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Kotdwar News: पिंजरे में कैद मादा गुलदार को भेजा चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Wed, 28 Jan 2026 06:42 PM IST
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वन विभाग की टीम अब भी डटी हुई है गांव में
कोटद्वार। जयहरीखाल ब्लॉक के गुलदार प्रभावित गांव बरस्वार में पिंजरे में कैद गुलदार मादा है और उसकी उम्र करीब आठ साल है। वन विभाग की टीम गुलदार को चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर ले गई है। वहीं, वनकर्मियों की टीमें अब भी बरस्वार क्षेत्र में डटी हैं।
लैंसडौन के रेंजर राकेश चंद्र ने बताया कि जिस रूट पर गुलदार ने बच्ची पर हमला किया था। मादा गुलदार उसी रूट से आई और वहां लगे पिंजरे में कैद हो गई। गांव व आसपास के क्षेत्र में अन्य किसी गुलदार की मूवमेंट पिछले तीन दिन में नजर नहीं आई है। संभावना जताई कि पिंजरे में कैद गुलदार ही हमलावर गुलदार है। गांव में अब भी एक पिंजरा व 17 कैमरा ट्रैप लगे हुए हैं। साथ ही वनकर्मियों की 18 सदस्यीय चार टीमें भी गांव में डटी हुई हैं।
वहीं, लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत ने बुधवार को बरस्वार गांव पहुंचकर गुलदार के हमले में मृत याशिका के माता-पिता से मिलकर उनका ढांढस बंधाया और उन्हें हरसंभव सहयोग का भराेसा दिया। पूर्व प्रधान ध्यान सिंह ने बताया कि अब भी गांव की महिलाएं, गोशाला व खेतों में काम करने के लिए समूह में आवाजाही कर रही है।
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कोटद्वार। जयहरीखाल ब्लॉक के गुलदार प्रभावित गांव बरस्वार में पिंजरे में कैद गुलदार मादा है और उसकी उम्र करीब आठ साल है। वन विभाग की टीम गुलदार को चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर ले गई है। वहीं, वनकर्मियों की टीमें अब भी बरस्वार क्षेत्र में डटी हैं।
लैंसडौन के रेंजर राकेश चंद्र ने बताया कि जिस रूट पर गुलदार ने बच्ची पर हमला किया था। मादा गुलदार उसी रूट से आई और वहां लगे पिंजरे में कैद हो गई। गांव व आसपास के क्षेत्र में अन्य किसी गुलदार की मूवमेंट पिछले तीन दिन में नजर नहीं आई है। संभावना जताई कि पिंजरे में कैद गुलदार ही हमलावर गुलदार है। गांव में अब भी एक पिंजरा व 17 कैमरा ट्रैप लगे हुए हैं। साथ ही वनकर्मियों की 18 सदस्यीय चार टीमें भी गांव में डटी हुई हैं।
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वहीं, लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत ने बुधवार को बरस्वार गांव पहुंचकर गुलदार के हमले में मृत याशिका के माता-पिता से मिलकर उनका ढांढस बंधाया और उन्हें हरसंभव सहयोग का भराेसा दिया। पूर्व प्रधान ध्यान सिंह ने बताया कि अब भी गांव की महिलाएं, गोशाला व खेतों में काम करने के लिए समूह में आवाजाही कर रही है।