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Bageshwar News: निजी स्कूलों में 70 की एनसीईआरटी की जगह 375 की किताब का फरमान
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sun, 05 Apr 2026 11:14 PM IST
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बागेश्वर। निजी स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों की जेब पर डाका डालने का खेल शुरू हो गया है। एनसीईआरटी की सस्ती और मानक किताबों को दरकिनार कर स्कूल प्रबंधन निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जो किताब सरकारी दरों पर 70 से 90 रुपये की है उसी विषय की निजी प्रकाशक की किताब के लिए अभिभावकों को 375 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
जिले में कक्षा आठ की एनसीईआरटी की एक किताब की औसतन कीमत 70 से 90 रुपये के बीच है। वहीं, निजी स्कूलों ने जो सूची थमाई है उसमें शामिल निजी प्रकाशक की उसी स्तर की किताब का मूल्य 375 रुपये अंकित है। यह अंतर चार गुना से भी अधिक है। एक बच्चे के पूरे सेट की बात करें तो अभिभावकों को हजारों रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। कमीशन के चक्कर में स्कूल प्रबंधन इन महंगी किताबों को अनिवार्य बताकर बेच रहे हैं।
जिले के कई स्कूलों ने केवल एक या दो विषयों की किताबें ही एनसीईआरटी की रखी हैं ताकि कागजों में नियमों का पालन दिख सके। बाकी सभी मुख्य विषयों के लिए निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों का बोझ बच्चों के बस्ते में डाल दिया गया है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रशासन और चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं की जुगलबंदी से उन्हें मजबूरन ऊंची दरों पर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।
सेट के नाम पर लूट, एक किताब देने से विक्रेताओं का इनकार
किताब विक्रेताओं और स्कूल प्रबंधकों की जुगलबंदी का खामियाजा अभिभावक भुगत रहे हैं। अभिभावक जब एक विशेष किताब खरीदने के लिए पुस्तक विक्रेताओं के पास पहुंच रहे हैं तो उन्हें देने से साफ मना किया जा रहा है। विक्रेता पूरा सेट लेने का दबाव बना रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इस कारण मजबूर अभिभावक जैसे-तैसे भारी-भरकम राशि देकर सेट खरीद रहे हैं। कई स्कूलों ने तो ड्रेस और कॉपियों के लिए भी चुनिंदा दुकानें निर्धारित कर दी हैं जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है और लूट मची है।
........कोट
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों की अनदेखी और अभिभावकों पर विशिष्ट दुकानों से सामग्री खरीदने का दबाव बनाना नियमों के विरुद्ध है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी बीईओ को अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं भी अनियमितता या मनमानी पाई गई तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- विनय कुमार, सीईओ, बागेश्वर
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जिले में कक्षा आठ की एनसीईआरटी की एक किताब की औसतन कीमत 70 से 90 रुपये के बीच है। वहीं, निजी स्कूलों ने जो सूची थमाई है उसमें शामिल निजी प्रकाशक की उसी स्तर की किताब का मूल्य 375 रुपये अंकित है। यह अंतर चार गुना से भी अधिक है। एक बच्चे के पूरे सेट की बात करें तो अभिभावकों को हजारों रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। कमीशन के चक्कर में स्कूल प्रबंधन इन महंगी किताबों को अनिवार्य बताकर बेच रहे हैं।
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जिले के कई स्कूलों ने केवल एक या दो विषयों की किताबें ही एनसीईआरटी की रखी हैं ताकि कागजों में नियमों का पालन दिख सके। बाकी सभी मुख्य विषयों के लिए निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों का बोझ बच्चों के बस्ते में डाल दिया गया है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रशासन और चुनिंदा पुस्तक विक्रेताओं की जुगलबंदी से उन्हें मजबूरन ऊंची दरों पर किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।
सेट के नाम पर लूट, एक किताब देने से विक्रेताओं का इनकार
किताब विक्रेताओं और स्कूल प्रबंधकों की जुगलबंदी का खामियाजा अभिभावक भुगत रहे हैं। अभिभावक जब एक विशेष किताब खरीदने के लिए पुस्तक विक्रेताओं के पास पहुंच रहे हैं तो उन्हें देने से साफ मना किया जा रहा है। विक्रेता पूरा सेट लेने का दबाव बना रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो इस कारण मजबूर अभिभावक जैसे-तैसे भारी-भरकम राशि देकर सेट खरीद रहे हैं। कई स्कूलों ने तो ड्रेस और कॉपियों के लिए भी चुनिंदा दुकानें निर्धारित कर दी हैं जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई है और लूट मची है।
........कोट
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों की अनदेखी और अभिभावकों पर विशिष्ट दुकानों से सामग्री खरीदने का दबाव बनाना नियमों के विरुद्ध है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी बीईओ को अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं भी अनियमितता या मनमानी पाई गई तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- विनय कुमार, सीईओ, बागेश्वर