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Siddharthnagar News: खाद्य तेल में लगी आग... तीन महीने में तेज उछाल, घर का बजट गड़बड़ाया
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सरसो का तेल।
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सिद्धार्थनगर। रसोई का सबसे जरूरी सामान खाद्य तेल पिछले तीन महीनों में लगातार महंगा हुआ है। कीमतों में इस तेज उछाल ने आम उपभोक्ता की थाली पर सीधा असर डाला है। पाम ऑयल से लेकर सूरजमुखी, सोयाबीन और सरसों तेल तक लगभग हर श्रेणी में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य पूर्व में तनाव, महंगा आयात और सप्लाई चेन की बाधाएं इस उछाल के बड़े कारण माने जा रहे हैं।
स्थानीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों में तीन से पांच रुपये प्रति किलो/लीटर की बढ़ोतरी के साथ कई तेलों में 10 से 20 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है। पाम ऑयल में लगभग 15 20 प्रतिशत और सूरजमुखी तेल में 17-19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि सोयाबीन तेल में 6-8 प्रतिशत और सरसों तेल में 5-7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी आंकी जा रही है।
नौगढ़ के किराना व्यवसायी द्वारिका प्रसाद के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर भी दामों में साफ उछाल दिख रहा है। उनके अनुसार, पाम ऑयल 95 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो करीब 7-8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। सूरजमुखी तेल 170 से 180 रुपये लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सोयाबीन तेल 140 से 150 रुपये प्रति किलो हो गया है, यानी करीब 7 प्रतिशत का उछाल है। वहीं, सरसों तेल 165 से बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जो लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है। यह बदलाव बताता है कि थोक से लेकर खुदरा तक हर स्तर पर कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।
व्यापारियों के अनुसार, भारत की खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का असर सीधे घरेलू कीमतों पर पड़ता है। हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने लागत को और बढ़ा दिया है।
आम उपभोक्ताओं पर इसका असर साफ दिख रहा है। नौगढ़ निवासी सुनीता पांडेय कहती हैं कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच अब खाद्य तेल की कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। कई परिवारों ने तेल के इस्तेमाल में कटौती शुरू कर दी है। तली-भुनी चीजों से दूरी बनाई जा रही है, जबकि होटल और ढाबों पर भी लागत बढ़ने से दबाव बढ़ा है।
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स्थानीय बाजार में बदलाव (3 महीने में बढ़ोतरी)
पाम ऑयल: 95 से 102 रुपये (7-8 प्रतिशत)
सूरजमुखी तेल: 170-180 रुपये ( 6 प्रतिशत)
सोयाबीन तेल: 140-150 रुपये (7 प्रतिशत)
सरसों तेल: 165-170 रुपये (3 प्रतिशत)
(स्रोत: नौगढ़ के किराना व्यवसायी द्वारिका प्रसाद)
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स्पीक अप
तेल के दाम जिस तेजी से बढ़े हैं, उससे घर का बजट बिगड़ गया है। अब इस्तेमाल कम करना पड़ रहा है। पहले जितना तेल महीने में लगता था, अब उससे कम में काम चलाना पड़ रहा है। महंगाई का सीधा असर रसोई पर दिख रहा है।
- सिम्मी, गृहिणी
थोक में ही 10-20 प्रतिशत तक दाम बढ़े हैं, इसलिए खुदरा में बढ़ाना मजबूरी है। हर हफ्ते रेट बदल रहे हैं। पहले जो स्टॉक एक दाम पर मिलता था, अब लगातार महंगा मिल रहा है। बाजार की स्थिति बहुत अस्थिर हो गई है।
- द्वारिका प्रसाद, किराना व्यापारी
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नौगढ़ के किराना व्यवसायी द्वारिका प्रसाद के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर भी दामों में साफ उछाल दिख रहा है। उनके अनुसार, पाम ऑयल 95 रुपये से बढ़कर 102 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो करीब 7-8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। सूरजमुखी तेल 170 से 180 रुपये लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सोयाबीन तेल 140 से 150 रुपये प्रति किलो हो गया है, यानी करीब 7 प्रतिशत का उछाल है। वहीं, सरसों तेल 165 से बढ़कर 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जो लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है। यह बदलाव बताता है कि थोक से लेकर खुदरा तक हर स्तर पर कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।
व्यापारियों के अनुसार, भारत की खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का असर सीधे घरेलू कीमतों पर पड़ता है। हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने लागत को और बढ़ा दिया है।
आम उपभोक्ताओं पर इसका असर साफ दिख रहा है। नौगढ़ निवासी सुनीता पांडेय कहती हैं कि पहले से बढ़ती महंगाई के बीच अब खाद्य तेल की कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। कई परिवारों ने तेल के इस्तेमाल में कटौती शुरू कर दी है। तली-भुनी चीजों से दूरी बनाई जा रही है, जबकि होटल और ढाबों पर भी लागत बढ़ने से दबाव बढ़ा है।
स्थानीय बाजार में बदलाव (3 महीने में बढ़ोतरी)
पाम ऑयल: 95 से 102 रुपये (7-8 प्रतिशत)
सूरजमुखी तेल: 170-180 रुपये ( 6 प्रतिशत)
सोयाबीन तेल: 140-150 रुपये (7 प्रतिशत)
सरसों तेल: 165-170 रुपये (3 प्रतिशत)
(स्रोत: नौगढ़ के किराना व्यवसायी द्वारिका प्रसाद)
स्पीक अप
तेल के दाम जिस तेजी से बढ़े हैं, उससे घर का बजट बिगड़ गया है। अब इस्तेमाल कम करना पड़ रहा है। पहले जितना तेल महीने में लगता था, अब उससे कम में काम चलाना पड़ रहा है। महंगाई का सीधा असर रसोई पर दिख रहा है।
- सिम्मी, गृहिणी
थोक में ही 10-20 प्रतिशत तक दाम बढ़े हैं, इसलिए खुदरा में बढ़ाना मजबूरी है। हर हफ्ते रेट बदल रहे हैं। पहले जो स्टॉक एक दाम पर मिलता था, अब लगातार महंगा मिल रहा है। बाजार की स्थिति बहुत अस्थिर हो गई है।
- द्वारिका प्रसाद, किराना व्यापारी
