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Kotdwar News: नहीं चेते तो एक दिन सभी को पीना पड़ सकता है पैकेट वाला दूध
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Fri, 06 Mar 2026 06:25 PM IST
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ओडलगांव, खैरासैंण, लवाड़, बिलखेत में पूर्व में संचालित होती थी डेयरी
गांवों से नहीं मिल पा रहा पर्याप्त दूध, दुग्ध कंपनियों पर बढ़ती जा रही निर्भरता
कोटद्वार। सतपुली में आसपास के गांवों से पर्याप्त दूध नहीं मिलने से लोगों को भटकना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त दूध की आपूर्ति नहीं होने से स्थानीय कारोबारी और अस्थायी रूप से रह रहे लोगों को बाहरी क्षेत्रों में संचालित कंपनियों के दूध के पैकेट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सतपुली पौड़ी जनपद का केंद्र बिंदु होने के साथ ही द्वारीखाल, जयहरीखाल, कल्जीखाल ब्लॉक से सटा है। चौबट्टाखाल, एकेश्वर व पोखड़ा ब्लॉक का मुख्य बाजार भी है। इसके अलावा सतपुली के पास में ही चमोलीसैंण में हंस अस्पताल भी है। दूध की खपत काफी है लेकिन कारोबारियों और अस्थायी रूप से रहने कर्मचारियों व अन्य लोगों को आसपास के गांवों से पर्याप्त दूध उपलब्ध नहीं हो पाता है।
इसका मुख्य कारण यह भी है कि जहां कर्मचारी व अस्थायी रूप से रह रहे अन्य लोग केवल कार्यालय दिवसों पर ही ग्रामीणों से दूध खरीदते हैं। वहीं दुग्ध कंपनियों के मूल्य व ग्रामीणों के दूध के मूल्य में अंतर होने के कारण कारोबारी स्थानीय लोगों से दूध खरीदने के बजाय बाहरी क्षेत्रों में संचालित दुग्ध कंपनियों के दूध के पैकेट खरीदने को मजबूर हैं।
आसपास के गांवों से पर्याप्त दूध नहीं मिलने के कारण उन्हें प्रतिदिन दूध के पैकटों से काम चलाना पड़ रहा है। होटल में प्रतिदिन 20 लीटर दूध की खपत है।
-हरीश रावत, होटल कारोबारी।
पूर्व में ओडल गांव, खैरासैंण, लवाड़, बिलखेत व बल्ली गांव में डेयरी थी। वो अब बंद हो चुकी है। गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ कोटद्वार इकाई की ओर से सतपुली व आसपास के स्कूलों में प्रतिदिन 150 लीटर दूध की सप्लाई की जा रही है।
- केपी सिंह, केंद्र प्रभारी गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ (आंचल डेयरी) कोटद्वार।
गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ कोटद्वार इकाई की ओर से संचालित आंचल डेयरी को गुमखाल व बैरगांव के ग्रामीणों की दुग्ध उत्पादक समितियों से दूध सप्लाई होता है लेकिन सतपुली व आसपास के क्षेत्र में दूध सप्लाई नहीं होता है।
ओंकार दत्त, प्रभारी उपार्जन गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ (आंचल डेयरी) कोटद्वार।
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कोटद्वार। सतपुली में आसपास के गांवों से पर्याप्त दूध नहीं मिलने से लोगों को भटकना पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त दूध की आपूर्ति नहीं होने से स्थानीय कारोबारी और अस्थायी रूप से रह रहे लोगों को बाहरी क्षेत्रों में संचालित कंपनियों के दूध के पैकेट खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सतपुली पौड़ी जनपद का केंद्र बिंदु होने के साथ ही द्वारीखाल, जयहरीखाल, कल्जीखाल ब्लॉक से सटा है। चौबट्टाखाल, एकेश्वर व पोखड़ा ब्लॉक का मुख्य बाजार भी है। इसके अलावा सतपुली के पास में ही चमोलीसैंण में हंस अस्पताल भी है। दूध की खपत काफी है लेकिन कारोबारियों और अस्थायी रूप से रहने कर्मचारियों व अन्य लोगों को आसपास के गांवों से पर्याप्त दूध उपलब्ध नहीं हो पाता है।
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इसका मुख्य कारण यह भी है कि जहां कर्मचारी व अस्थायी रूप से रह रहे अन्य लोग केवल कार्यालय दिवसों पर ही ग्रामीणों से दूध खरीदते हैं। वहीं दुग्ध कंपनियों के मूल्य व ग्रामीणों के दूध के मूल्य में अंतर होने के कारण कारोबारी स्थानीय लोगों से दूध खरीदने के बजाय बाहरी क्षेत्रों में संचालित दुग्ध कंपनियों के दूध के पैकेट खरीदने को मजबूर हैं।
आसपास के गांवों से पर्याप्त दूध नहीं मिलने के कारण उन्हें प्रतिदिन दूध के पैकटों से काम चलाना पड़ रहा है। होटल में प्रतिदिन 20 लीटर दूध की खपत है।
-हरीश रावत, होटल कारोबारी।
पूर्व में ओडल गांव, खैरासैंण, लवाड़, बिलखेत व बल्ली गांव में डेयरी थी। वो अब बंद हो चुकी है। गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ कोटद्वार इकाई की ओर से सतपुली व आसपास के स्कूलों में प्रतिदिन 150 लीटर दूध की सप्लाई की जा रही है।
- केपी सिंह, केंद्र प्रभारी गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ (आंचल डेयरी) कोटद्वार।
गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ कोटद्वार इकाई की ओर से संचालित आंचल डेयरी को गुमखाल व बैरगांव के ग्रामीणों की दुग्ध उत्पादक समितियों से दूध सप्लाई होता है लेकिन सतपुली व आसपास के क्षेत्र में दूध सप्लाई नहीं होता है।
ओंकार दत्त, प्रभारी उपार्जन गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ (आंचल डेयरी) कोटद्वार।