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Pauri News: भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, 70 शोध-पत्र प्रस्तुत
Sun, 02 Aug 2026 05:29 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
Updated Sun, 02 Aug 2026 05:29 PM IST
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- दो दिवसीय सम्मेलन में 11 तकनीकी सत्रों में 70 शोध-पत्र प्रस्तुत
- शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता और समकालीन उपयोगिता पर रखे विचार
श्रीनगर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणाली विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हो गया। सम्मेलन में देशभर के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता व वैश्विक चुनौतियों के समाधान में इसकी भूमिका पर मंथन किया। सम्मेलन के दौरान 11 तकनीकी सत्रों में 70 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला ने किया। मुख्य अतिथि डॉ. ऋषि मोहन भटनागर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों के दौर में भारतीय ज्ञान प्रणाली नवाचार और नैतिक नेतृत्व का मजबूत आधार बन सकती है। विशिष्ट अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, देवप्रयाग के निदेशक प्रो. पी.वी.बी. सुब्रह्मण्यम ने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य के संरक्षण व व्यापक प्रसार पर जोर दिया। प्रो. महेंद्र बाबू कुरुवा ने पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा और व्यावसायिक व्यवहार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष व सम्मेलन संयोजक डॉ. मीनाक्षी राणा ने भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्पाठ और समकालीन संदर्भों में उसके अकादमिक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। आयोजन सचिव डॉ. रेणु भदोला डंगवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकती है। दूसरे दिन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के प्रो. मुकेश कुमार शर्मा, चैतन्य मुकुंदानंद जी महाराज तथा उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन में 100 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 70 का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव हरि मौल आजाद, डॉ. धर्मेंद्र त्रिपाठी, डॉ. जागृति सहारिया, डॉ. कुसुम शर्मा आदि मौजूद थे।
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- शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक प्रासंगिकता और समकालीन उपयोगिता पर रखे विचार
श्रीनगर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) उत्तराखंड के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणाली विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हो गया। सम्मेलन में देशभर के शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की समकालीन प्रासंगिकता व वैश्विक चुनौतियों के समाधान में इसकी भूमिका पर मंथन किया। सम्मेलन के दौरान 11 तकनीकी सत्रों में 70 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. करुणेश कुमार शुक्ला ने किया। मुख्य अतिथि डॉ. ऋषि मोहन भटनागर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों के दौर में भारतीय ज्ञान प्रणाली नवाचार और नैतिक नेतृत्व का मजबूत आधार बन सकती है। विशिष्ट अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, देवप्रयाग के निदेशक प्रो. पी.वी.बी. सुब्रह्मण्यम ने भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत साहित्य के संरक्षण व व्यापक प्रसार पर जोर दिया। प्रो. महेंद्र बाबू कुरुवा ने पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा और व्यावसायिक व्यवहार से जोड़ने की आवश्यकता बताई। मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष व सम्मेलन संयोजक डॉ. मीनाक्षी राणा ने भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्पाठ और समकालीन संदर्भों में उसके अकादमिक अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। आयोजन सचिव डॉ. रेणु भदोला डंगवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी समाधान प्रस्तुत कर सकती है। दूसरे दिन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के प्रो. मुकेश कुमार शर्मा, चैतन्य मुकुंदानंद जी महाराज तथा उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन में 100 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 70 का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस अवसर पर कुलसचिव हरि मौल आजाद, डॉ. धर्मेंद्र त्रिपाठी, डॉ. जागृति सहारिया, डॉ. कुसुम शर्मा आदि मौजूद थे।
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