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Almora News: जंगल की आग के गेस्ट हाउस की ओर बढ़ने से मची अफरातफरी
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 05 Mar 2026 11:02 PM IST
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अल्मोड़ा। जिले में फायर सीजन में जंगलों के धधकने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार देर शाम अचानक कटारमल के पास जंगल में आग भड़क गई। आग तेजी से कुछ दूरी पर स्थित गेस्ट हाउस की ओर बढ़ने लगी। इससे क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। आग लगने की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची फायर सर्विस टीम ने दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को काबू किया।
मंगलवार देर शाम 6:11 बजे फायर स्टेशन अल्मोड़ा को सूचना मिली कि कटारमल के पास जंगलों में आग लग गई। आग तेजी से जंगल के पास स्थित गेस्ट हाउस और आबादी की ओर बढ़ रही है। मौके पर पहुंची फायर सर्विस टीम ने जंगल में फैली आग पर होज रील से पानी की बौछार की। इसके बाद आग सुलगती रही तो पेड़ों की टहनियों की मदद से इसे आग को शांत किया गया। जंगल में एक हेक्टेयर क्षेत्र में वन संपदा आग की भेंट चढ़ गई। प्रभारी सीएफओ मुकेश चंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि सूचना मिलने पर फौरन टीम को मौका पर भेजा गया। समय रहते जंगल की आग को नियंत्रित कर आबादी की ओर बढ़ने से रोक लिया गया। टीम में किशन सिंह, हरि सिंह, चांदनी, बबीता जोशी, भावना कोरंगा शामिल रहीं।
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लकड़ियाथल के जंगल में लगी आग
बागेश्वर। होली के दौरान भी जिले में कई जगहों पर जंगलों में आग लगी रही। दुगनाकुरी तहसील क्षेत्र के पुंगरघाटी में कुमुद और आसपास के गांवों में वनाग्नि की घटनाएं हुईं। गरुड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में भी जंगल सुलग रहे थे। मंगलवार की रात कांडा मोटर मार्ग के पास लकड़ियाथल के जंगल में भी भीषण आग लगी। देर रात तक जंगल जलता रहा। आग फैलते हुए मोटर मार्ग तक पहुंच गई। वनों के जलने से वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है। पेड़-पौधों के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी खतरा बढ़ रहा है। वातावरण में धुआं फैलने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नाप भूमि, सिविल वन और वन पंचायत में ही अब तक आग की घटनाओं की जानकारी है। आरक्षित वनों में आग नहीं लगी है। डीएफओ आदित्य रत्न ने बताया कि जहां भी आग लगने की सूचना मिल रही है, विभाग की टीम त्वरित रूप से जाकर काबू कर रही है। फिलहाल नाप भूमि या सिविल वन में आग लगने की ही घटनाएं सामने आईं हैं।
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सेहत पर भारी पड़ रहा वातावरण में फैला धुंआ
कपकोट (बागेश्वर)। जंगलों के जलने से पूरे क्षेत्र में फैला धुंआ सेहत पर भारी पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। अस्पताल में आने वाले अधिकतर आंख और श्वास संबंधी परेशानी लेकर आ रहे हैं।
बृहस्पतिवार की सुबह भी क्षेत्र में काफी धुआं फैला होने से दृश्यता काफी कम रही। धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि दिन चढ़ने के साथ-साथ धुएं का असर कम दिखा। क्षेत्रवासियों ने बताया कि कई दिनों से वातावरण में धुआं फैला हुआ है। इसके कारण आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, घुटन और सुस्ती की परेशानी हो रही है। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बृजेश घटियाल ने बताया कि अस्पताल में रोजाना सात-आठ मरीज धुएं से हो रही शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वनों में आग के चलते एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब होता है। हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ने से एलर्जी, अस्थमा के मरीजों को दिक्कत हो सकती है। उन्होंने लोगों को मास्क का प्रयोग करने, गुनगुने पानी और मौसमी फल-सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी। कहा लोगों को किसी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
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मंगलवार देर शाम 6:11 बजे फायर स्टेशन अल्मोड़ा को सूचना मिली कि कटारमल के पास जंगलों में आग लग गई। आग तेजी से जंगल के पास स्थित गेस्ट हाउस और आबादी की ओर बढ़ रही है। मौके पर पहुंची फायर सर्विस टीम ने जंगल में फैली आग पर होज रील से पानी की बौछार की। इसके बाद आग सुलगती रही तो पेड़ों की टहनियों की मदद से इसे आग को शांत किया गया। जंगल में एक हेक्टेयर क्षेत्र में वन संपदा आग की भेंट चढ़ गई। प्रभारी सीएफओ मुकेश चंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि सूचना मिलने पर फौरन टीम को मौका पर भेजा गया। समय रहते जंगल की आग को नियंत्रित कर आबादी की ओर बढ़ने से रोक लिया गया। टीम में किशन सिंह, हरि सिंह, चांदनी, बबीता जोशी, भावना कोरंगा शामिल रहीं।
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लकड़ियाथल के जंगल में लगी आग
बागेश्वर। होली के दौरान भी जिले में कई जगहों पर जंगलों में आग लगी रही। दुगनाकुरी तहसील क्षेत्र के पुंगरघाटी में कुमुद और आसपास के गांवों में वनाग्नि की घटनाएं हुईं। गरुड़ के दूरस्थ क्षेत्रों में भी जंगल सुलग रहे थे। मंगलवार की रात कांडा मोटर मार्ग के पास लकड़ियाथल के जंगल में भी भीषण आग लगी। देर रात तक जंगल जलता रहा। आग फैलते हुए मोटर मार्ग तक पहुंच गई। वनों के जलने से वन संपदा को काफी नुकसान हो रहा है। पेड़-पौधों के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी खतरा बढ़ रहा है। वातावरण में धुआं फैलने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नाप भूमि, सिविल वन और वन पंचायत में ही अब तक आग की घटनाओं की जानकारी है। आरक्षित वनों में आग नहीं लगी है। डीएफओ आदित्य रत्न ने बताया कि जहां भी आग लगने की सूचना मिल रही है, विभाग की टीम त्वरित रूप से जाकर काबू कर रही है। फिलहाल नाप भूमि या सिविल वन में आग लगने की ही घटनाएं सामने आईं हैं।
सेहत पर भारी पड़ रहा वातावरण में फैला धुंआ
कपकोट (बागेश्वर)। जंगलों के जलने से पूरे क्षेत्र में फैला धुंआ सेहत पर भारी पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। अस्पताल में आने वाले अधिकतर आंख और श्वास संबंधी परेशानी लेकर आ रहे हैं।
बृहस्पतिवार की सुबह भी क्षेत्र में काफी धुआं फैला होने से दृश्यता काफी कम रही। धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि दिन चढ़ने के साथ-साथ धुएं का असर कम दिखा। क्षेत्रवासियों ने बताया कि कई दिनों से वातावरण में धुआं फैला हुआ है। इसके कारण आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, घुटन और सुस्ती की परेशानी हो रही है। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. बृजेश घटियाल ने बताया कि अस्पताल में रोजाना सात-आठ मरीज धुएं से हो रही शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वनों में आग के चलते एयर क्वालिटी इंडेक्स खराब होता है। हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ने से एलर्जी, अस्थमा के मरीजों को दिक्कत हो सकती है। उन्होंने लोगों को मास्क का प्रयोग करने, गुनगुने पानी और मौसमी फल-सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी। कहा लोगों को किसी तरह की परेशानी होने पर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।