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Pithoragarh News: पहाड़ ने बांधे पंख, हवा ने रोकी लैंडिंग
Wed, 05 Aug 2026 11:32 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 05 Aug 2026 11:32 PM IST
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नैनीसैनी एयरपोर्ट
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पिथौरागढ़। नैनीसैनी एयरपोर्ट पर एकतरफा लैंडिंग की व्यवस्था हवाई सेवा के लिए चुनौती बनी हुई है। रनवे के एक तरफ पहाड़ी होने के कारण विमान को हवा के दबाव के विपरीत उतारना मुश्किल होता है। हवा का दबाव बढ़ने पर सुरक्षित लैंडिंग संभव नहीं होने से कई बार उड़ान रद्द करनी पड़ती है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
बीते मंगलवार दिल्ली से पिथौरागढ़ पहुंचा विमान तेज हवा के दबाव के कारण सीधे रनवे पर नहीं उतर सका। विमान को नेपाल सीमा की ओर जाना पड़ा। हवा का दबाव कम होने के बाद ही वह नैनीसैनी एयरपोर्ट पर उतर पाया। इसके चलते विमान देहरादून का फेरा नहीं लगा सका। एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक देहरादून से लौटने के दौरान भी हवा का दबाव अधिक रहने की आशंका थी। ऐसी स्थिति में विमान को रनवे पर उतारना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं होता। लिहाजा देहरादून की उड़ान रद्द करनी पड़ी।
अधिकारियों के अनुसार रनवे के दूसरी तरफ पहाड़ी नहीं होने पर हवा के विपरीत दिशा में भी विमान उतारा जा सकता था, लेकिन मौजूदा भौगोलिक स्थिति में एकतरफा लैंडिंग ही विकल्प है। खराब मौसम के दौरान उड़ानें प्रभावित होने का यह भी एक प्रमुख कारण है।
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विस्तारीकरण से दूर होगी एकतरफा लैंडिंग की समस्या
नैनीसैनी एयरपोर्ट का एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) को हस्तांतरण हो चुका है। इसके साथ ही एयरपोर्ट के विस्तारीकरण की योजना भी आगे बढ़ी है। करीब 53 हेक्टेयर भूमि में प्रस्तावित विस्तारीकरण के बाद एकतरफा लैंडिंग की समस्या दूर होने की उम्मीद है। इससे हवाई सेवा अधिक सुचारु होने के साथ यात्रियों को भी राहत मिलेगी। हालांकि विस्तारीकरण का काम कब शुरू होगा इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
जमीन जुटाना सरकार के लिए चुनौती
एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए प्रशासन और राज्य सरकार के सामने भूमि उपलब्ध कराने की चुनौती है। नैनीसैनी क्षेत्र के लोग पूर्व में एयरपोर्ट के लिए अपनी भूमि दिए जाने और प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा पूरा नहीं होने की बात कहकर विरोध जता चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में एयरपोर्ट के लिए उन्होंने अपनी भूमि दी थी, लेकिन रोजगार का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। ऐसे में अब विस्तारीकरण के लिए दोबारा भूमि देने को लेकर क्षेत्र के लोगों में असहमति है।
नैनीसैनी एयरपोर्ट के निदेशक संदीप यादव ने बताया कि नैनीसैनी एयरपोर्ट पर एक तरफ पहाड़ी होने के कारण विमान की एकतरफा लैंडिंग कराना मजबूरी है। एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के बाद यह समस्या दूर हो जाएगी।
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बीते मंगलवार दिल्ली से पिथौरागढ़ पहुंचा विमान तेज हवा के दबाव के कारण सीधे रनवे पर नहीं उतर सका। विमान को नेपाल सीमा की ओर जाना पड़ा। हवा का दबाव कम होने के बाद ही वह नैनीसैनी एयरपोर्ट पर उतर पाया। इसके चलते विमान देहरादून का फेरा नहीं लगा सका। एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक देहरादून से लौटने के दौरान भी हवा का दबाव अधिक रहने की आशंका थी। ऐसी स्थिति में विमान को रनवे पर उतारना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं होता। लिहाजा देहरादून की उड़ान रद्द करनी पड़ी।
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अधिकारियों के अनुसार रनवे के दूसरी तरफ पहाड़ी नहीं होने पर हवा के विपरीत दिशा में भी विमान उतारा जा सकता था, लेकिन मौजूदा भौगोलिक स्थिति में एकतरफा लैंडिंग ही विकल्प है। खराब मौसम के दौरान उड़ानें प्रभावित होने का यह भी एक प्रमुख कारण है।
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विस्तारीकरण से दूर होगी एकतरफा लैंडिंग की समस्या
नैनीसैनी एयरपोर्ट का एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) को हस्तांतरण हो चुका है। इसके साथ ही एयरपोर्ट के विस्तारीकरण की योजना भी आगे बढ़ी है। करीब 53 हेक्टेयर भूमि में प्रस्तावित विस्तारीकरण के बाद एकतरफा लैंडिंग की समस्या दूर होने की उम्मीद है। इससे हवाई सेवा अधिक सुचारु होने के साथ यात्रियों को भी राहत मिलेगी। हालांकि विस्तारीकरण का काम कब शुरू होगा इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
जमीन जुटाना सरकार के लिए चुनौती
एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए प्रशासन और राज्य सरकार के सामने भूमि उपलब्ध कराने की चुनौती है। नैनीसैनी क्षेत्र के लोग पूर्व में एयरपोर्ट के लिए अपनी भूमि दिए जाने और प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा पूरा नहीं होने की बात कहकर विरोध जता चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में एयरपोर्ट के लिए उन्होंने अपनी भूमि दी थी, लेकिन रोजगार का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। ऐसे में अब विस्तारीकरण के लिए दोबारा भूमि देने को लेकर क्षेत्र के लोगों में असहमति है।
नैनीसैनी एयरपोर्ट के निदेशक संदीप यादव ने बताया कि नैनीसैनी एयरपोर्ट पर एक तरफ पहाड़ी होने के कारण विमान की एकतरफा लैंडिंग कराना मजबूरी है। एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के बाद यह समस्या दूर हो जाएगी।