Uk: रामगंगा-कोसी के किनारे बसे गांवों की पहली बार वैज्ञानिक सर्वे, खतरों को चिह्नित करेगा मानस विज्ञान केंद्र
अल्मोड़ा में रामगंगा-कोसी के किनारे बसे गांवों का पहली बार वैज्ञानिक सर्वे कर मानसून आपदाओं के जोखिम का आकलन किया जा रहा है।
विस्तार
रामगंगा-कोसी के किनारे बसे गांवों का पहली बार वैज्ञानिक सर्वे मानस विज्ञान केंद्र जिले में कोसी और रामगंगा जैसी संवेदनशील नदियों के आसपास के क्षेत्रों का पहली बार वैज्ञानिक सर्वे हो रहा है। मानस विज्ञान केंद्र की ओर से मानसून काल के जोखिमों का आकलन करने के लिए किए जा रहे इस सर्वे की रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपी जाएगी।
पिछले साल अगस्त में धराली में हुई बादल फटने की घटना और मलबे के तांडव ने जो जख्म दिए थे, उनसे सबक लेते हुए अब भविष्य की आपदाओं को रोकने की तैयारी शुरू हो गई है। सर्वे में मकानों की स्थिति, नदी के जलस्तर, कटान की आशंका और नदियों की आपातकालीन निकासी मार्गों का भी आकलन किया जा रहा है। सर्वे के बाद भविष्य में मानसून काल के दौरान आपदाओं से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार होगी।
16 वर्ष पहले उफान पर आई थी कोसी नदी
रामगंगा नदी अल्मोड़ा जिले में करीब 90 से 100 किलोमीटर तक बहती है। इसके अलावा कोसी का बहाव क्षेत्र 103 किलोमीटर है। वर्ष 2010 में अति भयंकर वर्षा के बाद कोसी नदी के उफान पर आने से इसके किनारे बसे दर्जनों मकान, दुकान और सड़कें तब तबाह हो गई थी। वर्तमान में मानस विज्ञान केंद्र की टीम नदियों की मौजूदा स्थिति, जल का लेवल, नदी का पूरा और वर्तमान रूट, रास्ता बदलने की स्थिति में संभावित रूट जैसे कई विषयों पर आंकड़े जुटा रही है।
नदी बदलती है अपना स्वरूप
वैज्ञानिकों के अनुसार, नदी अपना स्वरूप कुछ वर्षों में बदलती रहती है। 16 वर्ष पहले भयंकर वर्षा के बाद कोसी नदी के उफान पर आई थी। नदी फिर से अपना स्वरूप बदल सकती है। कहां-कहां तक उसका प्रभाव रहेगा। इसे जानने के वह नदियों का सर्वे कर रहे हैं। आपदा की स्थति में कम से कम नुकसान हो इसके सुझाव भी सर्वे रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
उत्तराखंड राज्य विज्ञान व प्रौद्योगिकी परिषद से जुड़ा मानस केंद्र कोसी और रामगंगा सहित उनके सहायक नदियों का सर्वे कर रहा है। इसमें जीआईएस मैपिंग की मदद ली जा रही है। किसी भी तरह के खतरों से निपटने के लिए यह सर्वे कारगर होगा। सर्वे कार्य प्रगति पर है। सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपी जाएगी। -डॉ. नवीन चंद्र जोशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी एवं केंद्र प्रभारी, मानस विज्ञान केंद्र अल्मोड़ा

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