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Bageshwar News: जंगली सुअरों ने उड़ाई किसानों की नींद, फसल बचाने के लिए रात भर दे रहे पहरा
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 23 Apr 2026 11:28 PM IST
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कपकोट (बागेश्वर)। क्षेत्र के दुलम गांव में अंधेरा होते ही जंगली सुअरों का उत्पात इस कदर बढ़ रहा है कि ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। कभी सूखे की मार तो कभी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेलने के बाद जो फसल बची थी उसे अब सुअरों का झुंड पूरी तरह चौपट कर रहा है। इससे काश्तकारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीण महिपाल कोरंगा ने बताया कि गांव के लोगों की आजीविका का मुख्य सहारा खेती-पाती ही है। वर्तमान में उद्यान और कृषि विभाग के सहयोग से यहां स्ट्रॉबेरी समेत विभिन्न फल और सब्जियों की खेती की जा रही है। गेहूं की फसल भी पक कर पूरी तरह तैयार है। किसान साल भर की अपनी मेहनत को समेटने की तैयारी में थे लेकिन सुअरों का झुंड उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रहा है। किसान दिन भर बंदरों को भगाने में जुटे रहते हैं तो रात होते ही सुअरों से फसल बचाने के लिए खेतों की मेड़ों पर पहरा देना पड़ रहा है। महिलाएं और पुरुष रात भर जागकर कनस्तर, थाली और परात बजाकर सुअरों को भगाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो गई है।
वन विभाग की टीम को गश्त के लिए क्षेत्र में भेजा जाएगा और जंगली जानवरों को कृषि भूमि से दूर भगाने का प्रयास किया जाएगा। यदि जंगली सुअर लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शासन की ओर से उन्हें मारने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके लिए काश्तकार लिखित प्रार्थना पत्र देकर अनुमति ले सकते हैं। इसके लिए गांव में किसी ग्रामीण के पास लाइसेंस युक्त बंदूक होना अनिवार्य है। -आरसी जोशी, रेंजर, कपकोट
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ग्रामीण महिपाल कोरंगा ने बताया कि गांव के लोगों की आजीविका का मुख्य सहारा खेती-पाती ही है। वर्तमान में उद्यान और कृषि विभाग के सहयोग से यहां स्ट्रॉबेरी समेत विभिन्न फल और सब्जियों की खेती की जा रही है। गेहूं की फसल भी पक कर पूरी तरह तैयार है। किसान साल भर की अपनी मेहनत को समेटने की तैयारी में थे लेकिन सुअरों का झुंड उनकी उम्मीदों पर पानी फेर रहा है। किसान दिन भर बंदरों को भगाने में जुटे रहते हैं तो रात होते ही सुअरों से फसल बचाने के लिए खेतों की मेड़ों पर पहरा देना पड़ रहा है। महिलाएं और पुरुष रात भर जागकर कनस्तर, थाली और परात बजाकर सुअरों को भगाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो गई है।
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वन विभाग की टीम को गश्त के लिए क्षेत्र में भेजा जाएगा और जंगली जानवरों को कृषि भूमि से दूर भगाने का प्रयास किया जाएगा। यदि जंगली सुअर लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं तो शासन की ओर से उन्हें मारने के आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। इसके लिए काश्तकार लिखित प्रार्थना पत्र देकर अनुमति ले सकते हैं। इसके लिए गांव में किसी ग्रामीण के पास लाइसेंस युक्त बंदूक होना अनिवार्य है। -आरसी जोशी, रेंजर, कपकोट

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