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Bageshwar News: हुड़के की की थाप पर समृद्ध होगी लोक संस्कृति
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:00 AM IST
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बागेश्वर। जिले के विद्यालयों में अब छात्र अपनी लोक संस्कृति की थाप पर थिरकते और वाद्य यंत्रों को बजाते नजर आएंगे। समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले के 12 चयनित राजकीय विद्यालयों में लोकधुन कार्यक्रम का क्रियान्वयन शुरू कर दिया गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को स्थानीय लोक वाद्य यंत्रों से परिचित कराना और उनका संरक्षण व संवर्धन करना है।
समग्र शिक्षा की ओर से संचालित कार्यक्रम के तहत प्रत्येक चयनित विद्यालय को वाद्य यंत्रों की खरीद के लिए 50 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। जिससे विद्यालय प्रबंधन समिति की देखरेख में पारदर्शी तरीके से वाद्य यंत्रों की खरीद की जानी है, जिसमें ढोल-दमाऊ, हुड़का और डौर-थाली को अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण के लिए स्थानीय 75 वर्ष से कम और संस्कृति विभाग में पंजीकृत कलाकारों को वरीयता दी जाएगी। प्रशिक्षक को विद्यालय की समय-सारणी के अनुसार प्रति सप्ताह कम से कम दो वादन सत्रों के माध्यम से कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करना होगा, जिसमें कम से कम चार पारंपरिक तालों का ज्ञान देना अनिवार्य है। विद्यालयों में प्रशिक्षित छात्रों की संख्या कुल छात्र संख्या का कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए।
.....इनसेट
इन स्कूलों में संचालित होगा कार्यक्रम
जिले के राजकीय इंटर कॉलेज काफलीगैर, मंडलसेरा, बोहाला, रवाईंखाल, बंतोली, मैगड़ीस्टेट, सिरकोट, सूपी, वज्यूला, कन्यालीकोट, रातिरकेटी और बघर में संचालित किया जा रहा है। पहले चरण में प्रशिक्षकों के लिए एक महीने का मानदेय आवंटित किया जा रहा है, और शेष अवधि के लिए पृथक से निर्देश जारी किए जाएंगे।
......कोट
विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति का ज्ञान कराने और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम कराया जा रहा है। संबंधित बीईओ को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में इसका क्रियान्वयन कराने के निर्देश दिए गए हैं। - विनय कुमार, सीईओ बागेश्वर
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समग्र शिक्षा की ओर से संचालित कार्यक्रम के तहत प्रत्येक चयनित विद्यालय को वाद्य यंत्रों की खरीद के लिए 50 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। जिससे विद्यालय प्रबंधन समिति की देखरेख में पारदर्शी तरीके से वाद्य यंत्रों की खरीद की जानी है, जिसमें ढोल-दमाऊ, हुड़का और डौर-थाली को अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा। इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण के लिए स्थानीय 75 वर्ष से कम और संस्कृति विभाग में पंजीकृत कलाकारों को वरीयता दी जाएगी। प्रशिक्षक को विद्यालय की समय-सारणी के अनुसार प्रति सप्ताह कम से कम दो वादन सत्रों के माध्यम से कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करना होगा, जिसमें कम से कम चार पारंपरिक तालों का ज्ञान देना अनिवार्य है। विद्यालयों में प्रशिक्षित छात्रों की संख्या कुल छात्र संख्या का कम से कम 40 प्रतिशत होनी चाहिए।
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जिले के राजकीय इंटर कॉलेज काफलीगैर, मंडलसेरा, बोहाला, रवाईंखाल, बंतोली, मैगड़ीस्टेट, सिरकोट, सूपी, वज्यूला, कन्यालीकोट, रातिरकेटी और बघर में संचालित किया जा रहा है। पहले चरण में प्रशिक्षकों के लिए एक महीने का मानदेय आवंटित किया जा रहा है, और शेष अवधि के लिए पृथक से निर्देश जारी किए जाएंगे।
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विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति का ज्ञान कराने और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम कराया जा रहा है। संबंधित बीईओ को अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों में इसका क्रियान्वयन कराने के निर्देश दिए गए हैं। - विनय कुमार, सीईओ बागेश्वर