पहाड़ की बेटी की लंबी छलांग: अब जैसलमेर बॉर्डर पर 100 किमी दौड़ने की तैयारी में प्रज्ञा, ऐसे की थी शुरुआत
प्रज्ञा कपकोटी ने सात साल पहले फिटनेस के लिए दौड़ना शुरू किया था, जो अब उनका जीवन उद्देश्य और पहचान बन चुका है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर बागेश्वर जिले का नाम रोशन किया है
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अगर सात साल पहले किसी ने मुझसे कहा होता कि दौड़ना मेरी ज़िंदगी का इतना अहम हिस्सा बन जाएगा, तो शायद मैं यकीन नहीं करती। जो सफर सिर्फ फिट रहने की एक छोटी सी कोशिश के रूप में शुरू हुआ था, वह आज मेरे जीवन का उद्देश्य, मेरी पहचान और मेरी सबसे बड़ी सीख बन चुका है। यह कहना है जिले के कपकोट क्षेत्र की होनहार धाविका प्रज्ञा कपकोटी का। प्रज्ञा ने अपनी खेल प्रतिभा की बदौलत राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन किया है। वर्तमान में प्रज्ञा प्रसिद्ध इंटरनेशनल स्पोर्ट्स ब्रांड न्यू बैलेंस की रनिंग कम्युनिटी में बतौर कोच धावकों को प्रशिक्षित कर रही हैं।
प्रज्ञा कपकोटी ने पिछले सात वर्षों में देश की कई प्रतिष्ठित और बेहद कठिन मैराथन प्रतियोगिताओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है। उन्होंने अपने इस सफर की शुरुआत साल 2020 में एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन पांच किमी से की थी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्रज्ञा ने एजेस फेडरल नई दिल्ली मैराथन-2022 में 10 किमी, वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन-2022 में 21 किमी, सुपर सिख रन-2023 में 21 किमी, रन फॉर गुड-2023 में 10 किमी, टीसीएस बैंगलोर-2023 में 10 किमी, टफमैन माशोबरा वर्चुअल मैराथन में 21 किमी और दुर्गम पिचों वाली लद्दाख मैराथन-2023 में 21 किमी में अपनी ताकत का लोहा मनवाया। इसके अलावा उन्होंने नई दिल्ली मैराथन-2023 में 42.21 किमी और प्रतिष्ठित टाटा मुंबई मैराथन-2024 में 42.21 किमी जैसी फुल मैराथन को भी शानदार टाइमिंग के साथ पूरा किया। प्रज्ञा ने टाटा स्टील कोलकाता-2023 में 25 किमी में चौथा स्थान और टर्फमैन माशोबरा अल्ट्रा ट्रेल-2024 में 30 किमी की दौड़ पूरी की। बीते अप्रैल 2026 में आयोजित हुई वैष्णो देवी कटरा हाफ मैराथन में 21 किमी में उन्होंने देश के मशहूर धावकों के बीच दूसरा स्थान हासिल कर देवभूमि का मान बढ़ाया।
क्रिकेटर पैट कमिंस से मिली सीख, अब 100 किलोमीटर का महा-लक्ष्य
प्रज्ञा ने बताया कि न्यू बैलेंस स्टोर लॉन्च के दौरान उन्हें और उनकी साथी कोच को प्रसिद्ध ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर पैट कमिंस से बातचीत करने का अनूठा अवसर मिला। पैट कमिंस से हुई चर्चा को प्रेरणादायक बताते हुए उन्होंने कहा कि खेल चाहे कोई भी हो, अनुशासन, निरंतरता और सीखने की भूख ही खिलाड़ी की सबसे बड़ी ताकत होती है। प्रज्ञा अब अपने जीवन की सबसे बड़ी चुनौती की तैयारी में जुट गई हैं, वह आगामी दिसंबर महीने में आयोजित होने वाली 100 किलोमीटर जैसलमेर बॉर्डर रेस के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। प्रज्ञा का मानना है कि हर लंबी मंजिल छोटे-छोटे और लगातार उठाए गए कदमों से ही तय होती है।