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Uttarakhand: हाईकोर्ट ने खारिज की अध्यापकों की वरिष्ठता संबंधी याचिकाएं, ये है पूरा मामला

Wed, 08 Jul 2026 11:33 AM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Wed, 08 Jul 2026 11:33 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने एक अक्टूबर 1990 से पहले तदर्थ नियुक्त एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं की वरिष्ठता विवाद वाली याचिका को खारिज कर दिया। 

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Uttarakhand  High Court dismisses teachers seniority petitions
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में 1 अक्टूबर 1990 से पहले तदर्थ आधार पर नियुक्त एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं की वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया हैं। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि ऐसे शिक्षकों की सेवाएं 1 अक्टूबर 1990 से नियमित मानी जाएंगी और वरिष्ठता भी उसी तिथि से मिलेगी।

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मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा पहले ही भुवन चंद्र कांडपाल मामले में तय हो चुका है, जिसे हाईकोर्ट की खंडपीठ और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। इसलिए इस प्रश्न पर दोबारा विचार करने का कोई औचित्य नहीं है। मामले में राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पूर्व के न्यायिक आदेशों के अनुपालन में नवंबर 2025 में संशोधित वरिष्ठता सूचियां जारी कर दी गई हैं, इसके तहत गढ़वाल मंडल के 268, कुमाऊं मंडल के 259 एलटी ग्रेड शिक्षकों तथा पूरे प्रदेश के 418 प्रवक्ताओं को 1 अक्टूबर 1990 से नियमितीकरण और उसी तिथि से वरिष्ठता का लाभ प्रदान किया जा चुका है।
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अदालत ने माना कि अधीनस्थ सेवा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के निर्देशों के अनुरूप वरिष्ठता निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे में ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार एवं अन्य पक्षों की याचिकाओं में अब कोई विवाद शेष नहीं रह गया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 21 नवंबर 1995 के शासनादेश तथा उसके आधार पर दिए गए नियमितीकरण और वरिष्ठता लाभ को अब पुनः चुनौती नहीं दी जा सकती। यह निर्णय उन सभी समान परिस्थितियों वाले शिक्षकों पर लागू होगा, जिनकी तदर्थ नियुक्ति 1 अक्टूबर 1990 से पहले हुई थी। इस फैसले से प्रदेश के सैकड़ों एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं की वरिष्ठता तथा उससे जुड़े पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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