{"_id":"69c3b9d3e18b4c26560d4500","slug":"ashtami-and-ram-navami-2026-correct-date-know-shubh-muhurat-and-puja-timing-as-per-jyotish-vidwan-2026-03-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"26 या 27 मार्च? रामनवमी और अष्टमी की सही तारीख को लेकर न हों कन्फ्यूज, जानें पंडितों के अनुसार शुभ मुहूर्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
26 या 27 मार्च? रामनवमी और अष्टमी की सही तारीख को लेकर न हों कन्फ्यूज, जानें पंडितों के अनुसार शुभ मुहूर्त
माई सिटी रिपोर्टर
Published by: गायत्री जोशी
Updated Wed, 25 Mar 2026 04:02 PM IST
विज्ञापन
सार
Ashtami-Navami Kab Hai: चैत्र नवरात्रि 2026 में अष्टमी, नवमी और रामनवमी की तिथियों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंडितों के मत के अनुसार जानें कन्या पूजन और राम जन्मोत्सव का सबसे सटीक समय।
अष्टमी और रामनवमी 2026: तारीखों का फेर और विद्वानों का मत; जानें कब मनेगा राम जन्मोत्सव
विज्ञापन
विस्तार
सरोवर नगरी नैनीताल सहित पूरे कुमाऊं मंडल में चैत्र नवरात्रि की धूम है। मां नंदा-सुनंदा की धरती पर अष्टमी और नवमी के पर्व का विशेष महत्व होता है, लेकिन इस बार तिथियों के गणित ने श्रद्धालुओं को थोड़ा उलझा दिया है। लोग इस बात को लेकर संशय में हैं कि घरों में 'अठवाड़' (अष्टमी पूजन) कब होगा और रामनवमी का महापर्व किस दिन मनाया जाएगा।
इस वर्ष दुर्गाष्टमी, महानवमी और रामनवमी को लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति देखी जा रही है। वास्तव में प्रत्येक व्रत, पर्व और त्योहार केवल तिथि से नहीं, बल्कि उसके कर्मकाल तथा संबंधित सम्प्रदाय की परंपरा से भी जुड़ा होता है। इसलिए इन पर्वों का निर्णय शास्त्रीय आधार पर किया जाना चाहिए। दुर्गाष्टमी इस बार गुरुवार, 26 मार्च को मानी जाएगी, क्योंकि अष्टमी तिथि 26 मार्च गुरुवार को प्रातः 11:49 बजे तक रहेगी। अतः अष्टमी पूजन और दुर्गाष्टमी का विधान 26 मार्च को ही उपयुक्त है।
इसी प्रकार महानवमी एवं कन्या पूजन शुक्रवार, 27 मार्च को किया जाएगा, क्योंकि उस दिन नवमी तिथि प्रातः 10:07 बजे तक विद्यमान रहेगी। इसलिए दुर्गा नवमी, महानवमी तथा कन्या पूजन का श्रेष्ठ समय 27 मार्च को माना जाएगा।
जहाँ तक रामनवमी का प्रश्न है, यह पर्व मुख्यतः मध्याह्न व्यापिनी नवमी में मान्य होता है। वहीं वैष्णव सम्प्रदाय में अष्टमी रहित, उदयकाल यामिनी तथा पुनर्वसु नक्षत्र आदि का भी विशेष विचार किया जाता है। इसी कारण इस वर्ष स्मार्त एवं सामान्य गृहस्थजन 26 मार्च गुरुवार को रामनवमी व्रत करेंगे, जबकि वैष्णव सम्प्रदाय के श्रद्धालु 27 मार्च शुक्रवार को रामनवमी मनाएँगे।
अतः श्रद्धालुओं को किसी भ्रम में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। अपने सम्प्रदाय, परंपरा और शास्त्रीय कर्मकाल के अनुसार पर्व-पालन करना ही उचित और कल्याणकारी है। -आचार्य पवन पाठक,संपादक श्री बुद्धि बल्लभ पंचांग
ज्योतिषाचार्य डॉ मंजू जोशी ने बताया 26 मार्च को उदया तिथी में दुर्गा अष्टमी पर्व तथा रामनवमी का उपवास रखा जाएगा। अष्टमी मुहूर्त 25 मार्च अपराह्न 01:52 से 26 मार्च 2026 प्रातः 11:51 तक रहेगी इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी उन्होंने बताया 26 मार्च को ही मध्याह्न में नवमी तिथि व्याप्त होने से नवमी उपवास तथा राम जन्मोत्सव 26 मार्च को ही मनाया जाना शास्त्र सम्मत है। नवमी तिथि प्रारम्भ 26 मार्च 11:51 से 27 मार्च सुबह 10:09 तक रहेगीI 26 मार्च को सुबह 10:56 से अपराह्न 02:01 पर कन्या पूजन कर सकते हैं।-ज्योतिषाचार्य डॉ मंजू जोशी
ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि 25 मार्च को चैत्र शुक्ल अष्टमी दोपहर 1बजकर 51मिनट पर प्रारम्भ हो रही है वहीं 26 मार्च को पूर्वान्ह 11बजकर 40मिनट तक विद्यमान रहेगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार दुर्गाष्टमी 26मार्च को ही मनाना श्रेष्ठ है। इसी दिन 11:40 मिनट के पश्चात नवमी तिथि प्रारंभ हो जायेगी जो 27मार्च की सुबह 10 बजकर 8मिनट तक रहेगी।-ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय
Trending Videos
इस वर्ष दुर्गाष्टमी, महानवमी और रामनवमी को लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति देखी जा रही है। वास्तव में प्रत्येक व्रत, पर्व और त्योहार केवल तिथि से नहीं, बल्कि उसके कर्मकाल तथा संबंधित सम्प्रदाय की परंपरा से भी जुड़ा होता है। इसलिए इन पर्वों का निर्णय शास्त्रीय आधार पर किया जाना चाहिए। दुर्गाष्टमी इस बार गुरुवार, 26 मार्च को मानी जाएगी, क्योंकि अष्टमी तिथि 26 मार्च गुरुवार को प्रातः 11:49 बजे तक रहेगी। अतः अष्टमी पूजन और दुर्गाष्टमी का विधान 26 मार्च को ही उपयुक्त है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसी प्रकार महानवमी एवं कन्या पूजन शुक्रवार, 27 मार्च को किया जाएगा, क्योंकि उस दिन नवमी तिथि प्रातः 10:07 बजे तक विद्यमान रहेगी। इसलिए दुर्गा नवमी, महानवमी तथा कन्या पूजन का श्रेष्ठ समय 27 मार्च को माना जाएगा।
जहाँ तक रामनवमी का प्रश्न है, यह पर्व मुख्यतः मध्याह्न व्यापिनी नवमी में मान्य होता है। वहीं वैष्णव सम्प्रदाय में अष्टमी रहित, उदयकाल यामिनी तथा पुनर्वसु नक्षत्र आदि का भी विशेष विचार किया जाता है। इसी कारण इस वर्ष स्मार्त एवं सामान्य गृहस्थजन 26 मार्च गुरुवार को रामनवमी व्रत करेंगे, जबकि वैष्णव सम्प्रदाय के श्रद्धालु 27 मार्च शुक्रवार को रामनवमी मनाएँगे।
अतः श्रद्धालुओं को किसी भ्रम में पड़ने की आवश्यकता नहीं है। अपने सम्प्रदाय, परंपरा और शास्त्रीय कर्मकाल के अनुसार पर्व-पालन करना ही उचित और कल्याणकारी है। -आचार्य पवन पाठक,संपादक श्री बुद्धि बल्लभ पंचांग
ज्योतिषाचार्य डॉ मंजू जोशी ने बताया 26 मार्च को उदया तिथी में दुर्गा अष्टमी पर्व तथा रामनवमी का उपवास रखा जाएगा। अष्टमी मुहूर्त 25 मार्च अपराह्न 01:52 से 26 मार्च 2026 प्रातः 11:51 तक रहेगी इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी उन्होंने बताया 26 मार्च को ही मध्याह्न में नवमी तिथि व्याप्त होने से नवमी उपवास तथा राम जन्मोत्सव 26 मार्च को ही मनाया जाना शास्त्र सम्मत है। नवमी तिथि प्रारम्भ 26 मार्च 11:51 से 27 मार्च सुबह 10:09 तक रहेगीI 26 मार्च को सुबह 10:56 से अपराह्न 02:01 पर कन्या पूजन कर सकते हैं।-ज्योतिषाचार्य डॉ मंजू जोशी
ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय ने बताया कि 25 मार्च को चैत्र शुक्ल अष्टमी दोपहर 1बजकर 51मिनट पर प्रारम्भ हो रही है वहीं 26 मार्च को पूर्वान्ह 11बजकर 40मिनट तक विद्यमान रहेगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार दुर्गाष्टमी 26मार्च को ही मनाना श्रेष्ठ है। इसी दिन 11:40 मिनट के पश्चात नवमी तिथि प्रारंभ हो जायेगी जो 27मार्च की सुबह 10 बजकर 8मिनट तक रहेगी।-ज्योतिषी अशोक वार्ष्णेय