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Kotdwar News: काशीपुर–बुआखाल हाईवे बदहाल, गड्ढों से बढ़ा हादसों का खतरा
Sun, 16 Aug 2026 04:38 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 16 Aug 2026 04:38 PM IST
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दीबाखाल–कोठिला के बीच सिंगल रूट बना चुनौती
बैजरो/बीरोंखाल। काशीपुर–रामनगर–बुआखाल हाईवे इन दिनों बदहाली का शिकार है। करीब 264 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण रखरखाव में चुनौतियां बनी है। बजट की कमी और निर्माण संबंधी प्रतिबंधों के चलते कई स्थानों पर सड़क पर गहरे गड्ढे बने हैं। हाईवे का करीब 50 किलोमीटर हिस्सा कॉर्बेट नेशनल पार्क क्षेत्र से गुजरता है जहां सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध है।
बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरे जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। सड़क के दोनों ओर उगी घास और झाड़ियों के कारण सड़क की प्रभावी चौड़ाई भी कम हो रही है। कई स्थानों पर नालियां बंद हैं जबकि सड़क किनारे पड़े पत्थर और निर्माण सामग्री भी परेशानी का कारण बने हैं। रात में स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों ने राजमार्ग की तत्काल मरम्मत, गड्ढों को भरने, झाड़ियों की सफाई और सड़क किनारे पड़े पत्थर व अन्य सामग्री हटाने की मांग की है।
हाईवे पर हर मोड़ बना डेंजर जोन
दीबाखाल से कोठिला के बीच कई स्थानों पर सड़क सिंगल रूट में तब्दील हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग पौड़ी जनपद को कुमाऊं मंडल से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। बीरोंखाल ब्लॉक के ग्रामीण रोजाना इसी मार्ग से रामनगर, काशीपुर और हल्द्वानी आवाजाही करते हैं। गड्ढों, झाड़ियों और बिखरे पत्थरों के कारण लगभग हर मोड़ हादसे का डेंजर जोन बना है। मुख्य व्यापारिक कस्बों में नालियों का निर्माण न होना और अवैध कब्जे भी समस्या को बढ़ा रहे हैं।
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एनएच पर जहां भी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं उनका संज्ञान लेकर सुधारीकरण का कार्य कराया जा रहा है। सड़क के रखरखाव के लिए पूर्व में तैनात बेलदार व्यवस्था समाप्त होने से कुछ दिक्कतें आ रही है। क्षतिग्रस्त पुश्तों की भी जल्द मरम्मत कराई जाएगी।
-अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, एनएच धुमाकोट
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बैजरो/बीरोंखाल। काशीपुर–रामनगर–बुआखाल हाईवे इन दिनों बदहाली का शिकार है। करीब 264 किलोमीटर लंबे राजमार्ग का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण रखरखाव में चुनौतियां बनी है। बजट की कमी और निर्माण संबंधी प्रतिबंधों के चलते कई स्थानों पर सड़क पर गहरे गड्ढे बने हैं। हाईवे का करीब 50 किलोमीटर हिस्सा कॉर्बेट नेशनल पार्क क्षेत्र से गुजरता है जहां सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध है।
बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरे जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इससे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। सड़क के दोनों ओर उगी घास और झाड़ियों के कारण सड़क की प्रभावी चौड़ाई भी कम हो रही है। कई स्थानों पर नालियां बंद हैं जबकि सड़क किनारे पड़े पत्थर और निर्माण सामग्री भी परेशानी का कारण बने हैं। रात में स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो जाती है। ग्रामीणों ने राजमार्ग की तत्काल मरम्मत, गड्ढों को भरने, झाड़ियों की सफाई और सड़क किनारे पड़े पत्थर व अन्य सामग्री हटाने की मांग की है।
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हाईवे पर हर मोड़ बना डेंजर जोन
दीबाखाल से कोठिला के बीच कई स्थानों पर सड़क सिंगल रूट में तब्दील हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग पौड़ी जनपद को कुमाऊं मंडल से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। बीरोंखाल ब्लॉक के ग्रामीण रोजाना इसी मार्ग से रामनगर, काशीपुर और हल्द्वानी आवाजाही करते हैं। गड्ढों, झाड़ियों और बिखरे पत्थरों के कारण लगभग हर मोड़ हादसे का डेंजर जोन बना है। मुख्य व्यापारिक कस्बों में नालियों का निर्माण न होना और अवैध कब्जे भी समस्या को बढ़ा रहे हैं।
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एनएच पर जहां भी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं उनका संज्ञान लेकर सुधारीकरण का कार्य कराया जा रहा है। सड़क के रखरखाव के लिए पूर्व में तैनात बेलदार व्यवस्था समाप्त होने से कुछ दिक्कतें आ रही है। क्षतिग्रस्त पुश्तों की भी जल्द मरम्मत कराई जाएगी।
-अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, एनएच धुमाकोट