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Kotdwar News: बेस अस्पताल के अस्थि विभाग पर लटका ताला, भटक रहे मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sat, 28 Feb 2026 04:44 PM IST
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एक महीने बाद अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड में हो जाएगी गायनीकोलॉजिस्ट की कमी
कोटद्वार। राजकीय बेस अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से होने वाली मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। अनुबंध की अवधि पूर्ण होने और अभी विशेषज्ञ चिकित्सकों का नवीनीकरण नहीं होने से अस्पताल के अस्थि विभाग पर ताला लटक गया है। वहीं, एक गायनीकोलॉजिस्ट के सेवानिवृत्त होने के बाद अस्पताल के जच्चा वार्ड भी प्रभावित हो सकता है।
राजकीय बेस अस्पताल में दो अस्थि सर्जन की तैनाती होने, अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा मिलने के कारण कोटद्वार के साथ5साथ उच्च पर्वतीय क्षेत्रों के अलावा यूपी के जनपद बिजनौर से हड्डियों के कई मरीज एवं दुर्घटनाओं में घायल हुए लोग उपचार के लिए बेस अस्पताल पहुंचते हैं। फिलहाल एक मार्च से दोनों अस्थि सर्जन की ओपीडी पर ताला लटका नजर आएगा।
दरअसल अस्थि सर्जन डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. वीसी काला की 28 फरवरी को अनुबंध की अवधि समाप्त हो गई है। सर्जनों के नवीनीकरण के संबंध में स्वास्थ्य निदेशालय के अग्रिम आदेशों तक फिलहाल ओपीडी बंद रहेगी। हड्डियों की समस्या से जुड़े मरीजों एवं हादसों में घायल लोगों को उपचार के लिए भटकना पड़ेगा। शनिवार को ही दोनों ओपीडी बंद होने पर मरीज परेशान होकर लौटे।
वहीं, अस्पताल के जच्चा-बच्चा केंद्र से वरिष्ठ गायनीकोलॉजिस्ट डॉ. भावना अग्रवाल 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो जाएगी। उनके बाद एकमात्र गायनीकोलॉजिस्ट डॉ. संगीता नेगी के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी होगी। वहीं, अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड पहले ही मेडिकल अफसरों की कमी से जूझ रहा है। पांच में से एक चिकित्सक कार्यमुक्त हो रहे हैं। एक चिकित्सक की कार्यावधि समाप्त होने के चलते नवीनीकरण प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल तीन मेडिकल अफसरों पर ही आपातकालीन चिकित्सीय सेवाओं का दारोमदार है।
अस्थि सर्जनों के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यालय से आदेश मिलते ही ओपीडी खुल जाएगी। गायनीकोलॉजिस्ट की तैनाती के संबंध में मुख्यालय से पत्राचार किया गया है। साथ ही मेडिकल अफसरों की कमी से अवगत कराया गया है। -डॉ. विजय सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, बेस अस्पताल कोटद्वार।
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कोटद्वार। राजकीय बेस अस्पताल में चिकित्सकों की कमी से होने वाली मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। अनुबंध की अवधि पूर्ण होने और अभी विशेषज्ञ चिकित्सकों का नवीनीकरण नहीं होने से अस्पताल के अस्थि विभाग पर ताला लटक गया है। वहीं, एक गायनीकोलॉजिस्ट के सेवानिवृत्त होने के बाद अस्पताल के जच्चा वार्ड भी प्रभावित हो सकता है।
राजकीय बेस अस्पताल में दो अस्थि सर्जन की तैनाती होने, अस्पताल में ऑपरेशन की सुविधा मिलने के कारण कोटद्वार के साथ5साथ उच्च पर्वतीय क्षेत्रों के अलावा यूपी के जनपद बिजनौर से हड्डियों के कई मरीज एवं दुर्घटनाओं में घायल हुए लोग उपचार के लिए बेस अस्पताल पहुंचते हैं। फिलहाल एक मार्च से दोनों अस्थि सर्जन की ओपीडी पर ताला लटका नजर आएगा।
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दरअसल अस्थि सर्जन डॉ. अभिषेक जैन, डॉ. वीसी काला की 28 फरवरी को अनुबंध की अवधि समाप्त हो गई है। सर्जनों के नवीनीकरण के संबंध में स्वास्थ्य निदेशालय के अग्रिम आदेशों तक फिलहाल ओपीडी बंद रहेगी। हड्डियों की समस्या से जुड़े मरीजों एवं हादसों में घायल लोगों को उपचार के लिए भटकना पड़ेगा। शनिवार को ही दोनों ओपीडी बंद होने पर मरीज परेशान होकर लौटे।
वहीं, अस्पताल के जच्चा-बच्चा केंद्र से वरिष्ठ गायनीकोलॉजिस्ट डॉ. भावना अग्रवाल 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो जाएगी। उनके बाद एकमात्र गायनीकोलॉजिस्ट डॉ. संगीता नेगी के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी होगी। वहीं, अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड पहले ही मेडिकल अफसरों की कमी से जूझ रहा है। पांच में से एक चिकित्सक कार्यमुक्त हो रहे हैं। एक चिकित्सक की कार्यावधि समाप्त होने के चलते नवीनीकरण प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल तीन मेडिकल अफसरों पर ही आपातकालीन चिकित्सीय सेवाओं का दारोमदार है।
अस्थि सर्जनों के नवीनीकरण की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यालय से आदेश मिलते ही ओपीडी खुल जाएगी। गायनीकोलॉजिस्ट की तैनाती के संबंध में मुख्यालय से पत्राचार किया गया है। साथ ही मेडिकल अफसरों की कमी से अवगत कराया गया है। -डॉ. विजय सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, बेस अस्पताल कोटद्वार।