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Kotdwar News: आंदोलनकारियों ने हाथ में काले झंडे लेकर किया प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Fri, 20 Feb 2026 05:19 PM IST
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चिल्लरखाल-लालढांग मार्ग पर व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर रोक लगाने पर जताई नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में सही ढंग से पैरवी नहीं करने का लगाया आरोप
कण्वघाटी (कोटद्वार)। लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले भाबर के चिल्लरखाल में मार्ग निर्माण को लेकर चल रहे आंदोलन के 161वें दिन शुक्रवार को आंदोलनकारियों में गहरा रोष रहा। उन्होंने हाथों में काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया।
धरना सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने ठीक से पैरवी नहीं की जिससे कोर्ट ने मार्ग पर सभी व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी है। पैरवी के दौरान सरकार की ओर से नियुक्त अधिवक्ता ने महज 18 गांवों के 41,500 आबादी के हितों की बात ही कोर्ट के समक्ष रखी जबकि कोटद्वार विधानसभा से लगने वाले 5 से 6 विधानसभाओं के 6 से 7 लाख लोग इस मार्ग के न बनने से प्रभावित हैं।
सरकार ने केवल दो नदियों पर बनने वाले 400 मीटर के दो पुलों के निर्माण की बात कोर्ट में कही। 4.7 किमी के राजाजी टाइगर रिजर्व के ऊपर एलिवेटेड मार्ग की बात नहीं कही। आदेश के अनुसार अब सभी व्यावसायिक वाहन यूपी के रास्ते कोटद्वार आवागमन करेंगे। राज्य सरकार के द्वारा यूपी की सड़क को वैकल्पिक मार्ग बताना सरासर गलत है। कोटद्वार से लेकर चिल्लरखाल, भूदेवपुर तक की जनता का अपना कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। आखिर जनता दूसरे राज्य से 35 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाकर देहरादून व हरिद्वार क्यों जाए और अतिरिक्त टैक्स व आर्थिक नुकसान क्यों उठाए।
आंदोलन के संयोजक प्रवीण थापा ने कहा कि अब वो खुद सुप्रीम कोर्ट में जनता के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ेंगे। जनता स्वयं मार्ग पर दिन-रात आवागमन के लिए एलिवेटेड सड़क की गुहार लगाएगी। प्रदर्शनकारियों में पूर्व सैनिक रविंद्र सौंद, जगत सिंह नेगी, कृपाल सिंह गुसाईं, गोवर्धन काला, पीतांबर कपटियाल, गोविंद काला, गणेश रावत, भागा देवी, विनीता देवी, सीमा देवी, कल्पना जोशी, स्वाति लखेड़ा, शिवांगी, रेखा नेगी आदि शामिल रहे।
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कण्वघाटी (कोटद्वार)। लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले भाबर के चिल्लरखाल में मार्ग निर्माण को लेकर चल रहे आंदोलन के 161वें दिन शुक्रवार को आंदोलनकारियों में गहरा रोष रहा। उन्होंने हाथों में काले झंडे लेकर प्रदर्शन किया।
धरना सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने ठीक से पैरवी नहीं की जिससे कोर्ट ने मार्ग पर सभी व्यावसायिक वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी है। पैरवी के दौरान सरकार की ओर से नियुक्त अधिवक्ता ने महज 18 गांवों के 41,500 आबादी के हितों की बात ही कोर्ट के समक्ष रखी जबकि कोटद्वार विधानसभा से लगने वाले 5 से 6 विधानसभाओं के 6 से 7 लाख लोग इस मार्ग के न बनने से प्रभावित हैं।
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सरकार ने केवल दो नदियों पर बनने वाले 400 मीटर के दो पुलों के निर्माण की बात कोर्ट में कही। 4.7 किमी के राजाजी टाइगर रिजर्व के ऊपर एलिवेटेड मार्ग की बात नहीं कही। आदेश के अनुसार अब सभी व्यावसायिक वाहन यूपी के रास्ते कोटद्वार आवागमन करेंगे। राज्य सरकार के द्वारा यूपी की सड़क को वैकल्पिक मार्ग बताना सरासर गलत है। कोटद्वार से लेकर चिल्लरखाल, भूदेवपुर तक की जनता का अपना कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। आखिर जनता दूसरे राज्य से 35 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाकर देहरादून व हरिद्वार क्यों जाए और अतिरिक्त टैक्स व आर्थिक नुकसान क्यों उठाए।
आंदोलन के संयोजक प्रवीण थापा ने कहा कि अब वो खुद सुप्रीम कोर्ट में जनता के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ेंगे। जनता स्वयं मार्ग पर दिन-रात आवागमन के लिए एलिवेटेड सड़क की गुहार लगाएगी। प्रदर्शनकारियों में पूर्व सैनिक रविंद्र सौंद, जगत सिंह नेगी, कृपाल सिंह गुसाईं, गोवर्धन काला, पीतांबर कपटियाल, गोविंद काला, गणेश रावत, भागा देवी, विनीता देवी, सीमा देवी, कल्पना जोशी, स्वाति लखेड़ा, शिवांगी, रेखा नेगी आदि शामिल रहे।