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हरिद्वार कुंभ : गंग नहर में बढ़ता प्रदूषण बना जलीय जीवों के लिए खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
Updated Wed, 13 May 2026 07:16 PM IST
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- गंगा संरक्षण के प्रति बरती जा रही लापरवाही उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की रिपोर्ट में उजागर
- गंगा में लगातार गिरते नाले और शहर के सीवरेज से जल की गुणवत्ता हो रही है प्रभावित
- सिंचाई विभाग की रिपोर्ट में ऑक्सीजन स्तर तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे
बहादराबाद से रुड़की तक 10 से अधिक नाले सीधे नहर में गिर रहे
कृष्णकांत मणि त्रिपाठी / डॉ. हर्ष सैनी
धनौरी। एक अर्धकुंभ को दिव्य और भव्य कुंभ के रूप में आयोजित किए जाने के लिए तमाम तैयारियां की जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के हालिया परीक्षण में जो रिपोर्ट सामने आई है वह चिंताजनक है। रिपोर्ट में सामने आया है कि गंग नहर में लगातार गिर रहे गंदे नालों के कारण जल में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से घट रही है।
जांच में पाया गया कि नहर के पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगभग तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से भी कम रह गया है जबकि जलीय जीवों के संरक्षण के लिए यह कम से कम पांच मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। इस गंभीर स्थिति के चलते नहर में रहने वाले जलीय जीवों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। नीलधारा से नहर में पानी आने के बाद से ही प्रदूषित हो रहा है। इसमें मौजूदा समय में स्पष्ट देखा जा रहा है कि नए घाटों के निर्माण के दौरान नहर का जो किनारा काटकर फाउंडेशन बनाया जा रहा है वहीं पर मोटे-मोटे पाइप से गंदगी गंगा में गिराई जा रही है। यही नहीं स्वयं उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की कॉलोनी नगर निगम क्षेत्र में ही आवासों से गंदगी गिराने के लिए पाइप गंगा में डाले गए हैं। यह दृश्य उस समय भी देखा गया जब गंग नहर की वार्षिक बंदी होती है। गंगा की धारा बंद किए जाने के बाद भी गंदगी बहती देखी जाती है। यह हाल तो शहर का है यहां से आगे बढ़ने पर ज्वालापुर के कस्साबान से निकलने वाले नाले भी गंगा में गिर रहे हैं। गंगा को प्रदूषण से बचाने वाले विभाग एसटीपी से गंदगी साफ करने का केवल दावा कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बहादराबाद से रुड़की तक 10 से अधिक गंदे नाले सीधे गंग नहर में गिर रहे हैं जिससे जल लगातार प्रदूषित हो रहा है।
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विशेषज्ञों का दावा सिडकुल स्थापना के बाद घटती गई गुणवत्ता
सिंचाई विशेषज्ञों के अनुसार, हरिद्वार में सिडकुल की स्थापना के बाद से नहर का प्रदूषण लगातार बढ़ा है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बहादराबाद क्षेत्र के आसपास स्थित कुछ नालों से सिडकुल की फैक्टरियों का दूषित पानी भी नहर में छोड़ा जा रहा है। इसके कारण नहर के पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार घट रहा है।
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प्रदूषण के स्रोत शहर और गांव दोनों बराबर जिम्मेदार
नहर में प्रदूषण का मुख्य कारण शहर की गंदगी सीधे गंगा में गिरने और बहादराबाद से रुड़की तक 10 से अधिक गंदे नालों का सीधा गंगा में जाना है। इन नालों से निकलने वाला दूषित जल नहर के पानी को जहरीला बना रहा है। सिंचाई विशेषज्ञों ने हरिद्वार में सिडकुल की स्थापना के बाद से प्रदूषण में वृद्धि दर्ज की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सिडकुल की फैक्टरियों का दूषित पानी भी कुछ नालों के माध्यम से नहर में छोड़ा जा रहा है जिससे जलीय पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
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पत्र लिखने पर भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
सिंचाई विभाग ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस संबंध में पहले ही पत्र लिखा था लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम, नगर पालिका और अन्य स्थानीय निकाय भी इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं। वहीं, सिंचाई विभाग के एसडीओ अनुज बंसल ने कहा कि गंगा के प्रदूषित होने से मछलियों, मेंढकों और अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निकाय इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन बने हुए हैं।
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बोले जिम्मेदार :
जिम्मेदार विभाग और अधिकारियों की उदासीनता चिंताजनक है। इस विषय में उच्च स्तर पर वार्ता की जाएगी। अगर जल्द ठोस योजना नहीं बनीं तो गंगा की शुद्धता की स्थिति और गंभीर होगी।
अनुज बंसल, एसडीओ उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग
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गंग नहर में गिरने वाले नालों की एक रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीवर की शिकायत पूर्व में भी मिली है।
दयानंद सरस्वती, अपर मेलाधिकारी
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- सिंचाई विभाग की रिपोर्ट में ऑक्सीजन स्तर तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे
बहादराबाद से रुड़की तक 10 से अधिक नाले सीधे नहर में गिर रहे
कृष्णकांत मणि त्रिपाठी / डॉ. हर्ष सैनी
धनौरी। एक अर्धकुंभ को दिव्य और भव्य कुंभ के रूप में आयोजित किए जाने के लिए तमाम तैयारियां की जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के हालिया परीक्षण में जो रिपोर्ट सामने आई है वह चिंताजनक है। रिपोर्ट में सामने आया है कि गंग नहर में लगातार गिर रहे गंदे नालों के कारण जल में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से घट रही है।
जांच में पाया गया कि नहर के पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगभग तीन मिलीग्राम प्रति लीटर से भी कम रह गया है जबकि जलीय जीवों के संरक्षण के लिए यह कम से कम पांच मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। इस गंभीर स्थिति के चलते नहर में रहने वाले जलीय जीवों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है। नीलधारा से नहर में पानी आने के बाद से ही प्रदूषित हो रहा है। इसमें मौजूदा समय में स्पष्ट देखा जा रहा है कि नए घाटों के निर्माण के दौरान नहर का जो किनारा काटकर फाउंडेशन बनाया जा रहा है वहीं पर मोटे-मोटे पाइप से गंदगी गंगा में गिराई जा रही है। यही नहीं स्वयं उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की कॉलोनी नगर निगम क्षेत्र में ही आवासों से गंदगी गिराने के लिए पाइप गंगा में डाले गए हैं। यह दृश्य उस समय भी देखा गया जब गंग नहर की वार्षिक बंदी होती है। गंगा की धारा बंद किए जाने के बाद भी गंदगी बहती देखी जाती है। यह हाल तो शहर का है यहां से आगे बढ़ने पर ज्वालापुर के कस्साबान से निकलने वाले नाले भी गंगा में गिर रहे हैं। गंगा को प्रदूषण से बचाने वाले विभाग एसटीपी से गंदगी साफ करने का केवल दावा कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बहादराबाद से रुड़की तक 10 से अधिक गंदे नाले सीधे गंग नहर में गिर रहे हैं जिससे जल लगातार प्रदूषित हो रहा है।
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विशेषज्ञों का दावा सिडकुल स्थापना के बाद घटती गई गुणवत्ता
सिंचाई विशेषज्ञों के अनुसार, हरिद्वार में सिडकुल की स्थापना के बाद से नहर का प्रदूषण लगातार बढ़ा है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बहादराबाद क्षेत्र के आसपास स्थित कुछ नालों से सिडकुल की फैक्टरियों का दूषित पानी भी नहर में छोड़ा जा रहा है। इसके कारण नहर के पानी में ऑक्सीजन का स्तर लगातार घट रहा है।
प्रदूषण के स्रोत शहर और गांव दोनों बराबर जिम्मेदार
नहर में प्रदूषण का मुख्य कारण शहर की गंदगी सीधे गंगा में गिरने और बहादराबाद से रुड़की तक 10 से अधिक गंदे नालों का सीधा गंगा में जाना है। इन नालों से निकलने वाला दूषित जल नहर के पानी को जहरीला बना रहा है। सिंचाई विशेषज्ञों ने हरिद्वार में सिडकुल की स्थापना के बाद से प्रदूषण में वृद्धि दर्ज की है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सिडकुल की फैक्टरियों का दूषित पानी भी कुछ नालों के माध्यम से नहर में छोड़ा जा रहा है जिससे जलीय पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
पत्र लिखने पर भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
सिंचाई विभाग ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस संबंध में पहले ही पत्र लिखा था लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम, नगर पालिका और अन्य स्थानीय निकाय भी इस समस्या के समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठा रहे हैं। वहीं, सिंचाई विभाग के एसडीओ अनुज बंसल ने कहा कि गंगा के प्रदूषित होने से मछलियों, मेंढकों और अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निकाय इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन बने हुए हैं।
बोले जिम्मेदार :
जिम्मेदार विभाग और अधिकारियों की उदासीनता चिंताजनक है। इस विषय में उच्च स्तर पर वार्ता की जाएगी। अगर जल्द ठोस योजना नहीं बनीं तो गंगा की शुद्धता की स्थिति और गंभीर होगी।
अनुज बंसल, एसडीओ उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग
गंग नहर में गिरने वाले नालों की एक रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीवर की शिकायत पूर्व में भी मिली है।
दयानंद सरस्वती, अपर मेलाधिकारी