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Kotdwar News: लैंसडौन के जंगलों में भड़की आग, धुएं के गुबार से बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Thu, 21 May 2026 07:22 PM IST
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आग से केवल बहुमूल्य वन संपदा ही नहीं वन्यजीवों के जीवन पर भी खतरा मंडरा रहा
जयहरीखाल। भीषण गर्मी के बीच लैंसडौन वन प्रभाग के सिविल क्षेत्र बौठा गांव क्षेत्र में जंगलों में आग लग गई है। इससे दूर-दूर तक धुएं के गुबार फैल गए हैं। आग से चीड़ व मिश्रित वन संपदा को भारी नुकसान होने की आशंका है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से बढ़ती गर्मी और सूखे मौसम के कारण आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बौठा गांव के पास लगी आग धीरे-धीरे परिंदा व जयहरी गांवाें के जंगलों की ओर फैल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वनाग्नि से न केवल बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान हो रहा है बल्कि वन्यजीवों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है। इससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और भीषण गर्मी का असर और बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से शीघ्र आग पर काबू पाने की मांग की है। कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आग और अधिक क्षेत्र में फैल सकती है। उन्होंने वन विभाग से लगातार निगरानी और वनाग्नि रोकथाम के स्थायी उपाय करने की भी मांग की है। क्षेत्रवासियों ने कहा कि हर वर्ष गर्मियों में जंगल आग की घटनाओं से धधक उठते हैं लेकिन इसके बावजूद प्रभावी रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। डीएफओ जीवन मोहन दगाड़े का कहना है कि आरक्षित वन क्षेत्र अभी सुरक्षित हैं। सिविल व नापखेत से ही आग फैल रही है। सूचना मिलते ही वन कर्मियों और फायर वाचर भेजे जा रहे हैं।
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जयहरीखाल। भीषण गर्मी के बीच लैंसडौन वन प्रभाग के सिविल क्षेत्र बौठा गांव क्षेत्र में जंगलों में आग लग गई है। इससे दूर-दूर तक धुएं के गुबार फैल गए हैं। आग से चीड़ व मिश्रित वन संपदा को भारी नुकसान होने की आशंका है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से बढ़ती गर्मी और सूखे मौसम के कारण आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बौठा गांव के पास लगी आग धीरे-धीरे परिंदा व जयहरी गांवाें के जंगलों की ओर फैल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वनाग्नि से न केवल बहुमूल्य वन संपदा को नुकसान हो रहा है बल्कि वन्यजीवों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है। इससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और भीषण गर्मी का असर और बढ़ गया है।
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स्थानीय लोगों ने वन विभाग से शीघ्र आग पर काबू पाने की मांग की है। कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आग और अधिक क्षेत्र में फैल सकती है। उन्होंने वन विभाग से लगातार निगरानी और वनाग्नि रोकथाम के स्थायी उपाय करने की भी मांग की है। क्षेत्रवासियों ने कहा कि हर वर्ष गर्मियों में जंगल आग की घटनाओं से धधक उठते हैं लेकिन इसके बावजूद प्रभावी रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती। डीएफओ जीवन मोहन दगाड़े का कहना है कि आरक्षित वन क्षेत्र अभी सुरक्षित हैं। सिविल व नापखेत से ही आग फैल रही है। सूचना मिलते ही वन कर्मियों और फायर वाचर भेजे जा रहे हैं।