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Siddharthnagar News: सुरक्षित निकाले गए तो आई सांस में सांस
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 04 May 2026 01:40 AM IST
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सिद्धार्थनगर। आंखाें के सामने टूटती सीढ़ी और चीखने की आवाज ने पवन (17) और कल्लू (17) को अंदर से झकझोर दिया था। हादसे के बाद नीचे लोगों की भीड़, मोहल्ले से उठने वाली आवाज और भारी पुलिस बल देखकर उन्हें हर पल हिला रही थीं।
नीचे उतारने के हर प्रयास असफल होता देख उनकी मायूसी भी बढ़ती जा रही थी। शाम ढलने के साथ अंदर ही अंदर डर बना था कि पता नहीं क्या होगा? नीचे जा पाएंगे या नहीं? हालांकि, प्रशासन के लोग लगातार आवाज लगाकर उनका हौसला बढ़ाते रहे कि हम आपके साथ हैं और कुछ नहीं होगा और जल्द ही नीचे ले आएंगे।
वहीं, रात ढलने और हर कोशिश के नाकाम होता देखकर परिवार के लोगों की उम्मीदें पल-पल टूटती रही। पवन के पिता मिथिलेश के समक्ष और बड़ा संकट था। भाई के बेटे को खो चुके थे और दूसरा टंकी के ऊपर अटक था। वह ईश्वर से प्रार्थना के अलावा कुछ बोल भी नहीं पा रहे था। वहीं, दूसरे परिवार के लोग भी परेशान रहे। अन्य लोग तो रात ढलने के साथ घर चले गए लेकिन, दोनों बच्चों के परिवार के लोग एक-एक मिनट गिन रहे थे और ईश्वर से उन्हें सुरक्षित बचाने की प्रार्थना कर रहे थे।
सुबह जब सेना के देवदूत जवानों ने हेलीकॉप्टर से सफल रेस्क्यू किया तो राहत की सांस ली। जब दोनों गोरखपुर से घर पहुंचे तो परिवार के लोग देखकर भावुक हो गए। वहीं, जब बच्चों से मिलने का प्रयास किया गया तो परिवार के लोग कुछ बोले नहीं और रिश्तेदारी में जाने की बात कहकर बात टाल दी।
नीचे उतारने के हर प्रयास असफल होता देख उनकी मायूसी भी बढ़ती जा रही थी। शाम ढलने के साथ अंदर ही अंदर डर बना था कि पता नहीं क्या होगा? नीचे जा पाएंगे या नहीं? हालांकि, प्रशासन के लोग लगातार आवाज लगाकर उनका हौसला बढ़ाते रहे कि हम आपके साथ हैं और कुछ नहीं होगा और जल्द ही नीचे ले आएंगे।
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वहीं, रात ढलने और हर कोशिश के नाकाम होता देखकर परिवार के लोगों की उम्मीदें पल-पल टूटती रही। पवन के पिता मिथिलेश के समक्ष और बड़ा संकट था। भाई के बेटे को खो चुके थे और दूसरा टंकी के ऊपर अटक था। वह ईश्वर से प्रार्थना के अलावा कुछ बोल भी नहीं पा रहे था। वहीं, दूसरे परिवार के लोग भी परेशान रहे। अन्य लोग तो रात ढलने के साथ घर चले गए लेकिन, दोनों बच्चों के परिवार के लोग एक-एक मिनट गिन रहे थे और ईश्वर से उन्हें सुरक्षित बचाने की प्रार्थना कर रहे थे।
सुबह जब सेना के देवदूत जवानों ने हेलीकॉप्टर से सफल रेस्क्यू किया तो राहत की सांस ली। जब दोनों गोरखपुर से घर पहुंचे तो परिवार के लोग देखकर भावुक हो गए। वहीं, जब बच्चों से मिलने का प्रयास किया गया तो परिवार के लोग कुछ बोले नहीं और रिश्तेदारी में जाने की बात कहकर बात टाल दी।
