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सख्ती : सात फर्मों की हुई जांच लिए गए पानी के नमूने
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देवरिया। जिले में शुद्ध पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने पानी की पैकिंग करने वाली फर्मों पर सख्ती बढ़ा दी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने सोमवार को जिले के विभिन्न इलाकों में संचालित पाउच वाले पानी की जांच की।
इस दौरान अलग-अलग स्थानों से कुल सात नमूने संग्रहीत किए गए, जिन्हें जांच के लिए लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है।
इंदौर में दूषित पानी की वजह से हुई घटना के बाद से प्रदेश में पानी की शुद्धता को लेकर सख्ती बरती जा रही है। प्रशासन पाइपलाइन से होने वाली सप्लाई को लेकर जांच कराने के साथ ही क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत भी करा रहा है। इसके अलावा नालों के अंदर से गुजरी पाइपलाइनों को बाहर निकाला जा रहा है। इसके साथ ही पाउच वाले पानी की निगरानी भी शुरू हो गई है।
अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में पाउच वाले पानी की बढ़ती खपत के साथ-साथ गुणवत्ता को लेकर शिकायतें भी सामने आ रही थीं। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
इसे देखते हुए जिले में विशेष अभियान चलाकर जांच की गई। टीम ने पैकिंग यूनिटों में उपयोग होने वाले पानी के स्रोत, फिल्ट्रेशन प्रक्रिया, पाउचों की सफाई, पैकिंग तिथि, बैच नंबर और लाइसेंस की वैधता की भी पड़ताल की।
कई स्थानों पर फर्म संचालकों को साफ-सफाई बनाए रखने और मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान कुछ यूनिटों में रिकॉर्ड अपडेट न होने और लेबलिंग में खामियां भी पाई गईं, जिस पर संबंधित संचालकों को चेतावनी दी गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि लिए गए नमूनों की जांच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों के अनुसार की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद यदि पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई तो संबंधित फर्मों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।
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इस दौरान अलग-अलग स्थानों से कुल सात नमूने संग्रहीत किए गए, जिन्हें जांच के लिए लखनऊ स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है।
इंदौर में दूषित पानी की वजह से हुई घटना के बाद से प्रदेश में पानी की शुद्धता को लेकर सख्ती बरती जा रही है। प्रशासन पाइपलाइन से होने वाली सप्लाई को लेकर जांच कराने के साथ ही क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत भी करा रहा है। इसके अलावा नालों के अंदर से गुजरी पाइपलाइनों को बाहर निकाला जा रहा है। इसके साथ ही पाउच वाले पानी की निगरानी भी शुरू हो गई है।
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अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में पाउच वाले पानी की बढ़ती खपत के साथ-साथ गुणवत्ता को लेकर शिकायतें भी सामने आ रही थीं। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
इसे देखते हुए जिले में विशेष अभियान चलाकर जांच की गई। टीम ने पैकिंग यूनिटों में उपयोग होने वाले पानी के स्रोत, फिल्ट्रेशन प्रक्रिया, पाउचों की सफाई, पैकिंग तिथि, बैच नंबर और लाइसेंस की वैधता की भी पड़ताल की।
कई स्थानों पर फर्म संचालकों को साफ-सफाई बनाए रखने और मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान कुछ यूनिटों में रिकॉर्ड अपडेट न होने और लेबलिंग में खामियां भी पाई गईं, जिस पर संबंधित संचालकों को चेतावनी दी गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि लिए गए नमूनों की जांच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों के अनुसार की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद यदि पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई तो संबंधित फर्मों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है।