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Kotdwar News: बजट की दरकार, फायर लाइन पर शुरू नहीं हो पाया काम
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Sun, 08 Mar 2026 06:44 PM IST
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गत वर्ष वनाग्नि की घटनाओं में हो चुका है काफी वन संपदा को नुकसान
दुगड्डा (कोटद्वार)। वनाग्नि की घटनाओं से निपटने के लिए इस वर्ष दुगड्डा रेंज को अब तक बजट नहीं मिला है। हालांकि वन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं और वन क्षेत्रों से सटे ग्रामीण इलाकों से जनसहयोग की अपील की जा रही है लेकिन बजट के अभाव में फायर लाइन का काम अब तक लंबित होने से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज का क्षेत्र कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग लैंसडौन की प्लेन रेंज की सीमा से सटा है। कुछ हिस्सा कोटद्वार व कोटरी रेंज से लगा हुआ है। यहां पर्यटक आते रहते हैं। उनकी जरा सी लापरवाही से आग सिविल क्षेत्र से निकलकर आरक्षित वन क्षेत्र में फैलने से वन संपदा को काफी क्षति पहुंचती है। गत वर्ष धरियालसार ग्राम के नापखेत से लगी आग हवा के वेग के साथ आरक्षित वन क्षेत्र में पहुंच गई थी। वन विभाग की टीमें तीन दिन में आग पर काबू पा सकी थीं।
आग पर काबू पाने के लिए पूर्व में बनाई गई फायर लाइनों के प्रतिवर्ष रखरखाव की आवश्यकता होती है। झवाणू वन खंड सीमा से बसाईंखान तक 20 किमी व आमसोती धार से बसाईंखान तक छह किमी लंबी एवं 100 फिट चौड़ी फायर लाइन है। फायर लाइन की झाड़ी कटान व नियंत्रित फुकान का कार्य प्रतिवर्ष पतझड़ के समय कराया जाता है। इस वर्ष पर्याप्त बजट नहीं मिलने से फायर लाइन का रखरखाव लंबित है। वन मोटर मार्ग, नेशनल हाईवे 534, स्टेट हाइवे 9 में सड़क के दोनों ओर की झाड़ी कटान का कार्य भी बजट के अभाव में अधूरा पड़ा है। मोड़ाखाल से ढिमकी वन मोटर मार्ग का रखरखाव भी अधूरा है।
अग्नि नियंत्रण कार्य के लिए बजट नहीं मिला है। सड़क के किनारे झाड़ी कटान, फायर लाइनों के रखरखाव का काम बजट मिलने पर पूरा कर लिया जाएगा।
-रमेशचंद्र सिंह नेगी, वन क्षेत्राधिकारी दुगड्डा
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दुगड्डा (कोटद्वार)। वनाग्नि की घटनाओं से निपटने के लिए इस वर्ष दुगड्डा रेंज को अब तक बजट नहीं मिला है। हालांकि वन विभाग की टीमें अलर्ट मोड पर हैं और वन क्षेत्रों से सटे ग्रामीण इलाकों से जनसहयोग की अपील की जा रही है लेकिन बजट के अभाव में फायर लाइन का काम अब तक लंबित होने से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज का क्षेत्र कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग लैंसडौन की प्लेन रेंज की सीमा से सटा है। कुछ हिस्सा कोटद्वार व कोटरी रेंज से लगा हुआ है। यहां पर्यटक आते रहते हैं। उनकी जरा सी लापरवाही से आग सिविल क्षेत्र से निकलकर आरक्षित वन क्षेत्र में फैलने से वन संपदा को काफी क्षति पहुंचती है। गत वर्ष धरियालसार ग्राम के नापखेत से लगी आग हवा के वेग के साथ आरक्षित वन क्षेत्र में पहुंच गई थी। वन विभाग की टीमें तीन दिन में आग पर काबू पा सकी थीं।
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आग पर काबू पाने के लिए पूर्व में बनाई गई फायर लाइनों के प्रतिवर्ष रखरखाव की आवश्यकता होती है। झवाणू वन खंड सीमा से बसाईंखान तक 20 किमी व आमसोती धार से बसाईंखान तक छह किमी लंबी एवं 100 फिट चौड़ी फायर लाइन है। फायर लाइन की झाड़ी कटान व नियंत्रित फुकान का कार्य प्रतिवर्ष पतझड़ के समय कराया जाता है। इस वर्ष पर्याप्त बजट नहीं मिलने से फायर लाइन का रखरखाव लंबित है। वन मोटर मार्ग, नेशनल हाईवे 534, स्टेट हाइवे 9 में सड़क के दोनों ओर की झाड़ी कटान का कार्य भी बजट के अभाव में अधूरा पड़ा है। मोड़ाखाल से ढिमकी वन मोटर मार्ग का रखरखाव भी अधूरा है।
अग्नि नियंत्रण कार्य के लिए बजट नहीं मिला है। सड़क के किनारे झाड़ी कटान, फायर लाइनों के रखरखाव का काम बजट मिलने पर पूरा कर लिया जाएगा।
-रमेशचंद्र सिंह नेगी, वन क्षेत्राधिकारी दुगड्डा