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Bageshwar News: कांडा-कमस्यार घाटी में झमाझम बारिश के साथ ओलावृष्टि
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बागेश्वर /कपकोट । जिले में बीते कुछ दिनों से चटक धूप खिलने के बाद अब मौसम के मिजाज में तल्खी कम होने लगी है। जिले में दोपहर बाद अचानक मौसम करवट बदल रहा है। सोमवार को अपराह्न बाद आसमान में घने बादल छा गए, जिसके तुरंत बाद कांडा -कमस्यार घाटी क्षेत्र में तेज गर्जना के साथ झमाझम बारिश और भारी ओलावृष्टि हुई। इस बारिश से जहां क्षेत्रवासियों को भीषण गर्मी से राहत मिली है और मौसम सुहावना हो गया है, वहीं जिले के अन्य हिस्सों में भी देर रात तक तेज बौछारें पड़ने की संभावना बनी हुई है।
बेमौसम ओलावृष्टि और तेज बारिश का खेती-किसानी पर मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। अचानक गिरे ओलों के कारण घाटी क्षेत्र में काश्तकारों की फल, नकदी सब्जी और बेल वाली फसलों लौकी, तोरई, कद्दू आदि को काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसान चिंतित हैं। पारंपरिक अनाज की खेती करने वाले किसान इस समय हो रही वर्षा को अपनी मुख्य खरीफ की फसल के लिए बेहद मुफीद और किसी संजीवनी से कम नहीं बता रहे हैं। कपकोट के बिचला दानपुर क्षेत्र के शामा और रातिरकेटी में कीवी की खेती को आधुनिक तरीके से करने के लिए काश्तकारों ने लाखों की लागत से सुरक्षा जालियां लगाई थीं। शनिवार को गिरे भारी और बड़े आकार के ओलों के वेग को ये अत्याधुनिक जालियां भी सहन नहीं कर सकीं। जालियां फटने से ओले सीधे फलों और पौधों की नाजुक टहनियों पर गिरे, जिससे फल टूटकर जमीन पर बिछ गए। बागवानों के अनुसार, पौधों को पहुंची इस क्षति का असर आगामी सीजन की फसल पर भी देखने को मिल सकता है। संवाद
बेमौसम ओलावृष्टि और तेज बारिश का खेती-किसानी पर मिला-जुला असर देखने को मिल रहा है। अचानक गिरे ओलों के कारण घाटी क्षेत्र में काश्तकारों की फल, नकदी सब्जी और बेल वाली फसलों लौकी, तोरई, कद्दू आदि को काफी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसान चिंतित हैं। पारंपरिक अनाज की खेती करने वाले किसान इस समय हो रही वर्षा को अपनी मुख्य खरीफ की फसल के लिए बेहद मुफीद और किसी संजीवनी से कम नहीं बता रहे हैं। कपकोट के बिचला दानपुर क्षेत्र के शामा और रातिरकेटी में कीवी की खेती को आधुनिक तरीके से करने के लिए काश्तकारों ने लाखों की लागत से सुरक्षा जालियां लगाई थीं। शनिवार को गिरे भारी और बड़े आकार के ओलों के वेग को ये अत्याधुनिक जालियां भी सहन नहीं कर सकीं। जालियां फटने से ओले सीधे फलों और पौधों की नाजुक टहनियों पर गिरे, जिससे फल टूटकर जमीन पर बिछ गए। बागवानों के अनुसार, पौधों को पहुंची इस क्षति का असर आगामी सीजन की फसल पर भी देखने को मिल सकता है। संवाद
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