{"_id":"69e5170bb03860c87e0c8a61","slug":"seven-and-a-half-years-one-trolley-and-endless-waiting-when-will-the-bhakuna-nachani-suspension-bridge-be-built-over-the-ramganga-bageshwar-news-c-231-1-shld1005-124162-2026-04-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bageshwar News: साढ़े सात साल, एक ट्रॉली और अंतहीन इंतजार, रामगंगा पर कब बनेगा भकूना-नाचनी झूला पुल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bageshwar News: साढ़े सात साल, एक ट्रॉली और अंतहीन इंतजार, रामगंगा पर कब बनेगा भकूना-नाचनी झूला पुल
विज्ञापन
विज्ञापन
कपकोट (बागेश्वर)। विकास के दावों और आधुनिक उत्तराखंड की तस्वीर के बीच कपकोट विधानसभा का सीमांत क्षेत्र आज भी आदिम युग जैसी लाचारी झेल रहा है। साल 2018 की वो तारीख आज भी भकूना और आसपास के ग्रामीणों के जेहन में एक काले साये की तरह दर्ज है, जब उफनती रामगंगा ने उनके सपनों और संपर्क की डोर यानी झूला पुल को बहा दिया था। तब से लेकर आज तक, साढे सात साल बीत चुके हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की फाइलें पुल की बुनियाद तक नहीं पहुंच सकी हैं।
पुल बहने के बाद पीडब्ल्यूडी ने नदी पार करने के लिए एक ट्रॉली लगाई है, जो आज इन गांवों की लाइफलाइन कम और फांस ज्यादा बन गई है। स्कूली बच्चे हों, बुजुर्ग हों या गर्भवती महिलाएं, हर किसी को इसी ट्रॉली के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। ट्रॉली की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इसे चलाने के लिए दूसरे छोर पर किसी का होना जरूरी है जो रस्सी खींच सके। अकेला व्यक्ति इसका उपयोग नहीं कर सकता।
लोहे की ठंडी और खुरदरी रस्सी खींचने के कारण कई मासूम बच्चों और ग्रामीणों के हाथ लहूलुहान हो चुके हैं। ट्रॉली में रोजमर्रा का राशन और जानवरों के लिए चारा तक ढोया जाता है। जरा सी चूक गहरी खाई और उफनती नदी में समाने का निमंत्रण देती है।
.....इनसेट
नाचनी पर निर्भरता, पर राह में रामगंगा
भकूना, कालापैर कापड़ी, पालनाधूरा, चेटाबगड़, खेती और किसमिला जैसे गांवों का भूगोल बागेश्वर में है, लेकिन उनकी धड़कनें पिथौरागढ़ के नाचनी बाजार में बसती हैं। बैंक, बाजार, बच्चों के स्कूल, सब कुछ नदी के उस पार है। पुल न होने से इन गांवों का संपर्क अपने ही ब्लॉक और जिला मुख्यालय से लगभग कटा हुआ है। जनवरी 2024 में केदारेश्वर मैदान से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पुल के पुनर्निर्माण की घोषणा कर उम्मीद जगाई थी। लेकिन घोषणा के दो साल बाद भी धरातल पर एक ईंट तक नहीं लग सकी है। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक, इस सीमांत की पीड़ा पर सबकी चुप्पी ग्रामीणों के घावों पर नमक छिड़कने जैसी है।
...... कोट
वर्ल्ड बैंक की ओर से इस पुल का चयन किया जा चुका है और वर्तमान में जियोटेक्निकल इंवेस्टिगेशन का कार्य गतिमान है। मिट्टी और चट्टानों के परीक्षण के बाद सुरक्षित डिजाइन तैयार किया जाएगा। हमारा लक्ष्य जून से पहले डीपीआर तैयार कर वर्ल्ड बैंक को भेजना है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
......संजय कुमार पांडेय, ईई, लोनिवि, बागेश्वर
Trending Videos
पुल बहने के बाद पीडब्ल्यूडी ने नदी पार करने के लिए एक ट्रॉली लगाई है, जो आज इन गांवों की लाइफलाइन कम और फांस ज्यादा बन गई है। स्कूली बच्चे हों, बुजुर्ग हों या गर्भवती महिलाएं, हर किसी को इसी ट्रॉली के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। ट्रॉली की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इसे चलाने के लिए दूसरे छोर पर किसी का होना जरूरी है जो रस्सी खींच सके। अकेला व्यक्ति इसका उपयोग नहीं कर सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
लोहे की ठंडी और खुरदरी रस्सी खींचने के कारण कई मासूम बच्चों और ग्रामीणों के हाथ लहूलुहान हो चुके हैं। ट्रॉली में रोजमर्रा का राशन और जानवरों के लिए चारा तक ढोया जाता है। जरा सी चूक गहरी खाई और उफनती नदी में समाने का निमंत्रण देती है।
.....इनसेट
नाचनी पर निर्भरता, पर राह में रामगंगा
भकूना, कालापैर कापड़ी, पालनाधूरा, चेटाबगड़, खेती और किसमिला जैसे गांवों का भूगोल बागेश्वर में है, लेकिन उनकी धड़कनें पिथौरागढ़ के नाचनी बाजार में बसती हैं। बैंक, बाजार, बच्चों के स्कूल, सब कुछ नदी के उस पार है। पुल न होने से इन गांवों का संपर्क अपने ही ब्लॉक और जिला मुख्यालय से लगभग कटा हुआ है। जनवरी 2024 में केदारेश्वर मैदान से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पुल के पुनर्निर्माण की घोषणा कर उम्मीद जगाई थी। लेकिन घोषणा के दो साल बाद भी धरातल पर एक ईंट तक नहीं लग सकी है। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक, इस सीमांत की पीड़ा पर सबकी चुप्पी ग्रामीणों के घावों पर नमक छिड़कने जैसी है।
...... कोट
वर्ल्ड बैंक की ओर से इस पुल का चयन किया जा चुका है और वर्तमान में जियोटेक्निकल इंवेस्टिगेशन का कार्य गतिमान है। मिट्टी और चट्टानों के परीक्षण के बाद सुरक्षित डिजाइन तैयार किया जाएगा। हमारा लक्ष्य जून से पहले डीपीआर तैयार कर वर्ल्ड बैंक को भेजना है। स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
......संजय कुमार पांडेय, ईई, लोनिवि, बागेश्वर
