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Sultanpur News: दुर्गा पूजा महोत्सव में दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
Sun, 25 Oct 2026 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
Updated Sun, 25 Oct 2026 12:14 AM IST
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शहर में मां पूर्णागिरि का सजा भव्य दरबार। संवाद
सुल्तानपुर। दुर्गा पूजा महोत्सव में आस्था के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे की झलक दिखाई दे रही है। शहर के सूरज टॉकीज चौराहे पर लगातार पांचवें वर्ष भंडारा आयोजित हुआ। यह आयोजन हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बना।
शुक्रवार को हुए इस भंडारे में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। इसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन और कोल्ड ड्रिंक वितरित की गई। श्रद्धालुओं के लिए टेंट लगाकर भोजन की व्यवस्थित व्यवस्था की गई थी, जो देर रात तक जारी रही। बस स्टेशन स्थित शारदा माता पूजा पंडाल के पास भी शुक्रवार रात बड़ी पूड़ी और सब्जी का प्रसाद बांटा गया। इस व्यवस्था में कई कार्यकर्ता सक्रिय रहे। आयोजन में विभिन्न समुदाय के युवाओं ने मिलकर सहयोग किया।
केंद्रीय पूजा व्यवस्था समिति के उपाध्यक्ष राजदेव शुक्ल ने बताया कि दुर्गा पूजा महोत्सव सुल्तानपुर की साझा विरासत है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम व सिख समुदाय के लोग मेले की व्यवस्थाओं में भागीदारी करते हैं। वे भंडारों में भी लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।
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पंडालों को भव्य बनाने में योगदान
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव बीपी सिंह ने बताया कि सभी धर्मों के आयोजनों का मूल संदेश इन्सानियत और आपसी सद्भाव है। दुर्गा पूजा में मुस्लिम और सिख समाज के लोग पूजा समितियों को सामाजिक व आर्थिक सहयोग देते हैं। वे पंडाल निर्माण, विद्युत सजावट तथा अन्य व्यवस्थाओं में भी योगदान करते हैं। झारखंड के गिरिडीह से आने वाले मुस्लिम कारीगर जिले के पंडालों को भव्य स्वरूप देते हैं। ऐसी भागीदारी देश की एकता और अखंडता को मजबूत करती है।
जिले में साझी भागीदारी के उदाहरण
जिले के कई कस्बों में भी ऐसी साझी भागीदारी दिखती है। लंभुआ की दुर्गा पूजा कमेटी में वाजिद हुसैन सक्रिय हैं। कुड़वार में पूर्व प्रधान नौशाद अहमद और बल्दीराय में शमीम खान का योगदान है। शहर में अलीमुद्दीन, इलियास अहमद और नैयर रजा जैदी सहयोग करते हैं। सिख समाज के सरदार बलदेव सिंह और सरदार कमलजीत सिंह भी सामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं। तारिक अहमद ने नवरात्र में दुकान बंद रखकर हिंदू समाज की आस्था का सम्मान किया।
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शुक्रवार को हुए इस भंडारे में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। इसमें विभिन्न प्रकार के व्यंजन और कोल्ड ड्रिंक वितरित की गई। श्रद्धालुओं के लिए टेंट लगाकर भोजन की व्यवस्थित व्यवस्था की गई थी, जो देर रात तक जारी रही। बस स्टेशन स्थित शारदा माता पूजा पंडाल के पास भी शुक्रवार रात बड़ी पूड़ी और सब्जी का प्रसाद बांटा गया। इस व्यवस्था में कई कार्यकर्ता सक्रिय रहे। आयोजन में विभिन्न समुदाय के युवाओं ने मिलकर सहयोग किया।
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केंद्रीय पूजा व्यवस्था समिति के उपाध्यक्ष राजदेव शुक्ल ने बताया कि दुर्गा पूजा महोत्सव सुल्तानपुर की साझा विरासत है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम व सिख समुदाय के लोग मेले की व्यवस्थाओं में भागीदारी करते हैं। वे भंडारों में भी लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।
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पंडालों को भव्य बनाने में योगदान
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव बीपी सिंह ने बताया कि सभी धर्मों के आयोजनों का मूल संदेश इन्सानियत और आपसी सद्भाव है। दुर्गा पूजा में मुस्लिम और सिख समाज के लोग पूजा समितियों को सामाजिक व आर्थिक सहयोग देते हैं। वे पंडाल निर्माण, विद्युत सजावट तथा अन्य व्यवस्थाओं में भी योगदान करते हैं। झारखंड के गिरिडीह से आने वाले मुस्लिम कारीगर जिले के पंडालों को भव्य स्वरूप देते हैं। ऐसी भागीदारी देश की एकता और अखंडता को मजबूत करती है।
जिले में साझी भागीदारी के उदाहरण
जिले के कई कस्बों में भी ऐसी साझी भागीदारी दिखती है। लंभुआ की दुर्गा पूजा कमेटी में वाजिद हुसैन सक्रिय हैं। कुड़वार में पूर्व प्रधान नौशाद अहमद और बल्दीराय में शमीम खान का योगदान है। शहर में अलीमुद्दीन, इलियास अहमद और नैयर रजा जैदी सहयोग करते हैं। सिख समाज के सरदार बलदेव सिंह और सरदार कमलजीत सिंह भी सामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं। तारिक अहमद ने नवरात्र में दुकान बंद रखकर हिंदू समाज की आस्था का सम्मान किया।

शहर में मां पूर्णागिरि का सजा भव्य दरबार। संवाद

शहर में मां पूर्णागिरि का सजा भव्य दरबार। संवाद

शहर में मां पूर्णागिरि का सजा भव्य दरबार। संवाद