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Siddharthnagar News: राम-केवट संवाद में झलकी भक्ति, भरत मिलाप ने किया भावुक
Wed, 04 Nov 2026 12:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 04 Nov 2026 12:10 AM IST
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बढ़नी चाफा में रामलीला के दौरान राम-केवट संवाद और भरत मिलाप के प्रसंग का अभिनय करते कलाकार। संव
- फोटो : सांकेतिक
बढ़नी चाफा में रामलीला के प्रसंगों ने दर्शकों का मोहा मन
डुमरियागंज। नगर पंचायत बढ़नी चाफा में आदर्श श्रीरामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में सोमवार की रात राम-केवट संवाद और भरत मिलाप की लीला ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों से रामकथा के इन प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गंगा तट पर पहुंचते हैं, जहां उनकी मुलाकात केवट से होती है। केवट भगवान श्रीराम से कहता है कि प्रभु, जब तक आपके चरण नहीं पखार लूंगा, तब तक आपको अपनी नाव पर नहीं बैठाऊंगा, क्योंकि आपके चरणों की धूल से पत्थर भी नारी बन गया तो कहीं मेरी नाव का भी यही हाल न हो जाए। केवट की बात सुनकर भगवान श्रीराम मुस्कुराते हैं और उसे चरण पखारने की अनुमति दे देते हैं। इसके बाद केवट भक्तिभाव से प्रभु के चरण पखारता है और उन्हें माता सीता व लक्ष्मण सहित नाव पर बैठाकर गंगा पार उतार देता है।
इसके बाद भरत मिलाप का प्रसंग शुरू होता है। उधर, अयोध्या में भगवान श्रीराम के वनवास से व्याकुल भरत उन्हें वापस लाने के लिए गुरुजनों और अयोध्यावासियों के साथ वन की ओर पहुंचते हैं। भगवान श्रीराम को देखते ही भरत उनके चरणों में गिर पड़ते हैं और दोनों भाइयों का मिलन होते ही माहौल भावुक हो उठता है। भरत के आग्रह के बावजूद पिता के वचन का पालन करते हुए श्रीराम वनवास पूरा करने की बात कहते हैं, जिसके बाद भरत उनकी खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटने का संकल्प लेते हैं।
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इस मौके पर राजकुमार गुप्ता, मनीष श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, तिलकराम कसौधन, ध्रुवराज वर्मा, कपिल देव गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। नगर पंचायत बढ़नी चाफा में आदर्श श्रीरामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला में सोमवार की रात राम-केवट संवाद और भरत मिलाप की लीला ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों से रामकथा के इन प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गंगा तट पर पहुंचते हैं, जहां उनकी मुलाकात केवट से होती है। केवट भगवान श्रीराम से कहता है कि प्रभु, जब तक आपके चरण नहीं पखार लूंगा, तब तक आपको अपनी नाव पर नहीं बैठाऊंगा, क्योंकि आपके चरणों की धूल से पत्थर भी नारी बन गया तो कहीं मेरी नाव का भी यही हाल न हो जाए। केवट की बात सुनकर भगवान श्रीराम मुस्कुराते हैं और उसे चरण पखारने की अनुमति दे देते हैं। इसके बाद केवट भक्तिभाव से प्रभु के चरण पखारता है और उन्हें माता सीता व लक्ष्मण सहित नाव पर बैठाकर गंगा पार उतार देता है।
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इसके बाद भरत मिलाप का प्रसंग शुरू होता है। उधर, अयोध्या में भगवान श्रीराम के वनवास से व्याकुल भरत उन्हें वापस लाने के लिए गुरुजनों और अयोध्यावासियों के साथ वन की ओर पहुंचते हैं। भगवान श्रीराम को देखते ही भरत उनके चरणों में गिर पड़ते हैं और दोनों भाइयों का मिलन होते ही माहौल भावुक हो उठता है। भरत के आग्रह के बावजूद पिता के वचन का पालन करते हुए श्रीराम वनवास पूरा करने की बात कहते हैं, जिसके बाद भरत उनकी खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटने का संकल्प लेते हैं।
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इस मौके पर राजकुमार गुप्ता, मनीष श्रीवास्तव, संजय गुप्ता, तिलकराम कसौधन, ध्रुवराज वर्मा, कपिल देव गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे।