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Pithoragarh News: बालेश्वर मंदिर में 40 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 14 Apr 2026 11:02 PM IST
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थल (पिथौरागढ़)। साल का सबसे बड़ा मेला विषुवत संक्रांति पर्व पर प्राचीन बालेश्वर मंदिर में लगा। मंगलवार को यहां करीब 40 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान बालेश्वर के दर्शन किए।
तड़के तीन बजे से स्वयंभू शिव लिंग पर जलाभिषेक करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्ति और आस्था का यह संगम अपरान्ह तीन बजे तक रहा। भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर के पुजारी हरिशंकर भट्ट ने प्रातः साढ़े चार बजे के बाद मुख्य कपाट बंद कर दिया। उन्होंने लंबी मोटी पाइप और कीप के जरिए श्रद्धालुओं के जल का शिवलिंग में अभिषेक कराया।
नव संवत्सर, संक्रांति अपैट और राशि में आए दोष के निवारण के लिए चांदी के बामपाद चढ़ाने वालों की तादाद अधिक थी। मंदिर के बाहर आसन जमाए सौ से ज्यादा पुरोहितों से यजमानों ने शांति पाठ कराए। रामगंगा के तट पर बाहर से आए सौ व्यापारियों की दुकानें सजी थीं। मेले में करीब 35 लाख की खरीदारी हुई। बता दें कि 1940 तक इस मेले में एक लाख की बिक्री होती थी तब इसे लखटकिया मेला भी कहा जाता था। संवाद
बंगापानी शिव मंदिर में की पूजा-अर्चना
बंगापानी। बैशाख संक्रांति के पावन पर्व पर शिव मंदिर में लोगों ने पूजा-पाठ की। सुबह छह बजे से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पंडित परमानंद मिश्रा और हरीश जोशी ने यजमानों के बामपाद और राअपैट के दोषों का निवारण कर सुख-शांति की कामना की।
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नव संवत्सर, संक्रांति अपैट और राशि में आए दोष के निवारण के लिए चांदी के बामपाद चढ़ाने वालों की तादाद अधिक थी। मंदिर के बाहर आसन जमाए सौ से ज्यादा पुरोहितों से यजमानों ने शांति पाठ कराए। रामगंगा के तट पर बाहर से आए सौ व्यापारियों की दुकानें सजी थीं। मेले में करीब 35 लाख की खरीदारी हुई। बता दें कि 1940 तक इस मेले में एक लाख की बिक्री होती थी तब इसे लखटकिया मेला भी कहा जाता था। संवाद
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बंगापानी। बैशाख संक्रांति के पावन पर्व पर शिव मंदिर में लोगों ने पूजा-पाठ की। सुबह छह बजे से ही मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। पंडित परमानंद मिश्रा और हरीश जोशी ने यजमानों के बामपाद और राअपैट के दोषों का निवारण कर सुख-शांति की कामना की।

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