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Siddharthnagar News: महोत्सव आशा, समरसता और विकास का उत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 29 Jan 2026 12:52 AM IST
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सिद्धार्थनगर महोत्सव का फीता काटकार शुभारंभ करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। स्रोत विज्ञप्ति
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सिद्धार्थनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिद्धार्थनगर महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर कहा कि सिद्धार्थनगर महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं बल्कि आशा, समरसता और विकास का उत्सव है। यह जीवन को हताशा से नहीं, उत्साह से जोड़ने का माध्यम है।
आइए, हम सब मिलकर इस पावन भूमि की विरासत को संजोते हुए, समावेशी और सतत विकास के इस संकल्प को आगे बढ़ाएं। यही इस महोत्सव की आत्मा है, यही इसका संदेश है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्तम कृति है। उसकी चेतना में मानवीय गरिमा, सुरक्षा और संप्रभुता का भाव निहित है। यही भाव हमें अच्छे कर्म, सकारात्मक सोच और कल्याणकारी पहल के लिए प्रेरित करता है। महात्मा बुद्ध का यही दर्शन आज भी प्रासंगिक है और यही सिद्धार्थनगर की पहचान है।
कहा कि काला नमक चावल जैसे विशिष्ट उत्पादों की ब्रांडिंग ‘वन जिला, वन उत्पाद’ की भावना को साकार करती है। साथ ही, शिक्षकों और विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां यह प्रमाणित करती हैं कि संस्कारयुक्त शिक्षा ही विकसित भारत की नींव है। यही प्रतिभाएं भविष्य के भारत का स्वरूप गढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा में कच्चा कार्य कर सकते थे, सिर्फ 100 दिन का रोजगार गारंटी था, अब विकसित भारत जीरामजी के तहत 125 दिन की रोजगार की गारंटी, रोजगार नहीं देने पर मुआवजा देना होगा। कहा कि पुराने तालाबों का पुनरुद्धार करते हुए जलसंरक्षण की जरूरत है। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि यह पिछड़ा जिला है, जहां बेराेजगारी बढ़ रही है और शिक्षण संस्थाओं में सुविधाओं की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिले में बड़ा उद्योग लगाने से लोगों को रोजगार मिलेगा। सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि प्रदेश का विकास हो रहा है, धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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आइए, हम सब मिलकर इस पावन भूमि की विरासत को संजोते हुए, समावेशी और सतत विकास के इस संकल्प को आगे बढ़ाएं। यही इस महोत्सव की आत्मा है, यही इसका संदेश है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि कहा कि मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्तम कृति है। उसकी चेतना में मानवीय गरिमा, सुरक्षा और संप्रभुता का भाव निहित है। यही भाव हमें अच्छे कर्म, सकारात्मक सोच और कल्याणकारी पहल के लिए प्रेरित करता है। महात्मा बुद्ध का यही दर्शन आज भी प्रासंगिक है और यही सिद्धार्थनगर की पहचान है।
कहा कि काला नमक चावल जैसे विशिष्ट उत्पादों की ब्रांडिंग ‘वन जिला, वन उत्पाद’ की भावना को साकार करती है। साथ ही, शिक्षकों और विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां यह प्रमाणित करती हैं कि संस्कारयुक्त शिक्षा ही विकसित भारत की नींव है। यही प्रतिभाएं भविष्य के भारत का स्वरूप गढ़ेंगी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा में कच्चा कार्य कर सकते थे, सिर्फ 100 दिन का रोजगार गारंटी था, अब विकसित भारत जीरामजी के तहत 125 दिन की रोजगार की गारंटी, रोजगार नहीं देने पर मुआवजा देना होगा। कहा कि पुराने तालाबों का पुनरुद्धार करते हुए जलसंरक्षण की जरूरत है। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि यह पिछड़ा जिला है, जहां बेराेजगारी बढ़ रही है और शिक्षण संस्थाओं में सुविधाओं की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिले में बड़ा उद्योग लगाने से लोगों को रोजगार मिलेगा। सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि प्रदेश का विकास हो रहा है, धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
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