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Pithoragarh News: सड़क के सर्वे ने आलम वालों का माहौल बना दिया

संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Mon, 12 Jan 2026 10:51 PM IST
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The road survey created a stir among the people of Alam.
बंगापानी के आलम गांव में मोटर मार्ग सर्वे टीम का स्वागत करते ग्रामीण। स्रोत : ग्रामीण
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रमेश धामी
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बंगापानी (पिथौरागढ़)। आजादी के इतने वर्षों बाद भी दूरस्थ इलाकों के लोग आज भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए किस तरह तरस रहे हैं यह क्षेत्र के आलम गांव में मोटर मार्ग के सर्वे के लिए आई टीम के स्वागत से समझा जा सकता है।
नौ स्वतंत्रता सेनानियों और एक वीर चक्र विजेता देने वाली ग्राम पंचायत आलम-दारमा के आलम गांव और अन्य तोक कभी 45 परिवारों की चहल-पहल से गुलजार रहते थे। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को पलायन के लिए मजबूर कर दिया और आज आलम क्षेत्र में करीब 20-22 परिवार ही रह गए हैं।
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एक ही ग्राम पंचायत के हिस्से आलम और दारमा के बीच की दूरी करीब आठ किलोमीटर है। वर्ष 2016 में दारमा तक छह किलोमीटर लंबी सड़क कटनी शुरू हुई जो करीब 10 साल कछुवा गति से चलते हुए कुछ समय पहले ही पूरी हुई। तीन-चार महीने पहले गोरी नदी पर पुल बनने के बाद दारमा तक टैक्सी और दोपहिया से आवागमन होने लगा। अब दारमा से आलम तक सड़क पहुंचाने के लिए तीन-चार दिन से पीएमजीएसवाई की टीम आलम में सर्वे कार्य में जुटी थी।
सोमवार को आलम के अंतिम तोक तक सर्वे पूरा हुआ तो लोग खुशी से गदगद हो गए। बुजुर्गों, महिलाओं व अन्य ग्रामीणों ने सर्वे टीम का फूल-मालाएं पहनाकर स्वागत किया। टीम जब गांव में पहुंची तो बुजुर्ग और महिलाएं खुशी से झूम उठे। उन्होंने कहा कि गांव तक सड़क पहुंचने से उनकी दुश्वारियां काफी हद तक कम हो जाएंगी। संवाद
ग्रामीणों का कहना
आज काफी खुशी का दिन है। शायद हमारे जीते-जी सड़क गांव तक पहुंच जाएगी और हमें भी गांव तक गाड़ी से आने-जाने का सौभाग्य मिलेगा। दो साल से मोटर मार्ग तक नहीं जा पाया हूं। पैदल रास्ता इतना खराब है कि नीचे देखते ही चक्कर आते हैं। वृद्धावस्था पेंशन लेने बंगापानी नहीं जा पा रहा हूं। - भीम सिंह धामी, आलम
इलाके के लोगों को सड़क के अभाव में काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। जल्द सड़क बनेगी तो कुछ परेशानियां कम होंगी। बहुत देर से ही सही आखिर अब लगता है कि गांव तक जल्द ही सड़क बन जाएगी। - गंगा सिंह चिराल, आलम
मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गांव के कई परिवार पलायन कर गए हैं। स्कूल और अस्पताल पहुंचने के लिए बच्चों तथा अन्य लोगों को आठ किमी पैदल चलने के बाद मदकोट, मवानी-दवानी या सेरा जाना पड़ता है। - रज्जाक धामी, दारमा
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