वाराणसी जा रहा 43 लाख का गांजा बरामद: तीन तस्कर अरेस्ट, कार की डिकी में रखा था 86 किलो माल; बिहार से जुड़े तार
वाराणसी जा रही 86 किलो गांजे की खेप पुलिस ने बरामद कर तीन अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया। बरामद गांजे की कीमत करीब 43 लाख रुपये बताई गई है। तस्कर कार की डिकी में गांजा छिपाकर ओडिशा के फुलवारी से ला रहे थे। जांच में इनके तार बिहार के आरा से जुड़े मिले हैं। सरगना की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई हैं।
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मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन शुद्धि के तहत एसओजी-सर्विलांस और रॉबर्ट्सगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को गांजा तस्करी के अंतरराज्यीय गैंग का खुलासा किया। बगैर नंबर प्लेट वाली कार की डिकी में रखकर ओडिशा से वाराणसी ले जा रहे 43 लाख (86 किलो) गांजे की बरामदगी के साथ ही तीन तस्करों को गिरफ्तार कर लिया। तीनों बिहार के रहने वाले हैं। गिरोह का जुड़ाव भोजपुर के जिला मुख्यालय आरा से जुड़ा पाया गया है। सरगना व अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगाई गई हैं।
एएसपी ऑपरेशन ऋषभ रुणवाल ने शाम चार बजे पुलिस लाइन में गिरफ्तारी का खुलासा किया। बताया कि बृहस्पतिवार की देर शाम सीओ सिटी रणधीर मिश्रा, प्रभारी निरीक्षक रॉबर्ट्सगंज रामस्वरूप वर्मा, एसओजी/सर्विलांस प्रभारी निरीक्षक नागेश सिंह सहित अन्य की टीम ईको प्वाइंट के पास संदिग्ध वाहनों की जांच कर रही थी।
उसी दौरान जानकारी मिली कि तीन व्यक्ति काले रंग की बिना नंबर प्लेट वाली किआ कार से गांजा लेकर आ रहे हैं। इसको लेकर पुलिस ने जैसे ही घेराबंदी करनी शुरू की कार पहुंच गई। पुलिस टीम को देख तस्करों ने कार को मोड़कर भागने का प्रयास किया लेकिन उन्हें घेरकर दबोच लिया गया। कार की तलाशी ली गई कि डिकी और सीट के पास चार बोरियों में भरकर रखे गांजा के 35 बंडल बरामद हुए।
वजन करने पर 86 किलो की मात्रा पाई गई। पकड़े गए भोजपुर (आरा) जिले के बड़हरा थाना क्षेत्र के रामशहर निवासी राजकुमार पासवान, मटुकपुर निवासी विनोद साव, संदेश थाना क्षेत्र के सुरंगापुर निवासी विकास कुमार राय ने पूछताछ में गांजा को ओडिशा के फुलवारी से वाराणसी के लिए लेकर आने की पुष्टि की। वहीं कार का कोई कागजात नहीं दिखा पाए।
आरा से की जा रही थी पूरी डील, इस तरह कराई जा रही थी तस्करी
एएसपी के मुताबिक आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि आरा का रहने वाला व्यक्ति इसके लिए धन व वाहन की व्यवस्था करता है। उसके बताए स्थान पर उन्हें गांजा पहुंचाना होता है। बताई गई जगह पर खेप पहुंचाने के बाद कार चालक राजकुमार को 30 हजार, उसके बगल में बैठे विकास 25 हजार, पीछे बैठकर गांजा ले जाने वाले विनोद को 15 हजार दिए जाते हैं। किसी को इसका पता न चलने पाए इसके लिए यह धनराशि उन्हें आरा पहुंचने पर नकद के रूप में उपलब्ध कराई जाती है।
वहीं रास्ते में होने वाले खर्चों के लिए धनराशि क्यूआर कोड के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। रास्ते में कोई दिक्कत न आने पाए इसके लिए गांजा वाले वाहन से आगे एक और कार चलती है जिसमें बैठे व्यक्ति का काम रास्ते में होने वाली चेकिंग का लोकेशन और रास्ते की जानकारी देना होता है। ओडिशा में जिन व्यक्तियों से गांजे की खरीद की जाती है। उन्हें पहले ही ऑनलाइन धनराशि भेज दी जाती है।
पूछताछ में ओडिशा-बिहार के कई नाम प्रकाश में आए हैं। सभी के भूमिका की जांच की जा रही है। बरामद मोबाइल फोन एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए मिली जानकारी के आधार पर भी नेटवर्क और उससे जुड़़े व्यक्तियों के बारे में पता लगाया जा रहा है। पकड़े गए व्यक्तियों के आपराधिक इतिहास के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। - ऋषभ रुणवाल, एएसपी ऑपरेशन।