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Pithoragarh News: पिथौरागढ़ में 120 मत्स्य पालकों ने कराया मछलियों का बीमा
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Fri, 09 Jan 2026 11:34 PM IST
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पिथौरागढ़। जिले में पहली बार मछलियों का बीमा हुआ है। मत्स्य संपदा योजना के तहत संचालित इस बीमा योजना से जिले के 120 मत्स्य पालक जुड़े हैं। अब तालाब टूटने, बीमारी से मछलियों के मरने, दैवी आपदा आदि से नुकसान होने पर मत्स्य पालक को बीमा की राशि से क्षतिपूर्ति की जाएगी। इससे मत्स्य पालकों को नुकसान की भरपाई होगी।
पूर्व में केवल मत्स्य पालक ही अपना ही बीमा करा सकते थे। अब मछलियों के साथ ही तालाब का भी बीमा किया जा रहा है। सीमांत जिले में इसके लिए मत्स्य विभाग का युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ अनुबंध हुआ है। सीमांत जिले में 200 से अधिक लोग मत्स्य पालन कर रहे हैं इन्हें यह योजना खूब भा रही है। अब तक 120 मत्स्य पालकों ने मछलियों के साथ ही तालाब का बीमा कराया है। मत्स्य विभाग के मुताबिक ट्राउट मछली के 20 मीटर लंबे और दो मीटर चौड़े तालाब के बीमा की किश्त 1362.90 जबकि कार्प मछली के 20 मीटर लंबे और दो मीटर चौड़े तालाब के बीमा की किश्त 13.16 रुपये वहन करनी होगी। तालाब बहने सहित अन्य नुकसान पर मत्स्य पालक को मछली की उपलब्धता, आकार के हिसाब से बीमा क्लेम मिलेगा।
एनएफडीबी पोर्टल में कराना होगा पंजीकरण
मत्स्य विभाग के मुताबिक मत्स्य पालकों को मछली और तालाब का बीमा कराने के लिए एनएफडीबी (राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड) के पोर्टल में पंजीकरण करना आवश्यक होगा। वर्तमान में बीमा के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
दो मत्स्य पालकों को मिली बीमा राशि
मुनस्यारी क्षेत्र के दो मत्स्यपालकों को मछली बीज के मर जाने से आर्थिक नुकसान पहुंचा। दो मत्स्य पालकों को 4,18,900 रुपये का बीमा क्लेम मिला। रूईसपाटा निवासी मत्स्य पालक जगदीश मेहता के ट्राउट मछली के 21 हजार बीजों को नुकसान पहुंचा। उन्हें 3.17 लाख रुपये बीमा राशि प्रदान की गई।
कोट
मुख्यमंत्री संपदा योजना मत्स्य पालकों को आर्थिक नुकसान को कम करने में सहायक है। विभाग में ही किस्त जमा करनी होती है। इस योजना का मत्स्य पालकों को लाभ उठाना चाहिए। - डॉ. रमेश चलाल, जिला मत्स्य अधिकारी, पिथौरागढ़
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पूर्व में केवल मत्स्य पालक ही अपना ही बीमा करा सकते थे। अब मछलियों के साथ ही तालाब का भी बीमा किया जा रहा है। सीमांत जिले में इसके लिए मत्स्य विभाग का युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के साथ अनुबंध हुआ है। सीमांत जिले में 200 से अधिक लोग मत्स्य पालन कर रहे हैं इन्हें यह योजना खूब भा रही है। अब तक 120 मत्स्य पालकों ने मछलियों के साथ ही तालाब का बीमा कराया है। मत्स्य विभाग के मुताबिक ट्राउट मछली के 20 मीटर लंबे और दो मीटर चौड़े तालाब के बीमा की किश्त 1362.90 जबकि कार्प मछली के 20 मीटर लंबे और दो मीटर चौड़े तालाब के बीमा की किश्त 13.16 रुपये वहन करनी होगी। तालाब बहने सहित अन्य नुकसान पर मत्स्य पालक को मछली की उपलब्धता, आकार के हिसाब से बीमा क्लेम मिलेगा।
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एनएफडीबी पोर्टल में कराना होगा पंजीकरण
मत्स्य विभाग के मुताबिक मत्स्य पालकों को मछली और तालाब का बीमा कराने के लिए एनएफडीबी (राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड) के पोर्टल में पंजीकरण करना आवश्यक होगा। वर्तमान में बीमा के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है।
दो मत्स्य पालकों को मिली बीमा राशि
मुनस्यारी क्षेत्र के दो मत्स्यपालकों को मछली बीज के मर जाने से आर्थिक नुकसान पहुंचा। दो मत्स्य पालकों को 4,18,900 रुपये का बीमा क्लेम मिला। रूईसपाटा निवासी मत्स्य पालक जगदीश मेहता के ट्राउट मछली के 21 हजार बीजों को नुकसान पहुंचा। उन्हें 3.17 लाख रुपये बीमा राशि प्रदान की गई।
कोट
मुख्यमंत्री संपदा योजना मत्स्य पालकों को आर्थिक नुकसान को कम करने में सहायक है। विभाग में ही किस्त जमा करनी होती है। इस योजना का मत्स्य पालकों को लाभ उठाना चाहिए। - डॉ. रमेश चलाल, जिला मत्स्य अधिकारी, पिथौरागढ़