, जिलाधिकारी
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14 करोड़ रुपये की मिली वित्तीय स्वीकृति, निर्माण से सुगम होगी पीलीभीत और लखीमपुर खीरी की राह
सशस्त्र सीमा बल के जवान और सीमावर्ती थानों की पुलिस को भी सुरक्षा में मिलेगी सहूलियत
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल की कनेक्टिविटी आने वाले दिनों में बेहतर होगी। सीमा से सटे क्षेत्र में बहने वाली बानगंगा नदी पर चार साल से अधूरा पड़े बगुलहवा-झरुआ पुल के निर्माण की प्रक्रिया फिर से शुरू कर दी गई है। लटकी परियोजना को बजट का बूस्टर डोज मिला है और इसका काम भी शुरू हो गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में बाॅर्डर की राह सुगम होने के साथ लखीमपुर खीरी और उत्तराखंड सीधे कनेक्ट हो जाएगा। इसके साथ ही बिहार की राह आसान हो जाएगी। इसके अस्तित्व में आने से न सिर्फ आवागमन सुगम होगा बल्कि आने वाले दिनों में व्यापार, कारोबार के बेहतर होने की उम्मीद है।
जनपद की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। बार्डर पूरी तरह से खुला है और कुछ मुख्य मार्ग के अलावा पगडंडी आने-जाने में प्रयोग करते हैं। इसमें नेपाल से कई नदियां निकलीं हैं, जिसमें बानगंगा नदी प्रमुख है। झरुआ में डैम बना हुआ है, जहां से सिंचाई के लिए नहरें निकाली गई हैं। इसके साथ भारत-नेपाल सीमा के समानांतर इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड परियोजना तहत सड़क बनी, जिससे का उद्देश्य नेपाल से लगने वाली देश की सीमा पर बेहतर कनेक्टिविटी थी।
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नेपाल से आने वाली बानगंगा नदी पर बगुलहवा-झरुआ पुल के निर्माण के लिए कार्ययोजना वर्ष 2010 में तैयार होकर स्वीकृति हुई। केंद्र सरकार ने फरवरी 2018 में दिसंबर 2022 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन, बीच में आने वाली बाधाओं के कारण बानगंगा नदी पर पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश ब्रिज कारपोरेशन लिमिटेड गोरखपुर ने शुरू किया, लेकिन बीच में पश्चिमी छोर पर इसे अधूरा छोड़ दिया गया। विभागीय से जुड़े लोगों की मानें तो कार्य देर से शुरू होने के कारण लागत बढ़ गई है। इसलिए जो बजट था, उतने में निर्माण पूरा नहीं हो सका और अधर में लटक गया। इसके बाद पुल निर्माण की प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया था। इसके साथ ही कुछ तकनीकी दिक्कत होने की बात भी इसमें मुख्य वजह सामने आई थी।
तत्कालीन जिलाधिकारी ने मामले में स्थानीय निरीक्षण करके देखा और तकनीकी समस्या और अन्य पहलुओं की जांच के लिए आईआईटी रुढ़की टीम ने सर्वे किया और उसकी रिपोर्ट के बाद एस्टीमेट पर बजट स्वीकृत होने के साथ ही काम शुरू हो गया है। 13 करोड़ रुपये से अधिक लागत निर्माण किया जाएगा। उम्मीद है कि एक साल के भीतर इसका निर्माण पूरा हो जाएगा और इंडो-नेपाल बाॅर्डर की सड़क से जोड़ दिया जाएगा, जिसके के बाद आवागमन सुगम हो सकेगा।
चार किलोमीटर अतिरिक्त लगाना पड़ता है चक्कर
खुनुवां। पुल निर्माण से बाॅर्डर इलाके का बड़ा क्षेत्र के कनेक्ट हो जाएगा। पुल निर्माण शुरू होने से लोगों को उम्मीद जग गई थी कि आवागमन सुगम हो जाएगा, लेकिन निर्माण के रुकने के कारण निराश हो गए थे। पुल बन जाने से चार से सात किलोमीटर दूरी क्षेत्र के लोगों की कम हो जाती है। जबकि, मौजूदा समय में उतनी अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। आम राहगीरों और सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को चार से 12 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। ग्रामीणों की चिंता और उम्मीद बानगंगा नदी के पूर्वी उत्तरी छोर के गांव बगुलहवा, मसिना, अठकोनियां, भदवा, परसौना, खुनुवां, डोहरिया खुर्द, डोहरिया बुजुर्ग, सेमरा और पश्चिमी उत्तरी छोर के झरुआ और जोगडिहवा के ग्रामीण लंबे समय से अधूरे पुल के निर्माण की मांग कर रहे थे। मौजूदा समय में पुल को खड़ा करने के लिए पिलर का बेस और मिट्टी का काम शुरू हो गया है, जिससे बरसात शुरू होने से पहले पिलर तैयार किया जा सके। इसके बाद पुल बनाने में दिक्कत नहीं होगी। इसके बाद दोनों तरफ से सड़क को जोड़ना रहेगा। प्रधान संघ जिलाध्यक्ष पवन कुमार मिश्रा, सचमुच त्रिपाठी, उद्योग व्यापार संगठन अध्यक्ष रविन्द्र कुमार गुप्ता, प्रधान सद्दाम हुसैन, समेत क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पुल के अस्तित्व में आने से लोगों को बहुत आसानी होगी। इसके साथ ही बिहार से लेकर उत्तराखंड का आवागमन आसान हो जाएगा।
सामरिक और विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण
क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यह पुल सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके पूर्ण होने से सीमा पार से होने वाली तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण, सुरक्षा बलों की त्वरित आवाजाही तथा सीमावर्ती गांवों में बेहतर यातायात सुविधा सुनिश्चित होगी। साथ ही क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। चार वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अब पुल व एप्रोच निर्माण की शुरुआत ने लोगों की राह आसान होने की उम्मीद को मजबूत कर दिया है।
बिहार और उत्तराखंड से होगा जुड़ाव
इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड परियोजना की सड़क सीमा के बिहार, उत्तराखंड तक को जोड़ेगा। जानकारों के अनुसार सड़क का मुख्य रूट (पश्चिम से पूर्व) यह सड़क पश्चिम में उत्तराखंड से शुरू होकर बिहार-बंगाल सीमा तक जाती है। इसकी शुरुआत टनकपुर, बनबसा (चंपावत, उत्तराखंड) के पास भारत-नेपाल सीमा से और समाप्ति गलगलिया (किशनगंज, बिहार), बिहार-पश्चिम बंगाल सीमा के पास होती है। उत्तराखंड में पड़ने वाले जिले (लगभग 173 किमी) उधम सिंह नगर चंपावत, मुख्य इलाके बनबसा, टनकपुर, खटीमा, झनकइया को भी यह सड़क जोड़ेगी। इसके साथ ही यूपी के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज रास्ते में पड़ने वाले प्रमुख कस्बे, क्षेत्र पूरनपुर, पलिया, मिहींपुरवा, रुपैडीहा जमुनहा, तुलसीपुर, उतरौला का भी इससे जुड़ाव हो जाएगा। इसके साथ ही जिले से शोहरतगढ़-खुनुवा बॉर्डर क्षेत्र नौतनवा, सोनौली खुनुवा इलाका इसी यूपी वाले सेक्शन में आता है।
टेक्निकल दिक्कतों को दूर करते हुए इंडो-नेपाल सीमा सड़क को जोड़ने वाले इस पुल के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। इसे कार्यदायी संस्था सेतु निगम द्वारा पूर्ण कराया जाएगा। इसके निर्माण से सीमावर्ती जनपदों की कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी।
- साजिद फराज, अधिशासी अभियंता इंडो नेपाल सीमा सड़क
इंडो-नेपाल सीमा सड़क पुल निर्माण से सीमावर्ती जनपदों से कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। इससे जिले के लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा होगी। साथ ही स्थानीय व्यापारियों का व्यवसायिक गतिविधियों का विस्तार और रोजगार सृजन भी होगा।
- शिवशरणप्पा जीएन, जिलाधिकारी
