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Siddharthnagar News: वीरान ढांचे बन रहे मौत की वजह... जर्जर टंकी हादसा चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 04 May 2026 02:09 AM IST
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सिद्धार्थनगर। अगर आपके पास पड़ोस, मोहल्ले अथवा गांव में कोई खंडहर और जर्जर मकान है तो आपको सतर्क रहने और उससे दूरी बनाए रखने की जरूरत है। बच्चों व किशोरों पर ध्यान दें और प्रयास करें कि वह वहां टहलने अथवा खेलने न जाएं। साथ ही अगर उस तरफ कोई जा रहा है तो नैतिक धर्म मानते हुए उसे रोकें, क्योंकि यह भवन या इमारतें या ढांचे सिर्फ जर्जर नहीं बल्कि जानलेवा भी हैं।
शहर के कांशीराम आवास के पास स्थित जर्जर पानी टंकी के हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने जिले में बड़ी संख्या में सरकारी और निजी जर्जर भवनों के प्रति सतर्कता बरतने के लिए आगाह कर दिया है। बारिश के मौसम में शहर में बनी जर्जर पानी टंकियां हादसे के खतरे को बढ़ा रही हैं। वहीं, जर्जर मकान, ढांचे भी खतरे के मामले में कम नहीं हैं। शहर के पानी टंकी हादसे में जहां जिला प्रशासन व पुलिस विभाग समेत अन्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हलकान रहे। वहीं, घटनास्थल पर देर रात तक जुटे रहे शहर के लोग भी सहमे नजर आए। टंकी पर फंसे दो लोगों के रेस्क्यू के बाद सुरक्षित उतरने तक उनकी सांस अटकी रही।
सिद्धार्थनगर जिले के सृजन के साथ ही शहर में कई सरकारी भवनों का निर्माण हुआ था। इनमें ऑफिसर्स कॉलोनी में निर्मित हो रहे कुछ भवन अधूरे रह गए थे, जो वर्तमान में जर्जर हो चुके हैं। वहीं, जिला सृजन के पूर्व निर्मित कई सरकारी भवन भी वर्तमान में बदहाल हैं। नौगढ़ पीएचसी के आवासीय भवन, जिला सहकारी संघ कार्यालय समेत अन्य भवन शामिल हैं। इनमें लोग जान जोखिम में डालकर रहते भी हैं। शहर के पीएचसी नौगढ़ परिसर में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बने कई आवासीय भवन भी वर्तमान में जर्जर हो चुके हैं। पीएचसी के मुख्य भवन के पीछे स्थित आवासों के जर्जर होने के बावजूद स्वास्थ्य कर्मी इनमें रहने को मजबूर हैं।
कई वर्ष पूर्व बने इन आवासीय भवनों का मरम्मत नहीं हुई। छत और दीवार जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। बारिश के समय छत से पानी टपकता है, जिससे हमेशा भवन के ढहने का डर बना रहता है। 50 वर्ष पूर्व बने पूरब पड़ाव में स्थित जिला सहकारी संघ का कार्यालय भवन बेहद जर्जर हो चुका है, फिर भी कार्यालय कर्मी इस भवन में कार्य करने को मजबूर हैं। पीएचसी नौगढ़ के आवासीय भवनों को कंडम घोषित कर उन्हें डिमॉलिश करने का प्रस्ताव कई बार शासन को भेजा गया था। अब तक इन भवनों का ध्वस्तीकरण नहीं होने से हादसे का खतरा मंडराता दिख रहा है।
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जर्जर भवनाें से हो चुके हैं कई हादसे
जिले में इससे पहले भी जर्जर भवनों के चलते हादसे हो चुके हैं। आठ वर्ष पूर्व बाढ़ के दौरान भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में विवाह घर में आसरा लिए लोगों पर पिलर गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। मामले में तत्कालीन जेई और ग्राम सचिव समेत चार लोगों पर कार्रवाई हुई थी। वहीं, खेसरहा थाना क्षेत्र के सुपौली बजरंग चौराहे पर स्थित अर्ध निर्मित मकान के जर्जर छज्जे में दबकर दो बच्चों की जान चली गई थी। वहीं, एक गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसी तरह शोहरतगढ़ क्षेत्र में भी जर्जर मकान गिरने लोगों की जान जा चुकी है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी है जर्जर भवन
जिले के भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र में सरकारी और निजी जर्जर भवन के कारण बड़ा हादसा हो सकता है। ब्लाॅक क्षेत्र के सिकटा में वर्ष 1977 में बना राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की स्थिति बेहद दयनीय है। अस्पताल का जर्जर भवन इलाज करने वाले चिकित्सक व मरीजों के लिए मुसीबत बन सकता है। इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरोथर कठोतिया का है। वर्ष 2007-08 में बने इस भवन के नीचे पढ़ने वाले बच्चों के साथ ही शिक्षकों की जान सांसत में रहती है। बारिश के दिनों में टपकती छत व उखड़ते प्लास्टर से सभी सहमे रहते है।
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अनुपयोगी हो चुकी है पानी की टंकी
वर्तमान में कांशीराम आवास के पास स्थित पानी की टंकी का निर्माण 30 वर्ष पहले हुआ था। जिला सृजन के साथ ही ऑफिसर्स कॉलोनी समेत अन्य स्थानों पर पानी सप्लाई के लिए बनी टंकी अब अनुपयोगी हो चुकी है। इसके पास कांशीराम आवास के निर्माण के बाद यहां नई पानी की टंकी बन गई, जिस कारण पांच वर्ष से अधिक समय से इस टंकी से पानी सप्लाई बंद की जा चुकी है। आसपास बने कई अधूरे सरकारी भवन भी जर्जर हालत में गिरने के कगार पर पहुंच चुके हैं, जहां लोगों के आने जाने के दौरान हादसे का खतरा रहता है।
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जर्जर भवनों से सतर्कता की है जरूरत
निर्माण से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर आपके आसपास सरकारी या फिर निजी व्यक्ति का जर्जर भवन है तो संबंधित से बात करें। साथ ही दुर्घटना से जुड़ा बोर्ड लगावाएं, जिससे कोई बच्चा या फिर अन्य व्यक्ति दुर्घटना का शिकार होने से बच सके। शहर के कांशीराम आवास निवासी आशीष, रवि और दिनेश का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को इन जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण करवाने के लिए कार्रवाई की जरूरत है, जिससे दोबारा इस तरह के हादसे से बचा जा सके।
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जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को जल्द ही निर्देशित किया जाएगा।
गौरव श्रीवास्तव, एडीएम
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शहर के कांशीराम आवास के पास स्थित जर्जर पानी टंकी के हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने जिले में बड़ी संख्या में सरकारी और निजी जर्जर भवनों के प्रति सतर्कता बरतने के लिए आगाह कर दिया है। बारिश के मौसम में शहर में बनी जर्जर पानी टंकियां हादसे के खतरे को बढ़ा रही हैं। वहीं, जर्जर मकान, ढांचे भी खतरे के मामले में कम नहीं हैं। शहर के पानी टंकी हादसे में जहां जिला प्रशासन व पुलिस विभाग समेत अन्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी हलकान रहे। वहीं, घटनास्थल पर देर रात तक जुटे रहे शहर के लोग भी सहमे नजर आए। टंकी पर फंसे दो लोगों के रेस्क्यू के बाद सुरक्षित उतरने तक उनकी सांस अटकी रही।
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सिद्धार्थनगर जिले के सृजन के साथ ही शहर में कई सरकारी भवनों का निर्माण हुआ था। इनमें ऑफिसर्स कॉलोनी में निर्मित हो रहे कुछ भवन अधूरे रह गए थे, जो वर्तमान में जर्जर हो चुके हैं। वहीं, जिला सृजन के पूर्व निर्मित कई सरकारी भवन भी वर्तमान में बदहाल हैं। नौगढ़ पीएचसी के आवासीय भवन, जिला सहकारी संघ कार्यालय समेत अन्य भवन शामिल हैं। इनमें लोग जान जोखिम में डालकर रहते भी हैं। शहर के पीएचसी नौगढ़ परिसर में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बने कई आवासीय भवन भी वर्तमान में जर्जर हो चुके हैं। पीएचसी के मुख्य भवन के पीछे स्थित आवासों के जर्जर होने के बावजूद स्वास्थ्य कर्मी इनमें रहने को मजबूर हैं।
कई वर्ष पूर्व बने इन आवासीय भवनों का मरम्मत नहीं हुई। छत और दीवार जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। बारिश के समय छत से पानी टपकता है, जिससे हमेशा भवन के ढहने का डर बना रहता है। 50 वर्ष पूर्व बने पूरब पड़ाव में स्थित जिला सहकारी संघ का कार्यालय भवन बेहद जर्जर हो चुका है, फिर भी कार्यालय कर्मी इस भवन में कार्य करने को मजबूर हैं। पीएचसी नौगढ़ के आवासीय भवनों को कंडम घोषित कर उन्हें डिमॉलिश करने का प्रस्ताव कई बार शासन को भेजा गया था। अब तक इन भवनों का ध्वस्तीकरण नहीं होने से हादसे का खतरा मंडराता दिख रहा है।
जर्जर भवनाें से हो चुके हैं कई हादसे
जिले में इससे पहले भी जर्जर भवनों के चलते हादसे हो चुके हैं। आठ वर्ष पूर्व बाढ़ के दौरान भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र में विवाह घर में आसरा लिए लोगों पर पिलर गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। मामले में तत्कालीन जेई और ग्राम सचिव समेत चार लोगों पर कार्रवाई हुई थी। वहीं, खेसरहा थाना क्षेत्र के सुपौली बजरंग चौराहे पर स्थित अर्ध निर्मित मकान के जर्जर छज्जे में दबकर दो बच्चों की जान चली गई थी। वहीं, एक गंभीर रूप से घायल हो गया था। इसी तरह शोहरतगढ़ क्षेत्र में भी जर्जर मकान गिरने लोगों की जान जा चुकी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी है जर्जर भवन
जिले के भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र में सरकारी और निजी जर्जर भवन के कारण बड़ा हादसा हो सकता है। ब्लाॅक क्षेत्र के सिकटा में वर्ष 1977 में बना राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय की स्थिति बेहद दयनीय है। अस्पताल का जर्जर भवन इलाज करने वाले चिकित्सक व मरीजों के लिए मुसीबत बन सकता है। इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरोथर कठोतिया का है। वर्ष 2007-08 में बने इस भवन के नीचे पढ़ने वाले बच्चों के साथ ही शिक्षकों की जान सांसत में रहती है। बारिश के दिनों में टपकती छत व उखड़ते प्लास्टर से सभी सहमे रहते है।
अनुपयोगी हो चुकी है पानी की टंकी
वर्तमान में कांशीराम आवास के पास स्थित पानी की टंकी का निर्माण 30 वर्ष पहले हुआ था। जिला सृजन के साथ ही ऑफिसर्स कॉलोनी समेत अन्य स्थानों पर पानी सप्लाई के लिए बनी टंकी अब अनुपयोगी हो चुकी है। इसके पास कांशीराम आवास के निर्माण के बाद यहां नई पानी की टंकी बन गई, जिस कारण पांच वर्ष से अधिक समय से इस टंकी से पानी सप्लाई बंद की जा चुकी है। आसपास बने कई अधूरे सरकारी भवन भी जर्जर हालत में गिरने के कगार पर पहुंच चुके हैं, जहां लोगों के आने जाने के दौरान हादसे का खतरा रहता है।
जर्जर भवनों से सतर्कता की है जरूरत
निर्माण से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर आपके आसपास सरकारी या फिर निजी व्यक्ति का जर्जर भवन है तो संबंधित से बात करें। साथ ही दुर्घटना से जुड़ा बोर्ड लगावाएं, जिससे कोई बच्चा या फिर अन्य व्यक्ति दुर्घटना का शिकार होने से बच सके। शहर के कांशीराम आवास निवासी आशीष, रवि और दिनेश का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को इन जर्जर भवनों का ध्वस्तीकरण करवाने के लिए कार्रवाई की जरूरत है, जिससे दोबारा इस तरह के हादसे से बचा जा सके।
जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को जल्द ही निर्देशित किया जाएगा।
गौरव श्रीवास्तव, एडीएम
