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Pauri News: आज से योगनिद्रा में जाएंगे श्रीहरि, चार माह तक थमेंगे मांगलिक कार्य

Fri, 24 Jul 2026 05:39 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, पौड़ी Updated Fri, 24 Jul 2026 05:39 PM IST
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Shri Hari Enters Yog-Nidra Today; Auspicious Ceremonies to Halt for Four Months
सत्य प्रसाद मैठाणी
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श्रीनगर। सनातन धर्म की प्रमुख एवं पुण्यदायी तिथियों में शामिल देवशयनी एकादशी आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ हो जाता है और विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञोपवीत सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। इस अवधि को जप, तप, दान, भक्ति और आत्मसाधना का सर्वोत्तम समय माना गया है। कमलेश्वर श्रीनगर के आचार्य आनंद प्रकाश नौटियाल ने बताया कि देवशयनी एकादशी का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु के शंख, चक्र, गदा और पद्मधारी स्वरूप की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान से सुख, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना की जाती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार---
दैत्यराज बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य दिया। बाद में माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भगवान विष्णु को उनके वचन से मुक्त कराया। इसके बाद श्रीहरि ने वचन निभाते हुए आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक प्रत्येक वर्ष पाताल लोक में निवास करने का संकल्प लिया। इसी अवधि को भगवान विष्णु की योगनिद्रा और चातुर्मास कहा जाता है। इस दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव के हाथों में माना जाता है, इसलिए सावन भगवान शिव की विशेष आराधना का माह माना जाता है। इस अवधि में ऋषि-मुनि तप, ध्यान और स्वाध्याय करते हैं, जबकि श्रद्धालु संयम, सेवा, सत्संग और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
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कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागेंगे। इसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होगा और विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन सहित सभी शुभ एवं मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो जाएंगे।
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