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Kotdwar News: वधशाला में लटके हैं ताले, खुले में मांस काटने से जनस्वास्थ्य को खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Thu, 21 May 2026 05:51 PM IST
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वर्ष 2013 में गाड़ीघाट क्षेत्र में 24 लाख की लागत से बनाया गया था, 2023 से पड़ा है बंद
कोटद्वार। गाड़ीघाट क्षेत्र में करीब 13 वर्ष पहले 24 लाख रुपये की लागत से बनी वधशाला (स्लाटर हाउस) बंद पड़ा है। इसके कारण मांस कारोबारी नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस काट रहे हैं जिससे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
पूर्व में डिग्री कॉलेज मार्ग पर जौनपुर में एक वधशाला संचालित होती थी जिसे स्थानीय लोगों के विरोध के बाद बंद कर दिया गया और वहां नगर निगम ने दुकानें बना दी। इसके बाद वर्ष 2013 में तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन ने गाड़ीघाट क्षेत्र में 24 लाख रुपये की लागत से इस वधशाला का निर्माण करवाया।
आवश्यक उपकरणों की खरीद और उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद निगम प्रशासन ने वर्ष 2022 में इसका संचालन शुरू किया। नगर निगम ने इसके लिए निविदा जारी की और एक स्थानीय व्यक्ति को 1,20,000 रुपये में संचालन का जिम्मा सौंपा। इसी बीच पर्यावरण मंजूरी और वधशाला के संचालन की अनुमति की अवधि समाप्त हो गई तभी से वधशाला में ताले लटके हुए हैं।
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वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र में 100 से अधिक मांस की दुकानें संचालित हो रही हैं। इन दुकानों में पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से अपशिष्ट पदार्थ नालियों में बहाए जा रहे हैं। इससे न केवल गंदगी फैल रही है बल्कि इलाके में बीमारियां फैलने की भी आशंका बनी हुई है।
वधशाला के लिए पर्यावरण मंजूरी और संचालन की अनुमति आवश्यक है। वधशाला के संचालन के लिए पर्यावरण मंजूरी हो चुकी है। संचालन की अनुमति मिलते ही वधशाला का विधिवत संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
-पीएल शाह, नगर आयुक्त कोटद्वार।
कोटद्वार। गाड़ीघाट क्षेत्र में करीब 13 वर्ष पहले 24 लाख रुपये की लागत से बनी वधशाला (स्लाटर हाउस) बंद पड़ा है। इसके कारण मांस कारोबारी नियमों का उल्लंघन कर खुले में मांस काट रहे हैं जिससे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
पूर्व में डिग्री कॉलेज मार्ग पर जौनपुर में एक वधशाला संचालित होती थी जिसे स्थानीय लोगों के विरोध के बाद बंद कर दिया गया और वहां नगर निगम ने दुकानें बना दी। इसके बाद वर्ष 2013 में तत्कालीन नगर पालिका प्रशासन ने गाड़ीघाट क्षेत्र में 24 लाख रुपये की लागत से इस वधशाला का निर्माण करवाया।
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आवश्यक उपकरणों की खरीद और उपलब्धता सुनिश्चित होने के बाद निगम प्रशासन ने वर्ष 2022 में इसका संचालन शुरू किया। नगर निगम ने इसके लिए निविदा जारी की और एक स्थानीय व्यक्ति को 1,20,000 रुपये में संचालन का जिम्मा सौंपा। इसी बीच पर्यावरण मंजूरी और वधशाला के संचालन की अनुमति की अवधि समाप्त हो गई तभी से वधशाला में ताले लटके हुए हैं।
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वधशाला के लिए पर्यावरण मंजूरी और संचालन की अनुमति आवश्यक है। वधशाला के संचालन के लिए पर्यावरण मंजूरी हो चुकी है। संचालन की अनुमति मिलते ही वधशाला का विधिवत संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
-पीएल शाह, नगर आयुक्त कोटद्वार।