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Haridwar News: वैकल्पिक और प्राकृतिक चिकित्सा कार्यशाला का समापन
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बहादराबाद। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित सात दिवसीय वैकल्पिक और प्राकृतिक चिकित्सा कार्यशाला का समापन हुआ। 27 अप्रैल से 04 मई तक चली कार्यशाला में विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ हिमाचल विश्वविद्यालय, शिमला और हरिद्वार विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
कार्यशाला के संयोजक व योग विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी ने बताया कि सात दिनों के इस आयोजन में प्राकृतिक चिकित्सा, पंचकर्म, योग चिकित्सा, आहार चिकित्सा, जल चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, प्राणायाम और ध्यान जैसी विभिन्न विधाओं पर विशेषज्ञों की ओर से व्याख्यान व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडेय ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग व प्राकृतिक चिकित्सा की प्रासंगिकता अत्यधिक बढ़ गई है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए योग एक सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय की ओर इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस मौके पर गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, डॉ.अर्पिता जोशी,डॉ. अर्पिता जोशी,राजेंद्र नौटियाल, क्रीड़ाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, डॉ. मोहित कुमार, शोधार्थी दिशांत शर्मा, गौरीसंजय आदि मौजूद रहे।
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कार्यशाला के संयोजक व योग विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी ने बताया कि सात दिनों के इस आयोजन में प्राकृतिक चिकित्सा, पंचकर्म, योग चिकित्सा, आहार चिकित्सा, जल चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, प्राणायाम और ध्यान जैसी विभिन्न विधाओं पर विशेषज्ञों की ओर से व्याख्यान व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
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समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकांत पांडेय ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग व प्राकृतिक चिकित्सा की प्रासंगिकता अत्यधिक बढ़ गई है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए योग एक सशक्त माध्यम है। विश्वविद्यालय की ओर इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस मौके पर गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम, डॉ.अर्पिता जोशी,डॉ. अर्पिता जोशी,राजेंद्र नौटियाल, क्रीड़ाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, डॉ. मोहित कुमार, शोधार्थी दिशांत शर्मा, गौरीसंजय आदि मौजूद रहे।