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Haridwar News: चेक बाउंस में आरोपी को 3 माह की सजा, 1.40 लाख जुर्माना
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रोशनाबाद। चतुर्थ अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 1.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने में से 1.35 लाख शिकायतकर्ता को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे, जबकि शेष पांच हजार रुपये राजकोष में जमा कराए जाएंगे।
अभियोजन के मुताबिक, शिकायतकर्ता बादल अरोड़ा पुत्र अर्जुन देव अरोड़ा निवासी रामनगर कॉलोनी, हरिद्वार ने अदालत में परिवाद दायर कर बताया था कि आरोपी नईम हुसैन उर्फ गुड्डू निवासी मोहल्ला कैतवाड़ा ज्वालापुर ने जनवरी 2020 में अपनी निजी जरूरतों के लिए उससे 1,35,000 रुपये उधार लिए थे। उधार की रकम लौटाने के लिए आरोपी ने बैंक ऑफ वडोदरा, ज्वालापुर शाखा का एक चेक दिया था। जब शिकायतकर्ता ने चेक को बैंक में प्रस्तुत किया तो वह अकाउंट ब्लॉक होने के कारण बाउंस हो गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि उसने केवल 15 हजार रुपये उधार लिए थे और सुरक्षा के तौर पर खाली हस्ताक्षरित चेक दिया था। हालांकि बचाव पक्ष के गवाह ने जिरह में स्वीकार किया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से धनराशि ली थी और उसी के बदले चेक दिया गया था। अदालत ने पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की है, लेकिन वह यह साबित नहीं कर सका कि उसने पूरी रकम चुका दी है। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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अभियोजन के मुताबिक, शिकायतकर्ता बादल अरोड़ा पुत्र अर्जुन देव अरोड़ा निवासी रामनगर कॉलोनी, हरिद्वार ने अदालत में परिवाद दायर कर बताया था कि आरोपी नईम हुसैन उर्फ गुड्डू निवासी मोहल्ला कैतवाड़ा ज्वालापुर ने जनवरी 2020 में अपनी निजी जरूरतों के लिए उससे 1,35,000 रुपये उधार लिए थे। उधार की रकम लौटाने के लिए आरोपी ने बैंक ऑफ वडोदरा, ज्वालापुर शाखा का एक चेक दिया था। जब शिकायतकर्ता ने चेक को बैंक में प्रस्तुत किया तो वह अकाउंट ब्लॉक होने के कारण बाउंस हो गया।
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सुनवाई के दौरान आरोपी ने दलील दी कि उसने केवल 15 हजार रुपये उधार लिए थे और सुरक्षा के तौर पर खाली हस्ताक्षरित चेक दिया था। हालांकि बचाव पक्ष के गवाह ने जिरह में स्वीकार किया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से धनराशि ली थी और उसी के बदले चेक दिया गया था। अदालत ने पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर होने की बात स्वीकार की है, लेकिन वह यह साबित नहीं कर सका कि उसने पूरी रकम चुका दी है। साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

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