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Kotdwar News: 20 वर्षों से खंडहर पड़े कुली शेड का पुनर्निर्माण शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Mon, 18 May 2026 05:37 PM IST
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कुली शेड नहीं होने से पलायन कर रहे थे श्रमिक
अब कामगारों को मिल सकेगी रहने को छत
लैंसडौन। लैंसडौन में कामगारों के रहने के लिए कुली शेड का पुनर्निर्माण शुरू हो गया है। कुली शेड 20 वर्षों से खंडहर बना पड़ा था। छावनी परिषद के अध्यक्ष व मुख्य अधिशासी अधिकारी ने पुनर्निर्माण प्रक्रिया शुरू करवाई है।
वर्ष 1936 में ब्रिटिश सरकार द्वारा लैंसडौन में कामगारों को रहने का स्थान देने के लिए कुली शेड का निर्माण कराया गया था जिसमें आठ कमरे थे। इनमें लगभग 60 से 70 मजदूरों को रहने के लिए छत मिली थी। वर्ष 1990 से जर्जर हाल हो चुके कुली शेड में तीन परिवारों के 15 लोग रह रहे थे। वर्ष 2002 में छावनी परिषद ने खंडहर घोषित करते हुए कुली शेड को खाली करवा लिया था। श्रमिकों को रहने के लिए छत नहीं मिलने पर लैंसडौन से उनका पलायन शुरू हो गया था। कुछ वर्षों से लैंसडौन में श्रमिकों का अकाल हो गया था।
कुली शेड के पुनर्निर्माण की मांग लगातार की जा रही थी। इस संबंध में स्थानीय नागरिक छावनी अध्यक्ष व छावनी परिषद के सीईओ को ज्ञापन देकर कुली शेड के पुनर्निर्माण की मांग करते आ रहे थे। छावनी बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी व बोर्ड सचिव हर्षित राज ने कुली शेड के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता देते हुए इसके नए सिरे से निर्माण का प्रस्ताव पारित किया।
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छावनी परिषद के जेई आनंद दास ने बताया कि कुली शेड के नए सिरे से निर्माण के लिए बोर्ड ने पिछले दिनों प्रस्ताव पारित किया है। इसके पुनर्निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। कुली शेड के पुराने ढांचे को हटा लिया गया है। 900 वर्ग फीट क्षेत्रफल वाले कुली शेड में 8 कमरे प्रस्तावित हैं। जल्द ही श्रमिकों को रहने के लिए छत उपलब्ध हो सकेगी।
अब कामगारों को मिल सकेगी रहने को छत
लैंसडौन। लैंसडौन में कामगारों के रहने के लिए कुली शेड का पुनर्निर्माण शुरू हो गया है। कुली शेड 20 वर्षों से खंडहर बना पड़ा था। छावनी परिषद के अध्यक्ष व मुख्य अधिशासी अधिकारी ने पुनर्निर्माण प्रक्रिया शुरू करवाई है।
वर्ष 1936 में ब्रिटिश सरकार द्वारा लैंसडौन में कामगारों को रहने का स्थान देने के लिए कुली शेड का निर्माण कराया गया था जिसमें आठ कमरे थे। इनमें लगभग 60 से 70 मजदूरों को रहने के लिए छत मिली थी। वर्ष 1990 से जर्जर हाल हो चुके कुली शेड में तीन परिवारों के 15 लोग रह रहे थे। वर्ष 2002 में छावनी परिषद ने खंडहर घोषित करते हुए कुली शेड को खाली करवा लिया था। श्रमिकों को रहने के लिए छत नहीं मिलने पर लैंसडौन से उनका पलायन शुरू हो गया था। कुछ वर्षों से लैंसडौन में श्रमिकों का अकाल हो गया था।
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कुली शेड के पुनर्निर्माण की मांग लगातार की जा रही थी। इस संबंध में स्थानीय नागरिक छावनी अध्यक्ष व छावनी परिषद के सीईओ को ज्ञापन देकर कुली शेड के पुनर्निर्माण की मांग करते आ रहे थे। छावनी बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी व बोर्ड सचिव हर्षित राज ने कुली शेड के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता देते हुए इसके नए सिरे से निर्माण का प्रस्ताव पारित किया।
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