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Kotdwar News: लचर पड़ी है राजकीय बेस अस्पताल की आईसीयू सेवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Mon, 20 Apr 2026 04:49 PM IST
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फिजिशियन और संसाधनों की कमी से जूझ रहा अस्पताल, रेफर हो रहे मरीज
कोटद्वार। गढ़वाल के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों को राजकीय बेस अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) का व्यापक लाभ नहीं मिल पा रहा है। दरअसल एकमात्र चार बेड का आईसीयू ही संचालित है और 10 बेड क्षमता का बंद पड़ा है। बेड खाली नहीं होने पर मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
गत वर्ष गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने बेस अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थापित आईसीयू का उद्घाटन किया था। उन्होंने आईसीयू में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं एवं उपचार सुविधा के संबंध में जानकारी की थी। साथ ही अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को दूर कर अस्पताल के सभी विभागों और आईसीयू यूनिट को पूरी क्षमता से चलाने के प्रति आश्वस्त किया था।
बीते एक वर्ष में एक-एक कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या तो बढ़ी लेकिन फिजिशियन की कमी अभी भी बनी हुई है जिसका सीधा असर आईसीयू संचालन पर पड़ रहा है। इस समय अस्पताल में संचालित चार बेड के आईसीयू में कोई फिजिशियन तैनात नहीं है। फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ ही व्यवस्थाओं को संचालित कर रहे हैं। आपात स्थिति में या फिर राउंड के दौरान ओपीडी से ही फिजिशियन आईसीयू में पहुंचते हैं।
वहीं, फिजिशियन एवं अन्य संसाधनों की कमी के कारण अस्पताल की बड़ी आईसीयू यूनिट बंद पड़ी है। ऐसे में अस्पताल में आने पर गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर के लिए रेफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बना हुआ है। मरीजों अजय माहेश्वरी एवं रानी आदि का कहना है कि लंबे समय तक बेस अस्पताल में इलाज कराने आने के बाद जब उन्हें आईसीयू जैसी आपात सुविधा नहीं मिल पाई, तो उन्हें मजबूरन मेरठ और देहरादून जाना पड़ा।
अस्पताल में एकमात्र फिजिशियन तैनात हैं। एक फिजिशियन को संबद्ध किया गया है। फिलहाल बंद पड़ी आईसीयू की बड़ी यूनिट में मेंटेनेंस और सफाई का काम किया जा रहा है। इसे संचालित करने के लिए स्थायी फिजिशियन की आवश्यकता होगी। इसके लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। -डॉ. विजय सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, बेस अस्पताल कोटद्वार।
उत्तराखंड में चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाने के लिए शासन गंभीर है। बेस अस्पताल कोटद्वार में पहले से काफी सुधार किया गया है। कुछ और चिकित्सक आएंगे, तो इसका व्यापक लाभ जनता को होगा। -ऋतु खंडूड़ी, विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड।
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कोटद्वार। गढ़वाल के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के मरीजों को राजकीय बेस अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) का व्यापक लाभ नहीं मिल पा रहा है। दरअसल एकमात्र चार बेड का आईसीयू ही संचालित है और 10 बेड क्षमता का बंद पड़ा है। बेड खाली नहीं होने पर मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर करना पड़ रहा है।
गत वर्ष गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने बेस अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थापित आईसीयू का उद्घाटन किया था। उन्होंने आईसीयू में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं एवं उपचार सुविधा के संबंध में जानकारी की थी। साथ ही अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को दूर कर अस्पताल के सभी विभागों और आईसीयू यूनिट को पूरी क्षमता से चलाने के प्रति आश्वस्त किया था।
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बीते एक वर्ष में एक-एक कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या तो बढ़ी लेकिन फिजिशियन की कमी अभी भी बनी हुई है जिसका सीधा असर आईसीयू संचालन पर पड़ रहा है। इस समय अस्पताल में संचालित चार बेड के आईसीयू में कोई फिजिशियन तैनात नहीं है। फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ ही व्यवस्थाओं को संचालित कर रहे हैं। आपात स्थिति में या फिर राउंड के दौरान ओपीडी से ही फिजिशियन आईसीयू में पहुंचते हैं।
वहीं, फिजिशियन एवं अन्य संसाधनों की कमी के कारण अस्पताल की बड़ी आईसीयू यूनिट बंद पड़ी है। ऐसे में अस्पताल में आने पर गंभीर रोगियों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर के लिए रेफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बना हुआ है। मरीजों अजय माहेश्वरी एवं रानी आदि का कहना है कि लंबे समय तक बेस अस्पताल में इलाज कराने आने के बाद जब उन्हें आईसीयू जैसी आपात सुविधा नहीं मिल पाई, तो उन्हें मजबूरन मेरठ और देहरादून जाना पड़ा।
अस्पताल में एकमात्र फिजिशियन तैनात हैं। एक फिजिशियन को संबद्ध किया गया है। फिलहाल बंद पड़ी आईसीयू की बड़ी यूनिट में मेंटेनेंस और सफाई का काम किया जा रहा है। इसे संचालित करने के लिए स्थायी फिजिशियन की आवश्यकता होगी। इसके लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। -डॉ. विजय सिंह, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, बेस अस्पताल कोटद्वार।
उत्तराखंड में चिकित्सीय सुविधाएं बढ़ाने के लिए शासन गंभीर है। बेस अस्पताल कोटद्वार में पहले से काफी सुधार किया गया है। कुछ और चिकित्सक आएंगे, तो इसका व्यापक लाभ जनता को होगा। -ऋतु खंडूड़ी, विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखंड।
