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Pithoragarh News: प्रवास से पैतृक गांवों में लौटने लगे लोग, टूटे पुल ने रोकी राह

संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 15 May 2026 12:32 AM IST
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People started returning to their ancestral villages after migration, but a broken bridge blocked their way.
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पिथौरागढ़। गर्मी शुरू होते ही मल्ला जोहार के ग्रामीणों का प्रवास से उच्च हिमालयी क्षेत्र स्थित अपने पैतृक गांवों में लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है। ग्रामीणों की टूटे पुल ने राह रोक दी है। एक साल पूर्व आपदा से मिलम के पास गोरी नदी में बना पुल टूट गया था इसका अब तक निर्माण नहीं हो सका है। ऐसे में ग्रामीण परेशान हैं। हालात यह है कि ग्रामीणों को अपने पैतृक गांवों में पहुंचने के लिए बदहाल रास्ते के बीच 10 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है।
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मल्ला जोहार के गनघर, पांछू गांव को जोड़ने वाला गोरी नदी में बना पैदल पुल बीते वर्ष आपदा में टूट गया था। इसी पुल से होकर ग्रामीण मैदानी क्षेत्रों से प्रवास से लौट कर मवेशियों के साथ अपने इन पैतृक गांवों में पहुंचते हैं। ग्रामीणों का इन गांवों में लौटने का सिलसिला शुरू हो गया है लेकिन अब तक पुल नहीं बन सका। ऐसे में ग्रामीण काफी परेशान हैं। मजबूर होकर ग्रामीण अपने गांवों में पहुंचने के लिए मर्तोली होते हुए 10 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगा रहे हैं। अब तक पुल का निर्माण न होने से ग्रामीणों में आक्रोश भी है।
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मिलम से राशन पहुंचाना भी हुआ मुश्किल
गोरी नदी पर बने इसी पुल से होकर पांछू और गनघर के ग्रामीण मिलम पहुंचते थे। मिलम से ही ग्रामीण राशन और दैनिक जरूरत का सामान गांवों में पहुंचाते हैं। पुल न होने से ग्रामीणों की दिक्कत बढ़ गई है। ग्रामीणों के लिए 10 दुर्गम रास्तों पर 10 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगा कर अपने गांवों में राशन सहित अन्य सामग्री पहुंचाना चुनौती बन गया है। मजबूरन ग्रामीण सीमित मात्रा में सामग्री पहुंचा कर काम चला रहे हैं।
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बोले ग्रामीण
गोरी नदी पर टूटे पुल का निर्माण न होने से दिक्कत बढ़ गई है। बमुश्किल हम अपने पैतृक गांवों में पहुंच रहे हैं। पुल न होने से कई बुजुर्ग ग्रामीणों के लिए अपने गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। - लोक बहादुर सिंह, गनघर
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एक साल बाद भी पुल न बनने से सभी परेशान हैं। ग्रामीणों को अपने पैतृक गांवों तक पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है। पुल का जल्द निर्माण जरूरी है। - राजू बृजवाल, पांछू

एक साल में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से पुल निर्माण की मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किसी को मल्ला जोहार के ग्रामीणों की सुध नहीं है जो गंभीर है। पुल न होने से कई ग्रामीण अपने पैतृक गांवों में नहीं जा पा रहे हैं। - श्रीराम सिंह धर्मसक्तू, अध्यक्ष, मल्ला जोहार विकास समिति, मुनस्यारी

मल्ला जोहार में गोरी नदी में आपदा से पुल टूट गया था। इसके नवनिर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति के बाद पुल का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। - अजय थपलियाल, ईई, लोनिवि, डीडीहाट

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