बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा हेराफेरी: अनुभवहीन को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर भी उठ रहे सवाल, कभी नहीं दी थी सेवा
बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे में हेराफेरी के मामले कई सवाल उठ रहे हैं। आरोपी प्रमोद नौटियाल की वर्ष 2003 में कॉर्डिनेटर के पद पर अस्थायी नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2014 में उसे स्थायी कर्मचारी और बाद में बीकेटीसी अध्यक्ष के व्यक्तिगत सहायक (पीए) के रूप में नियुक्त किया गया।
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बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे में हेराफेरी के मामले में आरोपी प्रमोद नौटियाल की बदरीनाथ में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने पर अब सवाल उठने लगे हैं। चर्चा इस बात की है कि जिसने बदरीनाथ मंदिर में प्रत्यक्ष रूप से कार्य नहीं किया, उसे अचानक थाली भेंट (दान चढ़ावा) की गणना और प्रोटोकॉल जैसे कार्यों की जिम्मेदारी कैसे सौंप दी गई।
जानकारी के अनुसार, प्रमोद नौटियाल की वर्ष 2003 में कॉर्डिनेटर के पद पर अस्थायी नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2014 में उसे स्थायी कर्मचारी और बाद में बीकेटीसी अध्यक्ष के व्यक्तिगत सहायक (पीए) के रूप में नियुक्त किया गया।
तब से वह देहरादून स्थित बीकेटीसी कार्यालय में सेवाएं देता था लेकिन इस वर्ष यात्रा शुरू होने से पहले उसकी तैनाती बदरीनाथ मंदिर में कर दी गई और थाली भेंट की गणना के साथ प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई।
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मंदिर में वीआईपी दर्शन की पर्चियां जारी करने का कार्य भी वही देख रहा था। इस मामले में जब बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।