श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: 4 देशों के भक्त काशी में मनाएंगे पर्व, 21 महिलाएं करेंगी पाठ; 108 व्यंजनों का लगेगा भोग
काशी में धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक घरों और मंदिरों में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाने के लिए लोगों में उत्साह है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर काशी में चार देशों और 10 राज्यों से भक्त आ रहे हैं। वह कान्हा का जन्मोत्सव मनाएंगे। देश के 10 से अधिक राज्यों के अलावा अमेरिका, इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया और स्वीट्जरलैंड से भी भक्त आएंगे। वह षष्ठपीठ गोपाल मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में सेवा पूजन करेंगे। गोपाल मंदिर में बुधवार से ही श्रीकृष्ण उत्सव शुरू हो जाएगा। जबकि इस्कॉन मंदिर और महेश्वरी भवन के उत्सव तीन सितंबर से शुरू हो जाएगा। शहर में छह दिवसीय श्रीकृष्ण उत्सव शुरू हो जाएगा।
शहर में इस्कॉन मंदिर दुर्गाकुंड, हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी के उत्सव माहेश्वरी भवन महमूरगंज और गोपाल मंदिर चौखंभा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव व्यापक स्तर पर मनाया जाता है। इन मंदिरों में व्यापक स्तर पर तैयारी चल रही है। गोपाल मंदिर के सेवक अशोक बल्लभ दास ने बताया कि मंदिर में सेवा व पूजा के लिए विदेशों के अलावा यूपी, बिहार, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान आदि राज्यों से कृष्ण भक्त आ रहे हैं।
वृंदावन और मथुरा के भक्तों का जत्था आएगा। मंदिर में राग-भोग की तैयारी शुरू हो गई है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में विराजमान गोपाललाल, बाल रूप में मुकुंद राय व गोपीनाथ की पूजा होगी। बुधवार को गोपाललाल के प्राकट्योत्सव से श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव शुरू हो जाएगा।
हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी का तीन दिवसीय श्रीकृष्ण प्राकट्य तीन सितंबर से शुरू होगा। सोसइटी के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद दास ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का शुभारम्भ शोभायात्रा से होगा। शोभायात्रा अन्नपूर्णा नगर कालोनी (विद्यापीठ के सामने) से सुबह सात बजे से निकाली जाएगी। यात्रा माहेश्वरी भवन पहुंचेगी। इसमें विद्यालयों के बच्चे भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी छवि के साथ शामिल होंगे। शाम को भक्त हरे कृष्ण महामंत्र का कीर्तन करेंगे।
इसे भी पढ़ें; अश्व शक्ति: काशी की सुरक्षा में तैनात हैं ‘रॉयल’ पहरेदार, लेते हैं सैंड बाथ; ऐसे होता है इनका दैनिक अभ्यास
हरिनाम एवं तुलसी आरती होगी। वैदिक एवं सांस्कृतिक नृत्य नाटिका, भजन संध्या का आयोजन होगा। श्री राधा गोविन्द देव, श्री जगन्नाथ, बलदेव, शुभद्रा के विग्रहों का मनमोहक शृंगार होगा। उन्होंने बताया कि चार सितंबर को पंचामृत से लड्डू गोपाल का अभिषेक, 21 महिलाएं श्रीब्रह्म संहिता का पाठ एवं हरे कृष्ण महामंत्र के संकीर्तन करेंगी। रात में 12 बजे महाआरती एवं संकीर्तन के साथ भगवान को 108 व्यंजनों का भोग लगेगा। पांच सितंबर को दोपहर में श्रील प्रभुपाद जी का आर्विभाव दिवस तथा शाम को नन्दोत्सव मनाया जाएगा।