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UK: एसिड अटैक में मां-बेटे समेत तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार, हाईकोर्ट ने अपील खारिज की; 2014 का मामला

Fri, 14 Aug 2026 12:23 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Fri, 14 Aug 2026 12:23 PM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने 2014 के हल्द्वानी एसिड अटैक मामले में दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को जघन्य अपराध बताते हुए बरकरार रखा।

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Uttarakhand High Court upheld the life sentence of three convicts in the acid attack case
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में हल्द्वानी के इंदिरा नगर में आपसी रंजिश के चलते हुए चर्चित एसिड अटैक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी मां, बेटे व अन्य को निचली अदालत से मिली आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपियों का यह कृत्य जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए सजा में रियायत या माफी की कोई गुंजाइश नहीं बनती है।

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न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार वर्ष 2014 में हल्द्वानी पड़ोस में रहने वाले इरशाद और उनके परिवार के साथ हुए आपसी विवाद के बाद मोहम्मद जैकी, उसकी मां रहमत जहां और एक नाबालिग ने गुस्से में आकर दुकान से लाकर तेजाब से भरी बोतलें फेंक दी थीं। इस भयानक हमले में 19 लोग प्रभावित हुए थे, जिनमें पांच लड़कियां और एक 18 माह का मासूम बच्चा भी शामिल था।

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चिकित्सीय जांच में दो डॉक्टरों ने पुष्टि की थी कि हमले में घायल हुए पांच लोगों के घाव और निशान जीवनभर ठीक नहीं हो सकते। मामले के सत्र परीक्षण के दौरान पेश किए गए 14 गवाहों और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत ने वर्ष 2018 में तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा था कि वे लगभग 12 वर्षों से जेल में हैं और अपनी सजा काट चुके हैं, इसलिए उन्हें रिहा किया जाए। हालांकि, पीड़ितों की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा कि एक मासूम बच्चे सहित कई लोगों की जिंदगी बर्बाद करने वाले दोषियों की सजा माफ नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए दोषियों की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है।

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