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Haridwar News: विश्व के 37 देशों के 134 सदस्य पहुंचे देव संस्कृति विश्वविद्यालय
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Mon, 16 Mar 2026 08:26 PM IST
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- परिसर भ्रमण के दौरान योग-यज्ञ आधारित शोध कार्यों की जानकारी ली
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में सोमवार को 37 देशों के 134 सदस्यों का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल शैक्षणिक भ्रमण के लिए पहुंचा। इसमें 124 युवा प्रतिभागियों के साथ विभिन्न देशों के प्रोफेसर और शिक्षाविद शामिल थे। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधि मंडल ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक नवाचार, अनुसंधान कार्यों और आध्यात्मिक वातावरण को देखा। इसके साथ ही उन्होंने योग, यज्ञ आधारित शोध कार्यों के बारे में भी जाना। विवि प्रशासन के अनुसार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का भारत सहित 20 से अधिक देशों के 100 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग और अनुबंध हैं। इन अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संबंधों को मजबूत बनाने में विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या निरंतर गोष्ठियों के साथ संपर्क स्थापित कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी, कनाडा, सीरिया, यूक्रेन, उज़्बेकिस्तान, जापान, रोमानिया, ईरान सहित अन्य देशों के प्रतिभागी शामिल थे। उन्हें भ्रमण के दौरान स्वावलंबन प्रकल्प, एशिया के प्रथम बाल्टिक सेंटर, सृजना, योग केंद्र व अन्य शोध इकाइयों के बारे में जानकारी दी गई। डॉ. चिन्मय पंड्या ने युवाओं को भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक अध्यात्म, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टि के महत्व के बारे में बताया।
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हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में सोमवार को 37 देशों के 134 सदस्यों का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल शैक्षणिक भ्रमण के लिए पहुंचा। इसमें 124 युवा प्रतिभागियों के साथ विभिन्न देशों के प्रोफेसर और शिक्षाविद शामिल थे। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधि मंडल ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक नवाचार, अनुसंधान कार्यों और आध्यात्मिक वातावरण को देखा। इसके साथ ही उन्होंने योग, यज्ञ आधारित शोध कार्यों के बारे में भी जाना। विवि प्रशासन के अनुसार देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का भारत सहित 20 से अधिक देशों के 100 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग और अनुबंध हैं। इन अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संबंधों को मजबूत बनाने में विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या निरंतर गोष्ठियों के साथ संपर्क स्थापित कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी, कनाडा, सीरिया, यूक्रेन, उज़्बेकिस्तान, जापान, रोमानिया, ईरान सहित अन्य देशों के प्रतिभागी शामिल थे। उन्हें भ्रमण के दौरान स्वावलंबन प्रकल्प, एशिया के प्रथम बाल्टिक सेंटर, सृजना, योग केंद्र व अन्य शोध इकाइयों के बारे में जानकारी दी गई। डॉ. चिन्मय पंड्या ने युवाओं को भारतीय संस्कृति, वैज्ञानिक अध्यात्म, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक जीवन दृष्टि के महत्व के बारे में बताया।