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यूपी चुनाव: हर क्षेत्र के लिए अलग रणनीति, नई बूथ प्रबंधन योजना; नवंबर में शाह तैयार करेंगे चुनावी चक्रव्यूह
Wed, 28 Oct 2026 03:31 PM IST
Sharukh Khan
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: Sharukh Khan
Updated Wed, 28 Oct 2026 03:31 PM IST
सार
यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा हर क्षेत्र के लिए अलग रणनीति तैयार करेगी। सभी छह क्षेत्रों के दौरे के बाद अमित शाह चुनावी चक्रव्यूह तैयार करेंगे। क्षेत्रों के दौरे में शाह स्थानीय पदाधिकारियों, प्रभारियों के अलावा प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर जमीनी हालात को समझेंगे।
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Amit Shah
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक का मंत्र तलाशने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नवंबर में सभी छह क्षेत्रों का दौरा करेंगे। जीत सुनिश्चित करने के लिए उनकी योजना बूथों का नए सिरे से प्रबंधन करने और सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग चुनावी रणनीति बनाने की है।
शाह की क्षेत्रों के माध्यम से सियासी नब्ज टटोलने की शुरुआत अवध से हो सकती है। उनका 30 और 31 अक्तूबर को लखनऊ दौरा पहले से ही तय है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक पंजाब के गुणा गणित में उलझे शाह ने इस सूबे की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। वहां अकाली दल-भाजपा के गठबंधन की नींव रखने के साथ ही मुद्दे तय किए जा चुके हैं।
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शाह की क्षेत्रों के माध्यम से सियासी नब्ज टटोलने की शुरुआत अवध से हो सकती है। उनका 30 और 31 अक्तूबर को लखनऊ दौरा पहले से ही तय है। सूत्रों के मुताबिक, अब तक पंजाब के गुणा गणित में उलझे शाह ने इस सूबे की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। वहां अकाली दल-भाजपा के गठबंधन की नींव रखने के साथ ही मुद्दे तय किए जा चुके हैं।
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शाह एक नवंबर को चंडीगढ़ में बाकी बचे मुद्दों को पूरी तरह से सुलझाने के बाद उत्तर प्रदेश के मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार होंगे। उनकी योजना नवंबर में राज्य के सभी छह क्षेत्रों-पश्चिम, अवध, काशी, ब्रज, गोरखपुर और कानपुर-बुंदलेखंड की अलग-अलग यात्रा करने की है।
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जमीनी हालात को समझने के लिए दौरा
क्षेत्रों के दौरे में शाह स्थानीय पदाधिकारियों, प्रभारियों के अलावा प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर जमीनी हालात को समझेंगे। इस दौरान सबसे अहम बैठक क्षेत्र के प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ होगी। उनकी योजना इनसे ही जमीनी स्तर पर फीडबैक हासिल कर भावी कार्ययोजना तैयार करने की है। इस दौरान शाह यह भी समझेंगे कि भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों में जिन बूथों पर पीछे रही, वहां जमीनी स्तर पर किस तरह की तैयारी है।
क्षेत्रों के दौरे में शाह स्थानीय पदाधिकारियों, प्रभारियों के अलावा प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर जमीनी हालात को समझेंगे। इस दौरान सबसे अहम बैठक क्षेत्र के प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ होगी। उनकी योजना इनसे ही जमीनी स्तर पर फीडबैक हासिल कर भावी कार्ययोजना तैयार करने की है। इस दौरान शाह यह भी समझेंगे कि भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों में जिन बूथों पर पीछे रही, वहां जमीनी स्तर पर किस तरह की तैयारी है।
हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग रणनीति
2012 में बतौर प्रभारी यूपी भेजे गए शाह ने 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की थी। मसलन पश्चिम में भाजपा का सबसे अहम मुद्दा हिंदुत्व था, जबकि पूरब में पार्टी ने सामाजिक समीकरण साधने के लिए अपना दल सहित कुछ सहयोगियों से हाथ मिलाया था। सूत्रों ने कहा कि चूंकि बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबसे अधिक झटका पूरब ने ही दिया था, ऐसे में इस क्षेत्र में नए सिरे से सामाजिक समीकरण को साधना होगा।
2012 में बतौर प्रभारी यूपी भेजे गए शाह ने 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की थी। मसलन पश्चिम में भाजपा का सबसे अहम मुद्दा हिंदुत्व था, जबकि पूरब में पार्टी ने सामाजिक समीकरण साधने के लिए अपना दल सहित कुछ सहयोगियों से हाथ मिलाया था। सूत्रों ने कहा कि चूंकि बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को सबसे अधिक झटका पूरब ने ही दिया था, ऐसे में इस क्षेत्र में नए सिरे से सामाजिक समीकरण को साधना होगा।
60 बनाम 40 का फार्मूला कारगर नहीं
पार्टी सूत्र ने बताया कि 60 (अगड़ा, गैरयादव ओबीसी, गैरजाटव दलित) बनाम 40 (यादव, मुसलमान और जाटव) फार्मूले से भाजपा को 2014, 2017 और 2022 में सफलता मिली। हालांकि 2024 के नतीजे, जिसमें भाजपा के गैरयादव ओबीसी और गैरजाटव दलित वोट बैंक में लगी सेंध ने यह संकेत दिया है कि भाजपा को अपना दायरा बड़ा करना होगा। ऐसे में शाह यूपी के दौरे में खासतौर पर जाटव बिरादरी में सेंध लगाने और पुराने वोट बैंक को जोड़े रखने के उपाय तलाशेंगे।
पार्टी सूत्र ने बताया कि 60 (अगड़ा, गैरयादव ओबीसी, गैरजाटव दलित) बनाम 40 (यादव, मुसलमान और जाटव) फार्मूले से भाजपा को 2014, 2017 और 2022 में सफलता मिली। हालांकि 2024 के नतीजे, जिसमें भाजपा के गैरयादव ओबीसी और गैरजाटव दलित वोट बैंक में लगी सेंध ने यह संकेत दिया है कि भाजपा को अपना दायरा बड़ा करना होगा। ऐसे में शाह यूपी के दौरे में खासतौर पर जाटव बिरादरी में सेंध लगाने और पुराने वोट बैंक को जोड़े रखने के उपाय तलाशेंगे।