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Almora News: राष्ट्रीय स्तर के क्रिकेटर देने वाले जिले में नहीं बन सका क्रिकेट स्टेडियम
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 12 May 2026 11:18 PM IST
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बागेश्वर। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के क्रिकेटर देने वाले जिले को राज्य बनने के 26 साल बाद भी क्रिकेट स्टेडियम नहीं मिल सका है। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए नुमाइशखेत मैदान या पंडित बीडी पांडेय परिसर के खेल मैदान पर निर्भर रहना पड़ता है। जिला स्तर की प्रतियोगिताएं कराने के लिए हल्द्वानी का रुख करने की मजबूरी है। टर्फ विकेट पर प्रति मैच कराने में एसोसिएशन को 6000 रुपये की अतिरिक्त चपत लग रही है।
2019 में प्रदेश और जिले में क्रिकेट एसोसिएशन के अस्तित्व में आने के बाद क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा दिखाने के मौके मिलने लगे हैं। एसोसिएशन की तरफ से टर्फ विकेट पर जिला और प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। जूनियर और सीनियर स्तर पर होने वाली ये प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच साबित होती हैं। हालांकि जिले में क्रिकेट मैदान के अभाव में खिलाड़ियों को भरपूर तैयारी का मौका नहीं मिल पाता है। स्थानीय प्रतियोगिताएं भी मैदान में मैट बिछाकर कराई जाती हैं। इनमें खेलने का खिलाड़ियों को खास लाभ नहीं मिल पाता है।
हल्द्वानी में कराए गए 90 मुकाबलों में पांच लाख से अधिक हो चुके अतिरिक्त खर्च
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बागेश्वर ने 2023 से अंडर-19 और सीनियर वर्ग की जिला स्तरीय लीग शुरू की थी। इसके तहत अब तक करीब 90 मुकाबले हल्द्वानी में कराए जा चुके हैं। एसोसिएशन से मिली जानकारी के अनुसार हल्द्वानी में प्रत्येक मैच का 4000 रुपये मैदान का शुल्क देना पड़ता है। 1600 अंपायर शुल्क, 600 स्कोरिंग शुल्क, खिलाड़ी और अन्य स्टाफ के भोजन में 4000 रुपये से अधिक और ट्रांसपोर्ट शुल्क समेत करीब 12,000 रुपये प्रति मैच खर्च होते हैं। जिले में अगर स्टेडियम होता तो एक मैच कराने में करीब 6000 रुपये के खर्च आता। अब तक आयोजित चार साल में एसोसिएशन ने क्रिकेट लीग कराने में करीब 11 लाख रुपये खर्च किए हैं। जिले में सुविधा होने पर केवल 5.50 लाख रुपये ही खर्च होते।
जिले से निकलकर छाप छोड़ने वाले क्रिकेटर
भीड़ी के मनीष पांडेय, भरसाली के कमलेश नगरकोटी, मंडलसेरा के दीपक धपोला और छतीना के देवेंद्र बोरा रणजी, इंडिया और आईपीएल की टीमों से खेलकर नाम कमा रहे हैं। सुमटी की प्रेमा रावत भी प्रदेश, डब्ल्यूपीएल और राष्ट्रीय टीम की सदस्य हैं। महोली के नीरज राठौर कुशल खिलाड़ी होने के साथ-साथ देहरादून में क्रिकेट अकादमी भी चला रहे हैं।
......
25 गज का नुमाइशखेत मैदान बेहद छोटा होने से क्रिकेट मैच कराने के मानक में फिट नहीं बैठता है। परिसर का मैदान भी क्रिकेट प्रतियोगिता कराने के लिए उपयुक्त नहीं है। शासन-प्रशासन चाहे तो परिसर के मैदान को क्रिकेट स्टेडियम का रूप दे सकती है। जिले में क्रिकेट स्टेडियम बनेगा तो क्रिकेट के विकास में काफी मदद मिलेगी।
सुरेश सोनियाल, पूर्व सह सचिव, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड
.......
जिले में क्रिकेट प्रतिभाओं की कमी नहीं है। एसोसिएशन की ओर से उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित भी किया जाता है, लेकिन क्रिकेट स्टेडियम का नहीं होना इसके आड़े आ जाता है। अच्छा क्रिकेटर बनने के लिए खिलाड़ियों को उचित अभ्यास की जरूरत होती है। इसके लिए उन्हें बाहर का रुख करना पड़ता है।
राम चंद्र पांडेय, अध्यक्ष, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बागेश्वर
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2019 में प्रदेश और जिले में क्रिकेट एसोसिएशन के अस्तित्व में आने के बाद क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा दिखाने के मौके मिलने लगे हैं। एसोसिएशन की तरफ से टर्फ विकेट पर जिला और प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं। जूनियर और सीनियर स्तर पर होने वाली ये प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के लिए बड़ा मंच साबित होती हैं। हालांकि जिले में क्रिकेट मैदान के अभाव में खिलाड़ियों को भरपूर तैयारी का मौका नहीं मिल पाता है। स्थानीय प्रतियोगिताएं भी मैदान में मैट बिछाकर कराई जाती हैं। इनमें खेलने का खिलाड़ियों को खास लाभ नहीं मिल पाता है।
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हल्द्वानी में कराए गए 90 मुकाबलों में पांच लाख से अधिक हो चुके अतिरिक्त खर्च
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बागेश्वर ने 2023 से अंडर-19 और सीनियर वर्ग की जिला स्तरीय लीग शुरू की थी। इसके तहत अब तक करीब 90 मुकाबले हल्द्वानी में कराए जा चुके हैं। एसोसिएशन से मिली जानकारी के अनुसार हल्द्वानी में प्रत्येक मैच का 4000 रुपये मैदान का शुल्क देना पड़ता है। 1600 अंपायर शुल्क, 600 स्कोरिंग शुल्क, खिलाड़ी और अन्य स्टाफ के भोजन में 4000 रुपये से अधिक और ट्रांसपोर्ट शुल्क समेत करीब 12,000 रुपये प्रति मैच खर्च होते हैं। जिले में अगर स्टेडियम होता तो एक मैच कराने में करीब 6000 रुपये के खर्च आता। अब तक आयोजित चार साल में एसोसिएशन ने क्रिकेट लीग कराने में करीब 11 लाख रुपये खर्च किए हैं। जिले में सुविधा होने पर केवल 5.50 लाख रुपये ही खर्च होते।
जिले से निकलकर छाप छोड़ने वाले क्रिकेटर
भीड़ी के मनीष पांडेय, भरसाली के कमलेश नगरकोटी, मंडलसेरा के दीपक धपोला और छतीना के देवेंद्र बोरा रणजी, इंडिया और आईपीएल की टीमों से खेलकर नाम कमा रहे हैं। सुमटी की प्रेमा रावत भी प्रदेश, डब्ल्यूपीएल और राष्ट्रीय टीम की सदस्य हैं। महोली के नीरज राठौर कुशल खिलाड़ी होने के साथ-साथ देहरादून में क्रिकेट अकादमी भी चला रहे हैं।
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25 गज का नुमाइशखेत मैदान बेहद छोटा होने से क्रिकेट मैच कराने के मानक में फिट नहीं बैठता है। परिसर का मैदान भी क्रिकेट प्रतियोगिता कराने के लिए उपयुक्त नहीं है। शासन-प्रशासन चाहे तो परिसर के मैदान को क्रिकेट स्टेडियम का रूप दे सकती है। जिले में क्रिकेट स्टेडियम बनेगा तो क्रिकेट के विकास में काफी मदद मिलेगी।
सुरेश सोनियाल, पूर्व सह सचिव, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड
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जिले में क्रिकेट प्रतिभाओं की कमी नहीं है। एसोसिएशन की ओर से उन्हें आगे बढ़ने को प्रेरित भी किया जाता है, लेकिन क्रिकेट स्टेडियम का नहीं होना इसके आड़े आ जाता है। अच्छा क्रिकेटर बनने के लिए खिलाड़ियों को उचित अभ्यास की जरूरत होती है। इसके लिए उन्हें बाहर का रुख करना पड़ता है।
राम चंद्र पांडेय, अध्यक्ष, क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बागेश्वर