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Pithoragarh News: पिथौरागढ़ में कमजोर हो रहीं हड्डियां, विटामिन-डी की मिल रही कमी
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:09 PM IST
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पिथौरागढ़। हिमालय के नजदीक शुद्ध आबो-हवा के बीच बसे सीमांत जिले में स्वास्थ्य विभाग के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जिले में हर दूसरे मरीज की हड्डियां कमजोर हैं और इनमें विटामिन-डी की कमी मिली है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बीते एक साल में छह हजार लोगों में विटामिन-डी की जांच की गई। 3200 लोगों में इसकी कमी मिली। इसमें 60 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, बीते वर्ष जनवरी से दिसंबर तक छह हजार लोगों में विटामिन-डी की जांच की गई। करीब 51 फीसदी लोगों में इसकी कमी मिली। इसमें 60 प्रतिशत महिलाएं तो 40 प्रतिशत पुरुष शामिल हैं। हैरानी की बात है कि विटामिन-डी की कमी से जूझने वालों में 18 से 30 आयु वर्ग के 30 प्रतिशत युवा हैं।
चिकित्सकों के मुताबिक, हड्डियों में दर्द, बदन टूटना, थकान, पीठ व मांसपेशियों में तेज दर्द विटामिन-डी की कमी के लक्षण हैं। इसकी कमी से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि संबंधित रोगी को चोट लगने या सर्जरी के बाद घाव भरने में भी अधिक समय लग रहा है।
विटामिन-डी के साथ जरूरी है कैल्शियम
चिकित्सकों के मुताबिक विटामिन-डी आंतों में पहुंचे कैल्शियम को सोखने में सहायक होता है। विटामिन-डी की कमी से शरीर भोजन से मिलने वाले कैल्शियम को ठीक से सोख नहीं पाता है इससे शारीरिक विकास पैदा होते हैं। विटामिन-डी हड्डी को मजबूत करने वाली कोशिकाओं की गतिविधि को नियंत्रित भी करता है।
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लक्षण
तनाव और उदासी के साथ बिना काम किए थकावट महसूस होना। बालों का अधिक झड़ना और पूरी नींद के बाद भी थकान होना। मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द विटामिन-डी की कमी के प्रमुख लक्षण हैं।
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बचाव
सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बैठना जरूरी है। योगाभ्यास के साथ ही दूध, दही, अंडा, मशरूम, सलाद और हरी सब्जियां का सेवन करें।
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इन बातों का रखें ध्यान
धूप सेंकते समय हाथ, पीठ और पैर खुले रखें।
कोट
अस्पताल आने वाले अधिकांश लोगों में विटामिन-डी की कमी मिल रही है। मरीज को चिकित्सक के परामर्श के बाद ही दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। जिले में महिलाओं को रोजमर्रा के कामों के चलते सुबह की धूप नहीं मिल पाती है। महिलाओं में विटामिन-डी की कमी का यह भी प्रमुख कारण है। - डॉ. रवि जोशी, फिजियोथेरेपिस्ट, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
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जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, बीते वर्ष जनवरी से दिसंबर तक छह हजार लोगों में विटामिन-डी की जांच की गई। करीब 51 फीसदी लोगों में इसकी कमी मिली। इसमें 60 प्रतिशत महिलाएं तो 40 प्रतिशत पुरुष शामिल हैं। हैरानी की बात है कि विटामिन-डी की कमी से जूझने वालों में 18 से 30 आयु वर्ग के 30 प्रतिशत युवा हैं।
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चिकित्सकों के मुताबिक, हड्डियों में दर्द, बदन टूटना, थकान, पीठ व मांसपेशियों में तेज दर्द विटामिन-डी की कमी के लक्षण हैं। इसकी कमी से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि संबंधित रोगी को चोट लगने या सर्जरी के बाद घाव भरने में भी अधिक समय लग रहा है।
विटामिन-डी के साथ जरूरी है कैल्शियम
चिकित्सकों के मुताबिक विटामिन-डी आंतों में पहुंचे कैल्शियम को सोखने में सहायक होता है। विटामिन-डी की कमी से शरीर भोजन से मिलने वाले कैल्शियम को ठीक से सोख नहीं पाता है इससे शारीरिक विकास पैदा होते हैं। विटामिन-डी हड्डी को मजबूत करने वाली कोशिकाओं की गतिविधि को नियंत्रित भी करता है।
लक्षण
तनाव और उदासी के साथ बिना काम किए थकावट महसूस होना। बालों का अधिक झड़ना और पूरी नींद के बाद भी थकान होना। मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द विटामिन-डी की कमी के प्रमुख लक्षण हैं।
बचाव
सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बैठना जरूरी है। योगाभ्यास के साथ ही दूध, दही, अंडा, मशरूम, सलाद और हरी सब्जियां का सेवन करें।
इन बातों का रखें ध्यान
धूप सेंकते समय हाथ, पीठ और पैर खुले रखें।
कोट
अस्पताल आने वाले अधिकांश लोगों में विटामिन-डी की कमी मिल रही है। मरीज को चिकित्सक के परामर्श के बाद ही दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। जिले में महिलाओं को रोजमर्रा के कामों के चलते सुबह की धूप नहीं मिल पाती है। महिलाओं में विटामिन-डी की कमी का यह भी प्रमुख कारण है। - डॉ. रवि जोशी, फिजियोथेरेपिस्ट, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
